चंद्रयान-2 के बाद चंद्रयान-3 की तैयारी, गगनयान के लिए भी जल्द शुरू होगी ट्रेनिंग

इसरो को सरकार से चंद्रयान-3 के लिए मंजूरी मिल गई है और यह प्रोजेक्ट शुरू कर दिया गया है

अपडेटेड Jan 01, 2020 पर 5:00 PM

चंद्रयान-2 के बाद अब भारत चंद्रयान-3 की तैयारी शुरू कर रहा है। इसरो (Indian Space and Research Organization) के अध्यक्ष के. सिवन ने बुधवार को मीडिया से बातचीत में बताया कि इसरो को सरकार से चंद्रयान-3 के लिए मंजूरी मिल गई है और यह प्रोजेक्ट शुरू कर दिया गया है।

सिवन ने बताया कि इसरो ने चंद्रयान-2 के साथ अच्छी प्रगति की है। भले ही यान सफलतापूर्वक लैंड नहीं कर पाया लेकिन इसका ऑर्बिटर अभी भी काम कर रहा है और अगले सात सालों तक करता रहेगा। यह साइंस डेटा प्रोड्यूस करता रहेगा।

उन्होंने बताया कि इसरो ने गगनयान के लिए एस्ट्रोनॉट्स की ट्रेनिंग की तैयारी शुरू कर रहा है। इसके लिए इंडियन एयर फोर्स से चार लोगों को भारत के पहले human spaceflight mission की ट्रेनिंग के लिए रूस भेजा जाएगा। उन्होंने कहा कि ये चार लोग जनवरी के तीसरे हफ्ते से रूस में ट्रेनिंग लेंगे।

सिवन ने यह भी बताया कि दूसरे स्पेस पोर्ट के लिए जमीन अधिग्रहित की जा रही है। यह जमीन तमिलनाडु के तूतुकुडी में ली जा रही है और इसकी प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।

इसके पहले आज ही केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने भी कहा कि भारत 2020 में चंद्रयान-3 लॉन्च करेगा। उन्होंने कहा कि इस अभियान पर चंद्रयान-2 से भी कम लागत आएगी।

PMO में राज्य मंत्री ने कहा कि चंद्रयान-2 को निराशा करार देना गलत होगा, जबकि यह चंद्रमा के सतह पर उतरने की भारत की पहली कोशिश थी और कोई देश पहली कोशिश में ऐसा नहीं कर सका। अमेरिका ने भी कई कोशिशें की थी।


सिंह ने कहा- हां, लैंडर और रोवर मिशन के 2020 में होने की बहुत संभावना है। हालांकि, जैसा कि मैंने पहले भी कहा है कि चंद्रयान-2 मिशन को नाकाम नहीं कहा जा सकता क्योंकि हमने इससे काफी कुछ सीखा है।

उन्होंने कहा कि चंद्रयान-2 से मिले अनुभव और उपलब्ध मूल इंफ्रास्ट्रक्चर के चलते चंद्रयान-3 की लागत कम रहेगी। हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि चंद्रयान-3 का प्रक्षेपण किस महीने में करने का लक्ष्य लेकर चला जा रहा है।

बता दें कि चंद्रयान-2 चांद की सतह पर उतरने की कोशिश करने वाला भारत का पहला मिशन था। इसरो की योजना चांद के दक्षिणी ध्रुव पर लैंड करने की थी, लेकिन यान का लैंडर विक्रम क्रैश के साथ लैंड हुआ, जिसके बाद इसरो का उससे कनेक्शन टूट गया। नासा ने बहुत कोशिशों के बाद एक भारतीय इंजीनियर की मदद से लैंडर की जगह का पता लगाया है।

 

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