'मिजोरम एयरपोर्ट पर एयरफोर्स का कब्जा नहीं होने देंगे', सरकार के फैसले का MNF ने किया विरोध, गरमाई राजनीति

मिजोरम के इस एयरपोर्चट को लेकर राजनीति गरमा गई है। विपक्ष के नेता लालछंदामा राल्टे ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि वो एयरपोर्ट को IAF के हाथों में जाने से रोकेगा। यह एयरपोर्ट राज्य की राजधानी आइजॉल में स्थित है। यह मामला राज्य में राजनीतिक विवाद का कारण बन गया है

अपडेटेड Feb 10, 2025 पर 1:33 PM
वायुसेना के हाथों में लेंगपुई एयरपोर्ट देने का हो रहा विरोध

Mizoram  Lengpui Airport : भारत के सबसे खूबसूरत एयरपोर्ट में से एक नॉर्थ ईस्ट के लेंगपुई हवाई अड्डे को लेकर विवाद बढ़ गया है। मिजोरम के इस एयरपोर्चट को लेकर राजनीति गरमा गई है। राज्य में मुख्य विपक्षी दल मिजो नेशनल फ्रंट (MNF) ने भारतीय वायुसेना (IAF) को लेंगपुई एयरपोर्ट सौंपने का विरोध किया है। इस एयरपोर्ट को वायुसेना को देने का फैसला ज़ोरम पीपुल्स मूवमेंट (जेडपीएम) सरकार ने लिया है। शनिवार को एनएनएफ विधायकों की एक टीम ने एयरपोर्ट का दौरा किया।

एयरपोर्ट को वायुसेना को दिए जाने का विरोध

विपक्ष के नेता लालछंदामा राल्टे ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि वो एयरपोर्ट को IAF के हाथों में जाने से रोकेंगे। यह एयरपोर्ट राज्य की राजधानी आइजॉल में स्थित है। यह मामला राज्य में राजनीतिक विवाद का कारण बन गया है। टाइम्स ऑफ इंडिया से बात करते हुए ने राल्ते ने कहा, "जब जेडपीएम ने सत्ता संभाली, तो मुख्यमंत्री लालदुहोमा की पहली पहल में से एक हमारे हवाई अड्डे को भारतीय वायुसेना को सौंपने का प्रस्ताव था, जो शर्मनाक है।"


राल्ते ने कहा कि कांग्रेस और एमएनएफ सरकारों ने आर्थिक मुश्किलों के बावजूद लेंगपुई हवाई अड्डे को बनाकर उसका रखरखाव किया। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्रियों लाल थनहवला (कांग्रेस) और ज़ोरमथांगा (एमएनएफ) का जिक्र करते हुए कहा कि, उन्होंने वित्तीय चुनौतियों के बावजूद हवाई अड्डे का स्वामित्व बरकरार रखा। राल्ते ने इसे ZPM सरकार की आर्थिक नाकामी बताया।

क्यों हो रहा विरोध

राल्ते ने चेतावनी दी कि अगर लेंगपुई एयरपोर्ट भारतीय वायुसेना को सौंपा गया तो इसके गंभीर असर होंगे। उन्होंने बताया कि देश में वायुसेना के अधीन 27 एयरपोर्ट हैं, जहां सैन्य अभियानों को प्राथमिकता दी जाती है, जैसे - पुणे, तेजपुर, बागडोगरा और श्रीनगर। मिजोरम की चीन से नजदीकी को देखते हुए, यह एयरपोर्ट जेट फाइटर बेस में बदला जा सकता है। राल्ते ने कहा कि, लड़ाकू विमानों की लगातार उड़ानें और हवाई क्षेत्र पर प्रतिबंध मिजोरम में हवाई यात्रा को प्रभावित कर सकते हैं, जिससे राज्य की आर्थिक प्रगति धीमी पड़ सकती है। उन्होंने, सैन्य विमानों से होने वाले शोर पर भी चिंता जताई, जिससे आइजोल और आसपास के इलाकों में परेशानी हो सकती है। इसके अलावा, उन्होंने चेतावनी दी कि किसी संघर्ष की स्थिति में लेंगपुई और आसपास के इलाके खतरे में पड़ सकते हैं।

एमएनएफ नेता ने बताया कि उनकी सरकार पहले ही लेंगपुई हवाई अड्डे के विस्तार की योजना बना चुकी थी। उन्होंने कहा कि दूसरा रनवे बनाने का प्रस्ताव केंद्र को भेजा गया था। उनका सपना लेंगपुई को अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा बनाना था, लेकिन अगर भारतीय वायुसेना का नियंत्रण हुआ, तो यह संभव नहीं होगा। कई नागरिक संगठनों ने भी इस योजना का विरोध किया है। एनजीओ समन्वय समिति (NGOCC) के प्रतिनिधियों ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री लालदुहोमा से मुलाकात कर अपनी चिंता जताई। उन्होंने सीएम से अनुरोध किया कि हवाई अड्डे को वायुसेना को सौंपने के बजाय इसे बनाए रखने के दूसरे रास्ते खोजे जाएं।

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