Vande Bharat और गतिमान एक्सप्रेस ट्रेनों की घटाई जाएगी स्पीड, रेलवे क्यों कम रही रफ्तार?

Indian Railway: सूत्रों ने बताया कि प्रीमियम ट्रेनों के संशोधित टाइमिंग के कारण इन रूट्स पर चलने वाली कम से कम 10 सुपरफास्ट एक्सप्रेस ट्रेनों के समय में बदलाव होगा। रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि दिल्ली-आगरा-झांसी रूट्स पर ट्रेन सुरक्षा और वार्निंग सिस्टम की विफलता के कारण प्रीमियम ट्रेनों की गति धीमी की जा रही है

अपडेटेड Jun 26, 2024 पर 1:50 PM
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Indian Railway: ट्रेनों की कम स्पीड के कारण इनके चलने का समय लगभग 25-30 मिनट बढ़ जाएगा

भारतीय रेलवे (Indian Railway) की कुछ प्रीमियम ट्रेनों की स्पीड कम करने जा रही है। रेलवे जल्द ही चुनिंदा रूट्स पर वंदे भारत एक्सप्रेस और गतिमान एक्सप्रेस सहित कुछ प्रीमियम ट्रेनों की स्पीड को मौजूदा 160 किमी प्रति घंटे से घटाकर 130 किमी प्रति घंटे कर देगा। रेलवे अधिकारियों ने बताया कि यह फैसला इसलिए लिया गया है, ताकि यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। प्रस्ताव के अनुसार, गतिमान और वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों की गति 160 किमी प्रति घंटे से घटाकर 130 किमी प्रति घंटे की जाएगी। जबकि शताब्दी एक्सप्रेस की रफ्तार 150 किमी प्रति घंटे से घटाकर 130 किमी प्रति घंटे की जाएगी। इन ट्रेनों की कम स्पीड के कारण इनके चलने का समय लगभग 25-30 मिनट बढ़ जाएगा।

रेलवे सूत्रों ने मंगलवार को 'द हिंदू' को बताया कि उत्तर मध्य रेलवे ने रेलवे बोर्ड को पत्र लिखकर ट्रेन संख्या 12050/12049 दिल्ली-झांसी-दिल्ली गतिमान एक्सप्रेस, ट्रेन संख्या 22470/22469 दिल्ली-खजुराहो-दिल्ली वंदे भारत एक्सप्रेस, ट्रेन संख्या 20172/20171 दिल्ली-रानी कमलापति-दिल्ली वंदे भारत एक्सप्रेस और ट्रेन संख्या 12002/12001 दिल्ली-रानी कमलापति-दिल्ली शताब्दी एक्सप्रेस ट्रेनों की स्पीड कम करने के लिए कहा है।

10 सुपरफास्ट की टाइमिंग में भी बदलाव


सूत्रों ने बताया कि प्रीमियम ट्रेनों के संशोधित टाइमिंग के कारण इन रूट्स पर चलने वाली कम से कम 10 सुपरफास्ट एक्सप्रेस ट्रेनों के समय में बदलाव होगा। यह पूछे जाने पर कि क्या स्पीड में कमी देश भर में दुर्घटनाओं की बढ़ती संख्या के कारण है, क्योंकि यह आदेश पश्चिम बंगाल में कंचनजंगा एक्सप्रेस दुर्घटना के एक सप्ताह के भीतर जारी किया गया था, जिसमें 10 लोग मारे गए थे और 40 अन्य घायल हो गए थे। रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि दिल्ली-आगरा-झांसी रूट्स पर ट्रेन सुरक्षा और वार्निंग सिस्टम की विफलता के कारण प्रीमियम ट्रेनों की गति धीमी की जा रही है।

उत्तर रेलवे का TPWS (Train Protection & Warning System) को खत्म करने या ट्रेनों की गति को 130 किलोमीटर प्रति घंटा तक कम करने का प्रस्ताव 6 नवंबर, 2023 से रेलवे बोर्ड के पास लंबित था। लेकिन उत्तर मध्य रेलवे ने 25 जून, 2024 को ट्रेनों की स्पीड को 130 किलोमीटर प्रति घंटा तक कम करने का एक और प्रस्ताव रखा। चूंकि डिवीजनल रेलवे मैनेजर की एक रिपोर्ट के अनुसार TPWS की मरम्मत या रखरखाव संभव नहीं था, इसलिए रेलवे बोर्ड से प्रीमियम ट्रेनों को 130 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिक सुरक्षित गति पर संचालित करने के लिए डाउनग्रेड करने का अनुरोध किया गया था।

सूत्रों ने बताया कि चूंकि दो जोनल रेलवे ने सुरक्षा को कारण बताते हुए प्रीमियम ट्रेनों को धीमा करने की आवश्यकता के बारे में लिखित रूप से दिया था। इसलिए रेलवे बोर्ड के पास मंजूरी देने के अलावा कोई विकल्प नहीं था। स्पीड में बदलाव के परिणामस्वरूप लगभग 8-10 अन्य ट्रेनों की रफ्तार या परिचालन कार्यक्रम को संशोधित करना होगा। संभावना है कि प्रीमियम ट्रेनों की स्पीड को बनाए रखने के लिए उन ट्रेनों के चलने का समय भी कम हो जाएगा।

यह पूछे जाने पर कि क्या देश भर के अन्य रूट्स पर संचालित वंदे भारत एक्सप्रेस की गति भी कम की जाएगी, एक अन्य रेलवे अधिकारी ने कहा कि दिल्ली-कानपुर सेक्टर में कुछ हिस्सों को छोड़कर लगभग सभी रूट्स पर सेमी-हाई-स्पीड ट्रेनें केवल 130 किमी प्रति घंटे की गति से चल रही हैं, जहां ट्रैक 160 किमी प्रति घंटे के लिए फिट है।

'निर्णय दुर्भाग्यपूर्ण है'

इस बीच, वंदे भारत एक्सप्रेस के निर्माण के पीछे के व्यक्ति और इंटीग्रल कोच फैक्ट्री के पूर्व प्रिंसिपल चीफ मैकेनिकल इंजीनियर शुभ्रांशु ने कहा कि TPWS के निष्क्रिय होने के आधार पर प्रीमियम ट्रेनों की गति कम करने से कोई उद्देश्य पूरा नहीं होगा। 17 जून, 2024 को पश्चिम बंगाल में कंचनजंगा एक्सप्रेस दुर्घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि एक्सप्रेस ट्रेन से टकराने वाली मालगाड़ी केवल 45 किमी प्रति घंटे की गति से चल रही थी।

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उन्होंने 'द हिंदू' से कहा, "मुझे समझ में नहीं आता कि इन ट्रेनों की गति 160 किलोमीटर प्रति घंटे से घटाकर 130 किलोमीटर प्रति घंटे करने से सुरक्षा के लिए क्या उद्देश्य पूरा होगा। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि इतनी सारी आकांक्षाओं के साथ बनाई गई एक सेमी-हाई-स्पीड ट्रेन की गति को मूल कारण जाने बिना ही धीमा किया जा रहा है।"

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