PMI data : फरवरी में देश की सर्विसेज PMI जनवरी के 56.5 से बढ़कर 59 के स्तर पर आ गई है। इसके साथ ही फरवरी में कंपोजिट PMI पिछले महीने के 57.7 से बढ़कर 58.8 पर रही है। बता दें कि कंपोजिट PMI, सर्विसेज PMI और मैन्यूफैक्चरिंग पीएमआई का संयुक्त रूप होता है। PMI मिलाजुला इंडेक्स होता है जिसे मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर की स्थिति का आंकलन करने के लिए उपयोग में लाया जाता है। पीएमआई आंकड़ों में 50 को आधार माना गया है। पीएमआई आंकड़े अगर 50 से ऊपर हैं तो इसे कारोबारी गतिविधियों के विस्तार के तौर पर देखा जाएगा और अगर 50 से नीचे के आंकड़े हैं तो कारोबारी गतिविधियों में गिरावट के तौर पर देखा जाता है। PMI हर माह जारी किया जाता है।
सर्विस पीएमआई में छह उद्योगों को शामिल करते हैं, जिसमें ट्रांसपोर्ट और कम्युनिकेशन, बिजनेस सर्विसेज, पर्सनल सर्विसेज, फाइनेंशियल इंटरमीडिएशन, कंप्यूटिंग एंड आईटी और होटल्स व रेस्टोरेंट शामिल हैं।
5 मार्च को जारी प्राइवेट सेक्टर के सर्वेक्षण के मुताबिक फरवरी में भारत के सर्विस सेक्टर के प्रदर्शन में सुधार हुआ है। इस सेक्टर का एक्टिविटी इंडेक्स पिछले महीने के 56.5 से बढ़कर 59 पर आ गया है एचएसबीसी की चीफ इंडिया इकोनॉमिस्ट प्रांजुल भंडारी ने कहा, नए एक्सपोर्ट ट्रेड इंडेक्स के मुताबिक छह महीनों में सबसे तेज गति से बढ़ी ग्लोबल डिमांड ने भारत के सर्विस सेक्टर के उत्पादन में बढ़त को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाई है।
सर्विस सेक्टर का प्रदर्शन मैन्युफैक्चरिंग इंडेक्स के विपरीत रहा, जिसमें फरवरी में में गिरावट देखने को मिली और यह 14 महीने के निचले स्तर 56.3 पर पहुंच गया। एचएसबीसी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स भी पिछली तिमाही के 56.8 के स्तर से कम था।
पिछले साल भारत के सर्विसेज एक्सपोर्ट ने भी गुड्स एक्सपोर्ट की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया है। एचएसबीसी ने कहा है कि अंतर्राष्ट्रीय ऑर्डरों में बढ़त ने इस ट्रेंड को सपोर्ट दिया है। सर्विस प्रोवाइडरों ने अफ्रीका,एशिया, यूरोप,अमेरिका और मध्य पूर्व में ग्राहकों से बेहतर मांग आने की जानकारी दी है। कुल मिलाकर,बाहर के देशों के लिए होने वाली बिक्री पिछले छह महीनों में सबसे तेज गति से बढ़ी है। इसका रोजगार पर भी प्रभाव पड़ा है और रोजगार सृजन 2005 के बाद सबसे तेज गति से बढ़ा है।
पिछले हफ्ते जारी जीडीपी डेटा से भी पता चला है कि तीसरी तिमाही की आर्थिक गतिविधि में सुधार में सर्विस सेक्टर का काफी बड़ा योगदान रहा। तीसरी तिमाही देश की विकास दर 5.6 फीसदी के दो साल के निचले स्तर से बढ़कर 6.2 फीसदी हो गई। वित्त वर्ष 2025 में भारत के सर्विस सेक्टर में 7.3 फीसदी की बढ़त होने की उम्मीद है, जबकि पिछले वर्ष इसमें 9 फीसदी की बढ़त देखने को मिली थी।