India-China LAC Agreement: सीमा पर भारत-चीन के बीच तनाव कम करने की कोशिशें शुरू, टकराव वाले प्वाइंट से अस्थायी टेंट हटाए गए

India-China LAC Agreement: चार साल से अधिक समय से जारी सैन्य गतिरोध को समाप्त करने में एक बड़ी सफलता के रूप में भारत ने 21 अक्टूबर को घोषणा की थी कि वह पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर गश्त करने को लेकर चीन के साथ एक समझौते पर पहुंच गया है। समझा जाता है कि इस समझौते से देपसांग और डेमचोक क्षेत्रों में गश्त शुरू होगी, क्योंकि इन दोनों स्थानों पर कई बड़े अनसुलझे मुद्दे थे

अपडेटेड Oct 25, 2024 पर 10:34 AM
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India-China LAC Agreement: वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर भारत-चीन के सैनिकों के पीछे हटने की प्रक्रिया शुरू हो गई है

India-China LAC Agreement: पूर्वी लद्दाख में करीब चार साल से चल रहे सैन्य गतिरोध को खत्म करने के लिए भारत और चीन के बीच हुए समझौते के तहत वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर सैनिकों की वापसी शुरू हो गई है। रक्षा सूत्रों ने CNN-News18 को बताया कि सीमा पर टकराव वाले प्वाइंट देपसांग (Depsang points) और डेमचोक (Demchok points) से कुछ अस्थायी टेंट दोनों देशों ने हटा दिए हैं। सूत्रों ने कहा कि विवादित क्षेत्र में दोनों देशों की ओर से एक-एक तंबू तथा कुछ अस्थायी संरचनाओं को हटा दिया गया है। भारतीय सैनिक चार्डिंग नाला के पश्चिमी किनारे की ओर वापस लौट रहे हैं। जबकि चीनी सैनिक नाला के पूर्वी किनारे की ओर पीछे हट रहे हैं।

सूत्रों ने बताया कि दो साल पहले भारत और चीन ने चार अलग-अलग स्थानों पर पीछे हटना शुरू किया था, जहां बफर जोन बनाए गए थे। सूत्रों के अनुसार, स्थानीय कमांडर वरिष्ठ स्तर पर तय की गई व्यापक शर्तों के अनुसार मौजूदा पीछे हटने की प्रक्रिया से निपट रहे हैं। सूत्रों ने आगे कहा कि पूरी प्रक्रिया में समय लगेगा लेकिन इसकी शुरुआत हो चुकी है।

उन्होंने कहा कि समझौते की घोषणा के तुरंत बाद इसकी शुरुआत हो गई है। अगले कुछ दिनों में स्थानीय कमांडरों की बैठक होगी। उन्होंने कहा कि हालांकि, सैनिकों द्वारा अपने टेंट हटाने का मतलब यह नहीं है कि वे पीछे हट रहे हैं। उन्होंने कहा कि जैसे ही रास्ते में अवरोध पैदा करने वाले अस्थायी ढांचे हटा दिए जाएंगे, फिर गश्त शुरू हो जाएगी।


बुधवार (23 अक्टूबर) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने पूर्वी लद्दाख में एलएसी पर गश्त और सैनिकों को पीछे हटाने पर भारत-चीन समझौते का ब्रिक्स सम्मेलन से इतर द्विपक्षीय बैठक में बुधवार को समर्थन किया। उन्होंने विभिन्न द्विपक्षीय वार्ता तंत्र को बहाल करने के निर्देश जारी किए, जो 2020 की सैन्य झड़प से प्रभावित हुए संबंधों को सामान्य बनाने के प्रयासों का संकेत देते हैं।

भारत ने किया था समझौता का ऐलान

भारत ने सोमवार 21 अक्टूबर को घोषणा की थी कि भारतीय और चीनी वार्ताकार पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर गश्त के लिए एक समझौते पर सहमत हुए हैं। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच पिछले कई हफ्तों तक हुई बातचीत के बाद इस समझौते को अंतिम रूप दिया गया। यह 2020 में पैदा हुए गतिरोध के समाधान का मार्ग प्रशस्त करेगा।

