दिल्ली के लोगों के लिए अच्छी खबर है। अगले दो दिन में मानसून की पहली बारिश (First rain of monsoon) हो सकती है। मौसम विभाग (IMD) ने यह जानकारी शनिवार को दी। उसने बताया कि सुस्त शुरुआत के बाद मानसून ने अच्छी प्रगति दिखाई है। यह महाराष्ट्र के कई हिस्सों, पूरे कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, छत्तीसगढ़, ओडिशा, उत्तरपूर्वी भारत, पश्चिम बंगाल, झारखंड, बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों और हरियाणा के कुछ हिस्सों में पहुंच गया है। आम तौर पर दिल्ली में मानसून की बारिश 27 जून तक शुरू हो जाती है।
मानसून के आगे बढ़ने के लिए स्थितियां अनुकूल
IMD ने कहा है, "मानसून के आगे बढ़ने के लिए स्थितियां सामान्य हैं। यह मुंबई सहित महाराष्ट्र" मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, जम्मू एंड कश्मीर, लद्दाख, हरियाणा के ज्यादातर हिस्सों, चंडीगढ़, दिल्ली, गुजरात के कुछ हिस्सों, पूर्वी राजस्थान और पंजाब में अगले दो दिन में पहुंच जाएगा। पिछले साल मानसून ने 30 जून को देश की राजधानी में दस्तक दी थी। 2021 में यह 13 जुलाई को पहुंचा था। 2020 में 25 जून को और 2019 में जुलाई को पहुंचा था। इस साल मानसून केरल 8 जून को पहुंचा था। आम तौर पर यह केरल में 1 जून तक दस्तक दे देता है। इस तरह मानसून के केरल पहुंचने में करीब एक हफ्ते की देर हुई थी। पिछले साल यह केरल 29 मई को पहुंचा था। 2021 में 3 जून को पहुंचा था। 2020 में 1 जून को पहुंचा था।
उत्तरपूर्व भारत में मानसून के पहुंचने में देर नहीं
रिसर्च से पता चला है कि केरल में मानसून के देर से पहुंचने का मतलब यह नहीं है कि इसके उत्तरपूर्व भारत पहुंचने में भी देर होगी। इसका अलावा देश में मानसून सीजन में होने वाली कुल बारिश पर भी इसका असर पड़ने की उम्मीद नहीं है। इससे पहले मौसम विभाग ने कहा था कि अल-नीनी की स्थितियों के बावजूद भारत में मानसून की बारिश सामान्य रहने की उम्मीद है। उत्तरपश्चिम भारत में सामान्य और सामान्य से कम बारिश हो सकती है। पूर्व और उत्तरपूर्व, मध्य और दक्षिण प्रायद्वीप में मानसून की सामान्य बारिश हो सकती है।
ऐसे तय होता है मानसून की बारिश कम या ज्यादा
IMD के मुताबिक, अगर मानसून की बारिश 50 साल के 87 सेंटीमीटर के औसत के मुकाबले 96 और 104 फीसदी के बीच रहती है तो उसे सामान्य माना जाता है। अगर लंबी अवधि के औसत के मुकाबले बारिश 90 फीसदी से कम रहती है तो उसे सामान्य से थोड़ा कम कहा जाता है। अगर बारिश लंबी अवधि के औसत के 90 से 95 फीसदी रहती है तो उसे सामान्य से कम कहा जाता है। इसके 105 से 110 फीसदी के बीच रहने पर सामान्य से ऊपर और 100 फीसदी से ज्यादा रहने पर बहुत ज्यादा कहा जाता है।