अगर आप एक बिजनेस ओनर हैं या आंत्रप्रेन्योरशिप में दिलचस्पी रखते हैं तो कुछ टर्म हैं, जिनकी जानकारी आपको होनी चाहिए। DIN और DSC ऐसे टर्म हैं जिनसे बिजनेस के दौरान आपको दो-चार होना पड़ेगा।

बिजनेस शुरू करने और उसके दौरान की प्रक्रियाओं और औपचारिकताओं के बारे में पहले से तैयार होना जरूरी है।

हम यहां आपको DIN और DSC के बारे में बता रहे हैं-

Digital Signature Certificate- DSC

Digital Signature Certificate यानी DSC ऑथराइजेशन का इलेक्ट्रॉनिक फॉर्मेट है। ये ऑनलाइन ट्रांजैक्शन और फाइलिंग में ये कंपनी किसी व्यक्ति के लिए उसका आईडी प्रूफ की तरह काम करता है। DSCs का इस्तेमाल मुख्य तौर पर MCA (ROC), Income Tax Department, Directorate General of Foreign Trade, Employee Provident Fund और E-Tenders करते हैं।

डिजिटल सिग्नेचर को तीन भागों में बांटा गया है- Class 1, Class 2 और Class 3. Class 2 का इस्तेमाल कंपनी का रजिस्टर कराने और इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करते हुए किया जाता है। Class 3 का इस्तेमाल ई-टेंडर्स में हिस्सा लेते हुए किया जाता है।

Director Identifaction Number- DIN

Director Identifaction Number यानी DIN एक यूनीक नंबर है जो किसी कंपनी के डायरेक्टर या होने वाले डायरेक्टर को दिया जाता है। कंपनी के रजिस्ट्रेशन के लिए इसकी जरूरत होती है। बता दें कि DIN और Designated Partner Identification का इस्तेमाल एक-दूसरे की जगह किया जा सकता है।

DPIN की जरूरत भारत में LLP के रजिस्ट्रेशन के लिए किया जाता है। DIN में कंपनी के डायरेक्टर की सभी निजी जानकारियां होती हैं। DIN को कोई भी भारतीय या विदेशी नागरिक पहचान पत्र और एड्रेस प्रूफ दिखाकर हासिल कर सकता है। बता दें कि DIN के लिए अप्लाई करने के लिए Digital Signature Certificate की जरूरत पड़ती है।