मेरठ में तीन मंजिला घर गिरा, परिवार के 10 लोगों की मौत, राहत और बचाव कार्य जारी

Meerut Building Collapse: मेरठ में एक बड़ा हादसा हो गया है। जाकिर नगर में तीन मंजिला मकान ढहने से 10 लोगों की मौत हो गई है। कई लोगों के फंसे होने की आशंका जताई जा रही है। इस हादसे की बड़ी वजह नींव कमजोर होना बताया जा रहा है। प्रशसान की ओर से राहत और बचाव कार्य जारी है

अपडेटेड Sep 15, 2024 पर 2:12 PM
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Meerut Building Collapse: मेरठ के जाकिर कॉलोनी क्षेत्र में गली नंबर 6 के पास एक तीन मंजिला मकान भरभरा कर गिर गया।

उत्तर प्रदेश के मेरठ में बड़ा हादसा हो गया है। तीन मंजिला घर ताश के पत्तों की तरह ढह गया। इसमें 10 लोगों की मौत हो गई है। मलबे में अभी कई लोगों के दबे होने की आशंका जताई जा रही है। प्रशासन की ओर से राहत और बचाव कार्य जारी है। पुलिस ने एहतियात के तौर पर आसापस के मकान खाली करा लिए हैं। डीएम दीपक मीणा ने बताया कि महिला और बच्चे समेत 15 लोग मलबे के ढेर से निकाला गया है। इनमें 10 की मौत हो चुकी है। 5 लोग घायल हैं। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। मलबे में दबने से कई पशुओं की भी मौत हो गई है।

फायर विभाग समेत अन्य विभाग राहत और बचाव कार्य में जुटे हुए हैं। हल्की-हल्की बारिश होने की वजह से बचाव और राहत कार्य में समस्या आ रही है। इसके अलावा छोटी गलियां होने की वजह से बड़ी मशीन बचाव और राहत कार्य ठीक से नहीं कर पा रही है। यहां स्थानीय लोगों का जमावड़ा लगा हुआ है।

3 मंजिला मकान कैसे गिरा?


मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 300 वर्ग गज जमीन पर यह मकान बना था। इसमें एकमात्र पिलर था और वो पिलर भी गेट के पास लगा था। वहीं पूरा सिर्फ 4 इंच की दीवार पर खड़ा था। बड़ी बात कि इतनी कमजोर दीवार होने के बावजूद इसके ऊपर की मंजिल में एक फ्लोर और बनाने की तैयारी चल रही थी। इधर मेरठ में लगातार बारिश हो रही थी। इसकी वजह से मकान की नींव में पानी भर गया। इससे कमजोर हो चुकी दीवारें भरभराकर गिर पड़ी। यह घटना कल (14 सितंबर 2024) शाम की बताई जा रही है। राज्य के सीएम योगी आदित्यनाथ ने जिला प्रशासन के अधिकारियों को मौके पर पहुंचकर राहत कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए थे।

Meerutmalba

पुलिस के मुताबिक इस मकान का ग्राउंड फ्लोर करीब 50 साल पहले बना था। हालांकि बाद में इस फ्लोर पर मकान मालिक अलाउद्दीन ने डेयरी फार्म खोल लिया और अपने रहने के लिए उपर एक फ्लोर बना लिया। अलाउद्दीन के निधन के बाद उसके चार बेटे साजिद, नदीम, नईम, शाकिर डेयरी चलाने लगे। जैसे जैसे ऊपर के फ्लोर बनते गए, दीवार और नींव कमजोर होती चली गई। ये लोग डेयरी से निकलने वाला गोबर और अन्य कचरा अपनी दीवार के किनारे जमा कर रहे थे। इससे दीवारों में सीलन आ गई।

बाल-बाल बचे 40 लोग

पुलिस के मुताबिक यह घटना शनिवार को शाम 4.30 बजे हुई है। वहीं शाम को 5 बजे कई लोग दूध लेने आते हैं। अगर उस समय यह हादसा होता तो कम से कम 40 लोग इस मलबे में दब जाते।

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