इंडिया ने World Bank से 1 अरब डॉलर (करीब 8,200 रुपये) का लोन लिया है। इसका इस्तेमाल हेल्थकेयर सुविधाओं (Healthcare Facilities) को बेहतर बनाने के लिए होगा। यह लोन दो किस्तों में मिलेगा। लोन के इस समझौते पर वर्ल्ड बैंक (World Bank) और सरकार के बीच 3 फरवरी को हस्ताक्षर हुए। सरकार ने हेल्थकेयर की सुविधाओं को बेहतर बनाने पर अपना फोकस बढ़ाया है। इसके बावजूद इंडिया में हेल्थकेयर सुविधाओं की हालत अच्छी नहीं है। आबादी की बड़ी आबादी खासकर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों की पहुंच प्राइवेट अस्पतालों तक नहीं है। उधर, सरकारी अस्पतालों की स्थिति ठीक नहीं है।
ऐसा तब है जब कोरोना की महामारी के बाद सरकार लगातार मेडिकल सुविधाओं को बेहतर बनाने पर फोकस कर रही है। सरकार का मानना है कि कोरोना जैसी महामारी की स्थिति दोबारा पैदा होने पर लोगों को इलाज मिलने में किसी तरह की दिक्कत नहीं आनी चाहिए। सरकार ने यूनिवर्स हेल्थ इंश्योरेंस स्कीम भी शुरू की है। अभी इसका फायदा आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों को मिल रहा है। लेकिन, सरकार की योजना आबादा के दूसरे हिस्सों को भी इस स्कीम के दायरे में लाने की है। सरकार ने अक्टूबर 2021 में प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन (PMABHIM) भी शुरू किया है।
बताया जाता है कि वर्ल्ड बैंक से करीब 8,200 करोड़ रुपये के लोन का इस्तेमाल पीएमएबीएचआईएम के लिए होगा। इसके तहत सात राज्यों में हेल्थ सर्विसेज को बेहतर बनाने पर फोकस होगा। इनमें आंध्र प्रदेश, केरल, ओडिशा, उत्तर प्रदेश, पंजाब और तमिलनाडु शामिल हैं। बताया जाता है कि इन राज्यों में स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति अच्छी नहीं है। वर्ल्ड बैंक के कर्ज से इन राज्यों में हेल्थ खासकर पब्लिक हेल्थ सर्विसेज को बेहतर बनाया जाएगा।
वर्ल्ड बैंक ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि पिछले कुछ सालों में इंडिया ने हेल्थ सर्विसेज में सुधार किया है। इससे जीवन प्रत्याशा (Life Expectancy) बढ़ी है। यह 1990 में 58 साल थी, जो 2020 बढ़कर 69.8 हो गई है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि हेल्थकेयर फैसिलिटीज को और बेहतर बनाने की गुंजाइश है। खासकर पब्लिक हेल्थकेयर इंफ्रास्ट्रक्चर में जल्द सुधार करने की जरूरत है। इसकी वजह यह है कि आर्थिक रूप से कमजोर लोग प्राइवेट अस्पतालों का खर्च नहीं उठा सकते।