तमिलनाडु के सबसे पुराने शैव मठ मदुरै अधीनम के 292वें प्रमुख, अरुणगिरिनाथ ज्ञानसंबंता देसिका परमाचार्य स्वामीगल का पिछले सप्ताह उम्र संबंधी बीमारियों के कारण निधन हो गया। अरुणगिरिनाथ के निधन पर भगोड़े गुरु नित्यानंद (Fugitive Nithyananda) के कार्यालय ने एक विस्तृत फेसबुक बयान के माध्यम से शोक व्यक्त किया और उत्तराधिकारी के रूप में दावा भी पेश कर दिया।
नित्यानंद के बयान पर पलटवार करते हुए मठ ने कहा है कि हम शिव की पूजा करते हैं और वह शिव की तरह व्यवहार करते हैं। रेप और अपहरण के आरोपों के बाद स्वयंभू धर्मगुरु 2019 के आसपास भारत से भाग गए और बाद में अपने स्वयं के स्व-घोषित द्वीप राष्ट्र कैलासा की स्थापना करने की घोषणा भी कर दी।
नित्यानंद के कार्यालय ने बयान जारी कर कहा कि पूरे कैलासा ने श्री अरुणगिरिनाथ की मृत्यु पर शोक व्यक्त किया और संघीय भवन, धार्मिक प्रतिष्ठानों और विश्वविद्यालयों सहित सभी प्रतिष्ठानों को राष्ट्रीय ध्वज को आधा झुकाने का आदेश दिया।
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सोशल मीडिया के बयान में यह भी कहा गया है कि नित्यानंद ने दिवंगत 292वें प्रमुख के मुक्ति के लिए सभी अनुष्ठान किए। अप्रैल 2012 में श्री अरुणगिरिनाथ द्वारा नित्यानंद को मदुरै अधीनम का कनिष्ठ पोंटिफ नियुक्त किया गया था। हालांकि, उन्हें अनुशासनात्मक कार्रवाई के तहत दिसंबर 2012 में मुख्य पोंटिफ द्वारा पद से हटा दिया गया था।
मठ प्रमुख ने मदुरै के एक अस्पताल में शुक्रवार की रात अंतिम सांस ली। उन्हें सांस लेने में तकलीफ संबंधी बीमारी को लेकर आठ अगस्त को भर्ती कराया गया था। युवावस्था में पत्रकार रहे, अरुणागिरिनाथ ज्ञानसंबंता देसिका परमाचार्य को तमिल के प्रति उनके समर्पण एवं शैव धर्म के प्रति भक्ति के लिए नेताओं समेत कई का प्रेम एवं सम्मान प्राप्त हुआ।
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