Covid-19 वैक्सीन का 'पावरहाउस' बनेगा भारत, मोदी सरकार ने उत्पादन बढ़ाने के लिए बनाया ये खास प्लान

Mansukh Mandaviya ने भारत को कोविड -19 वैक्सीन का 'पावरहाउस' बनाने के लिए खास सुझाव दिया है

अपडेटेड Jan 25, 2022 पर 7:39 PM
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Mansukh Mandaviya ने भारत को कोविड -19 वैक्सीन का 'पावरहाउस' बनाने के लिए खास सुझाव दिया है

भारत को कोविड -19 वैक्सीन का 'पावरहाउस' (India coronavirus Vaccine Powerhouse) बनाने के लिए केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने एक खास प्लान तैयार किया है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्र सरकार ने वैक्सीन की उत्पादन शुरू करने के लिए उनके संसाधनों और क्षमताओं को समझने के लिए 4 बीमार पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग (PSU) के साथ संपर्क किया है।

News18.com के मुताबिक, सरकार की तरफ से हिंदुस्तान कीटनाशक लिमिटेड (HIL), बंगाल केमिकल्स एंड फार्मास्युटिकल्स लिमिटेड (BCPL), इंडियन ड्रग्स एंड फार्मास्युटिकल्स लिमिटेड (IDPL) और हिंदुस्तान एंटीबायोटिक्स लिमिटेड (HAL) जैसी कंपनियों को चर्चा के लिए बुलाया गया है।

मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने News18.com को बताया कि योजना अभी प्रारंभिक चरण में है, जहां हम केवल संसाधनों और क्षमताओं के संदर्भ में इन फार्मा PSU की स्थिति को समझना चाहते हैं। घटनाक्रम की जानकारी रखने वाले अधिकारियों के मुताबिक, यह विचार सबसे पहले केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया (Mansukh Mandaviya) ने पेश किया था।


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अधिकारी ने कहा कि वह (मनसुख मंडाविया) भारत को कोविड -19 वैक्सीन के एक पावरहाउस के रूप में देखते हैं। भारत ने अपनी अधिकांश आबादी का वैक्सीनेशन कर चुका है, जबकि देश में अभी भी फेस- 2 और फेस- 3 में कई अन्य वैक्सीन कैंडिडेट हैं। अधिकारी ने यह समझाते हुए कहा कि भारत दुनिया भर के कई देशों को कोविड -19 वैक्सीन की आपूर्ति करके उनकी मदद कर सकता है।

अधिकारी ने कहा कि एक बार हम अपनी आबादी का वैक्सीनेशन करने के बाद आसानी से वैक्सीन का निर्यात कर सकते हैं और दुनिया भर के देशों को कोविड -19 को मिटाने में मदद कर सकते हैं। उन्होंने आगे कहा कि शुरुआती चर्चा में ऐसा लगता है कि इन कंपनियों के पुनरुद्धार के लिए भारी मात्रा में निवेश की आवश्यकता होगी।

HIL रसायन और पेट्रोकेमिकल विभाग, रसायन और उर्वरक मंत्रालय के अंतर्गत आता है। सरकार द्वारा शुरू किए गए राष्ट्रीय मलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के लिए डीडीटी की आपूर्ति के उद्देश्य से कंपनी को 1954 में शामिल किया गया था। DDT एक रसायन है जिसका उपयोग मलेरिया को रोकने के लिए छिड़काव के लिए किया जाता है।

जबकि फर्म ने कृषि कीटनाशक उत्पादों और कंपनी की वेबसाइट पर दावा किया है कि 2019-2020 के लिए इसका कारोबार 417.70 करोड़ रुपये है। हालांकि, अधिकारी ने कहा कि कंपनी को वैक्सीन के उत्पादन में कोई विशेषज्ञता नहीं है। रिपोर्ट्स के मुताबिक नीति आयोग ने HIL को बंद करने की सिफारिश की है।

बता दें कि पिछले दिनों अमेरिकी इंटरनेशनल डेवलपमेंट फाइनेंस कॉरपोरेशन (DFC) के प्रमुख डेविड मारचिक ने भी कहा था कि भारत वैक्सीन का पावरहाउस है और वैक्सीन के निर्माण में देश के साथ अमेरिका के काम करने से लोगों की जिंदगियां बच रही हैं।

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