हिमालय की पहाड़ियों में बसा उत्तराखंड का जोशीमठ (Joshimath) इन दिनों सुर्खियों में बना हुआ है। चीन की सीमा से लगे जोशीमठ के आस पास बांध, सड़क और मिलिट्री जोन बनाए जाने के चलते पहाड़ों की प्राकृतिक स्थिति खराब हुई है। जिस वजह से अब यहां के कई सारे घरों और जमीनों में दारारें आने लगी हैं। 6 हजार फिट की ऊंचाई पर बसे जोशीमठ के नीचे जमीन खिसकने और धंसने के जोखिम को पर्यवरणविदों द्वारा कई सालों पहले ही बताया गया था। इसके अलावा जोशीमठ भूकंप के लिहाज से भी सेस्मिक जोन में आता है।
जोशीमठ के अलावा उत्तराखंड के इन इलाकओं पर भी है खतरा
नैनीताल (Nainital) स्थित कुमाऊं यूनिवर्सिटी में जियोलॉजी के प्रोफेसर राजीव उपाध्याय का कहना है कि उत्तराखंड के उत्तरी भाग में गाँव और कस्बे हिमालय के भीतर प्रमुख सक्रिय थ्रस्ट जोन में स्थित हैं और इस क्षेत्र के नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र के कारण बहुत संवेदनशील हैं। इनमें से कई सारे घर पुराने भूकंपों के मलबों पर बने हुए हैं। इसके अलावा कई सारी कंस्ट्रक्शन गतिविधियों के चलते भी यहां पर खतरा बढ़ा है। जोशीमठ में जमीन धंसने की घटनाओं की शुरुआत 1970 के दशक से देखी जा रही है। राजीव उपाध्याय का कहना है कि अगर इस इलाके में गतिविधियां बढ़ती हैं तो यह खतरा और ज्यादा बढ़ेगा। जोशीमठ के साथ उत्तराखंड के और भी ऐसे इलाके हैं जहां पर इसी तरह का खतरा बना हुआ है। आइये जानते हैं कौन से हैं वे इलाके।
जोशीमठ: जोशीमठ को पवित्र धार्मिक स्थल बद्रीनाथ (Badrinath) का प्रवेश द्वार भी कहा जाता है। बद्रीनाथ जाने वाले लाखों पर्यटक और श्रद्धालु हर साल इस शहर में आते हैं। शहर के पास में ही NTPC एक प्रोजेक्ट पर भी काम कर रहा है। हाल के दिनों में जमीन धंसने की वजह से कई परिवारों को अपना घर छोड़ना पड़ा है।
टिहरी: टिहरी इलाके के कुछ घरों में दरार पड़ने की घटनाएं सामने आई हैं। बता दें कि टिहरी डैम भारत का सबसे ऊंचा बांध है और सबसे बड़ी पनबिजली परियोजनाओं में से एक है। साथ ही यह एक फेमस टूरिस्ट स्पॉट भी है।
माना: चीन की सीमा से लगा यह भारत का आखिरी गांव भी है। जिस वजह से इसे नेशनल हाईवे के साथ जोड़ा जा रहा है। पर्यावरण समूहों ने परियोजना के बारे में चिंता जताते हुए कहा है कि वन्यजीवों से समृद्ध क्षेत्र में पेड़ों की कटाई से जमीन खिसकने या धंसने का खतरा बढ़ जाएगा।
धरासू: यह छोड़ा पहाड़ी कस्बा सेना के साथ स्थानीय लोगों के लिए भी एक अहम लैंडिंग ग्राउंड है।
हर्षिल: हिमालय तीर्थ मार्ग पर पड़ने वाला एक शहर है। साथ ही ये शहर भारतीय सेना के ऑपरेशन चलाने के लिहाज से भी खासा अहम हो जाता है। साल 2013 की आकस्मिक बाढ़ के दौरान, क्षेत्र तबाह हो गया था।
गौचर: यह जगह जोशीमठ से लगभग 100 किलोमीटर की दूरी पर है। चीन सीमा से इस शहर की दूरी सिर्फ 200 किलोमीटर की है। यह एक महत्वपूर्ण नागरिक और सैन्य हवाई अड्डा है। साल 2013 में भारतीय वायु सेना के बचाव और राहत प्रयासों का बड़ा हिस्सा इसी शहर से किया गया था।
पिथौरागढ़: यह शहर लोकल लोगों के साथ साथ सेना के लिए भी काफी अहम है। एक बड़ा प्रशासनिक सेंटर होने के साथ होने के साथ यहां पर एक एयरस्ट्रिप यानी हवाई पट्टी भी बनाई गई है।