पिछले कई सालों से कोरोना वायरस का कहर पूरी दुनिया झेल रही है। कोरोना के बाद ओमीक्रोन और इसके सब वेरिएंट से पूरी दुनिया में खौफ समाया हुआ है। आखिर ओमीक्रोन से पूरी दुनिया को कितना खतरा है, इस पर अमेरिकी वैज्ञानिक ने चेतावनी जारी की है। यूएस सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (US Centers for Disease Control and Prevention) के पूर्व डायरेक्टर डॉ टॉम फ्रीडेन (Dr Tom Frieden) ने चेतावनी दी है कि कोरोना वायरस का सबसे घातक ओमीक्रोन वेरिएंट (Omicron variant) अभी भी खतरनाक साबित हो सकता है।
दरअसल, जैसे-जैसे गतिविधियां पटरी पर वापस लौटती हैं, तभी कोई नया वेरिएंट लोगों को बड़ी टेंशन देना शुरू कर देता है। मौजूदा समय में ओमीक्रोन के कई वेरिएंट सामने आ चुके हैं। कुछ ऐसे-ऐसे सब वेरिएंट भी सामने आए हैं, जो कि बहुत तेजी से फैलते हैं। कुल मिलाकर कोरोना वायरस के ओमीक्रोन वेरिएंट से अभी तक दुनिया भर के लिए खतरा टला नहीं है।
कोरोना संक्रमण की रफ्तार जब सुस्त हो जाती है, तो लोग तुरंत मास्क पहनना बंद कर देते हैं। CDC के पूर्व डायरेक्टर ने एक ब्लॉग पोस्ट में कहा कि अगर आप इम्यूनोसप्रेस्ड हैं यानी सिर्फ बीमार होने के बारे में चिंतित हैं और आपके आसपास के लोग मास्क नहीं लगा रहे हैं। ऐसे हालात में खुद N95 मास्क जरूर लगाएं। उन्होंने आगे कहा कि अमेरिका में लोगों ने मास्क पहनना कम कर दिया है, जिससे कोरोना संक्रमित मरीजों में तेजी से इजाफा हो रहा है। बता दें कि दक्षिण अफ्रीका के वैज्ञानिकों ने देश के सबसे अधिक आबादी वाले प्रांत गौटेंग में COVID-19 के नए वेरिएंट ओमीक्रोन (Omicron Variant) की पहचान की थी और इसके संभावित खतरों के बारे में WHO को आगाह किया था।
बिना वैक्सीनेशन के सबसे बड़ा खतरा
इस बीच, जॉन्स हॉपकिन्स की वैज्ञानिक अमिता गुप्ता ने कहा है कि जब तक पूरी दुनिया में सभी लोग वैक्सीन नहीं लगवा लेते हैं। तब कोरोना वायरस का खतरा बना रहेगा। गुप्ता ने कहा कि पूरी दुनिया में वैक्सीन असमानता भारत के भीतर और विश्व स्तर पर एक एक बड़ा मुद्दा बना हुआ है। एक इंटरव्यू में अमित गुप्ता ने कहा कि अफ्रीका महाद्वीप में मौजूदा समय में 20 फीसदी से भी कम आबादी को वैक्सीन लगाई गई है। अफ्रीका में अभी भी कई ऐसे देश हैं, जहां सिर्फ 2 फीसदी आबादी का ही वैक्सीनेशन हुआ है।