July WPI : जुलाई में थोक महंगाई लगातार चौथे महीने निगेटिव जोन में रही, जून के -4.12% से बढ़कर -1.36% पर आई

July WPI : जुलाई में देश की थोक महंगाई दर लगातार चौथे महीने निगेटिव जोन में रही है। सोमवार 14 अगस्त को आए आंकड़ों से पता चलता है कि खाने पीने की चीजों की थोक महंगाई जून के 1.24 फीसदी से बढ़कर जुलाई में 7.75 फीसदी पर रही है। इसी तरह प्राइमरी ऑर्टिकल्स की थोक महंगाई भी जून के -2.87 फीसदी से बढ़कर 7.57 फीसदी पर रही है। जुलाई में ईंधन और बिजली की महंगाई दर जून के -12.63 फीसदी से घटकर -12.79 फीसदी पर रही है।

अपडेटेड Aug 14, 2023 पर 1:05 PM
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जुलाई WPI: जुलाई में देश की थोक महंगाई दर लगातार चौथे महीने निगेटिव जोन में रही है। 14 अगस्त को आए आंकड़ों से पता चलता है कि खाने-पीने की चीजों की थोक महंगाई जो जून में 1.24 फीसदी पर रही थी। जुलाई में 7.75 फीसदी पर रही है

July WPI : जुलाई महीने में देश की WPI (थोक महंगाई) जून के -4.12 फीसदी से बढ़कर -1.36 फीसदी पर आ गई है। जुलाई में देश की थोक महंगाई दर लगातार चौथे महीने निगेटिव जोन में रही है। भारत की थोक महंगाई दर जून में घटकर -4.12 फीसदी पर आ गई थी। जुलाई में भी ये बढ़त के बावजूद निगेटिव जोन में ही रही है। सोमवार 14 अगस्त को आए आंकड़ों से पता चलता है कि खाने पीने की चीजों की थोक महंगाई जून के 1.24 फीसदी से बढ़कर जुलाई में 7.75 फीसदी पर रही है। इसी तरह प्राइमरी ऑर्टिकल्स की थोक महंगाई भी जून के -2.87 फीसदी से बढ़कर 7.57 फीसदी पर रही है।

जुलाई में ईंधन और बिजली की महंगाई दर जून के -12.63 फीसदी से घटकर -12.79 फीसदी पर रही है। वहीं, मैन्यूफैक्चर्ड प्रोडक्टस की थोक महंगाई -2.71 फीसदी से बढ़कर -2.51 पर रही है। वहीं, आलू की महंगाई दर जून के -21.27 फीसदी से घटकर -24.40 फीसदी पर रही है। वहीं, प्याज की थोक महंगाई दर जून के -4.31 फीसदी से बढ़कर 7.13 फीसदी पर रही है। इसी तरह अंडे, मांस और मछली की महंगाई जून के 2.74 फीसदी से घटकर 1.79 फीसदी पर रही है। जबकि सब्जियों की थोक महंगाई जून के -21.98 फीसदी से बढ़कर 62.12 फीसदी पर आ गई है।

रॉयटर्स की तरफ ले कराए गए एक सर्वे अर्थशास्त्रियों ने अनुमान लगाया था कि जुलाई की थोक महंगाई दर में 2.70 फीसदी की गिरावट देखने को मिलेगी। वाणिज्य मंत्रालय ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा है कि जुलाई, 2023 में थोक महंगाई की दर में गिरावट मुख्य रूप से क्रूड, बेस मेटल, रसायन और रासायनिक उत्पादों, कपड़ा और खाद्य उत्पादों की कीमतों में गिरावट के कारण आई है।


गौरतलब है कि सरकार ने खाने-पीने की चीजों की महंगाई को कम करने के लिए कई उपाय किए हैं । भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने कीमतों में हालिया बढ़ोतरी पर कहा कि मांग-आपूर्ति में असंतुलन और प्रतिकूल मौसम के कारण महंगाई बढ़ी है। ये अस्थायी समस्या है। ऐसे में, 10 अगस्त को आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने लगातार तीसरी बैठक में रेपो दर को 6.5 फीसदी पर ही बरकरार रखा है। हालांकि, आरबीआई ने 2023-24 के लिए अपने रिटेल महंगाई अनुमान को 0.30 फीसदी बढ़ाकर 5.4 फीसदी कर दिया है।

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