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बताया कि भारतीय और चीनी सैनिक एक बार फिर उसी तरह से गश्त शुरू कर सकेंगे। जैसे वे सीमा पर टकराव शुरू होने से पहले करते थे। उन्होंने कहा कि चीन के साथ सैनिकों की वापसी की प्रक्रिया पूरी हो गई है। समझा जाता है कि यह समझौता देपसांग और डेमचोक में गश्त की शुरुआत करेगा, क्योंकि दोनों इलाकों में कई मुद्दों को लेकर गतिरोध बरकरार था।

गलवान घाटी में हुई थी भीषण झड़प

जून 2020 में गलवान घाटी में हुई भीषण झड़प के बाद भारत और चीन के बीच संबंध निचले स्तर पर पहुंच गए थे। यह झड़प पिछले कुछ दशकों में दोनों पक्षों के बीच हुई सबसे भीषण सैन्य झड़प थी। पिछले कुछ वर्षों में कई दौर की सैन्य और राजनयिक वार्ता के बाद दोनों पक्ष टकराव वाले कई बिंदुओं से पीछे हट गए थे। हालांकि, बातचीत में देपसांग और डेमचोक में गतिरोध दूर नहीं किया जा सका।

एनडीटीवी के एक सम्मेलन में जयशंकर ने समझौते को अंतिम रूप दिए जाने को एक "सकारात्मक घटनाक्रम" करार दिया था। उन्होंने कहा, "हम गश्त के साथ सैन्य वापसी पर एक समझौते पर सहमत हुए, जिसके तहत 2020 की स्थिति बहाल हो गई। हम कह सकते हैं कि चीन के साथ सैन्य वापसी की प्रक्रिया पूरी हो गई है।" जयशंकर ने कहा, "मुझे लगता है कि यह एक अच्छा कदम है; यह एक सकारात्मक घटनाक्रम है और मैं कहूंगा कि यह बहुत ही संयमित और बहुत ही दृढ़ कूटनीति का नतीजा है।"

एक सवाल के जवाब में विदेश मंत्री ने संकेत दिए कि भारत देपसांग और अन्य इलाकों में गश्त करने में सक्षम होगा। उन्होंने कहा, "हमारे बीच एक सहमति बनी है, जो न सिर्फ देपसांग में, बल्कि और भी इलाकों में गश्त की अनुमति देगी। मेरी समझ से इस सहमति के जरिए हम उन इलाकों में गश्त करने में सक्षम होंगे, जहां हम 2020 में (गतिरोध से पहले) कर रहे थे।" जयशंकर ने कहा कि दोनों पक्ष गतिरोध खत्म करने के लिए सितंबर 2020 से बातचीत कर रहे हैं।

विदेश मंत्री ने कहा, "यह बहुत ही संयमित प्रक्रिया रही है और शायद यह ''जितना हो सकती थी और होनी चाहिए थी, उससे कहीं अधिक जटिल थी।" उन्होंने कहा कि 2020 से पहले एलएसी पर शांति थी और "हमें उम्मीद है कि हम उस स्थिति को बहाल कर सकेंगे।"

रक्षा मंत्री ने की समझौते की पुष्टि

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार (24 अक्टूबर) को कहा कि भारत और चीन के बीच वार्ता के बाद वास्तविक नियंत्रण रेखा पर जमीनी स्थिति बहाल करने के लिए व्यापक सहमति बन गयी है, जिसमें पारंपरिक क्षेत्रों में गश्त और मवेशियों को चराने की अनुमति देना भी शामिल है।

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सिंह ने कहा, "भारत और चीन एलएसी के साथ कुछ क्षेत्रों में मतभेदों को सुलझाने के लिए सैन्य और कूटनीतिक, दोनों स्तर पर बातचीत कर रहे हैं। वार्ता के बाद, समान और पारस्परिक सुरक्षा के सिद्धांत के आधार पर जमीनी स्थिति को बहाल करने के लिए व्यापक सहमति बन गई है।" रक्षा मंत्री ने कहा, "इसमें गश्त करना, पारंपरिक क्षेत्रों में मवेशियों को चराने की अनुमति देना भी शामिल है। यह निरंतर बातचीत करने से संभव हुआ है, देर-सवेर समाधान निकल ही जाएगा।"

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