चीन से सीमा-विवाद के बीच भारत सरकार ने पोर्टेबल एयर डिफेंस मिसाइलों को खरीदने का फैसला किया है। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक इन मिसाइलों को चीन सीमा पर तैनात किया जाएगा। सरकार ने पोर्टेबल मिसाइलों की खरीद को मंजूरी ऐसे समय में दी है, जब भारत-चीन के बीच हालिया सीमा-विवाद तीसरे साल में प्रवेश कर गया है। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह की अगुआई वाली रक्षा खरीद परिषद (DAC) ने मंगलवार देर रात को बहुत कम दूरी में वार करने वाले मिसाइलों को खरीदने को मंजूरी दे दी है। इन मिसाइलों की खासबात यह है कि इन कोई भी सैनिक आराम से उठाकर एक जगह से दूसरे जगह ले जा सकता है। पहाड़ के ऊबड़-खाबड़ इलाकों के अलावा समुद्री इलाकों में भी इन्हें तेजी से तैनात किया जा सकका है। इसीलिए इन्हें पोर्टेबल मिसाइल कहा गया है।
रक्षा मंत्रालय की तरफ से जारी एक बयान में मुताबिक, "देश की उत्तरी सीमाओं पर हाल में हुए घटनाओं को देखते हुए एक मजबूत एयर डिफेंस हथियार सिस्टम की जरूरत महसूस की गई। खासतौर से ऐसा हथियार सिस्टम, जिसे कोई इंसान भी एक जगह से उठाकर दूसरे जगह ले जा सके और कहीं भी तेजी से तैनात कर सकें। ये भारत की वायु रक्षा क्षमताओं को मजबूत करेगी।"
ये मिसाइलें कम ऊंचाई वाले हवाई खतरों को कम दूरी के रेंज में मार गिराने में सक्षम हैं। इन्हें भारतीय रिसर्च संस्थान डीआरडीओ (DRDO) ने विकसित किया है और यह अमेरिका की सतह से सतह मार कर सकने वाली FIM-92 स्टिंगर मिसाइलों के समान है।
हाल ही में रूस-यूक्रेन जंग के दौरान यह मिसाइल सिस्टम काफी प्रभावी साबित हुआ है और अमेरिका ने रूस के हवाई हमलों से बचने के लिए यूक्रेन को कम से कम ऐसे 1,600 स्टिंगर मिसाइलें दी हैं।
रक्षा मंत्रालय ने इसके अलावा देश में ही बने एंटी-टैंक मिसाइलों और ब्राह्मोस एंटी-शिप मिसाइलें के खरीद को भी मंजूरी दी है। इन तीनों सौदों के लिए कुल 4,276 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। एंटी-टैंक मिसाइलों को हल्के वजन वाले हेलीकॉप्टरों में लगाया जाएगा।