Onion Price: फेस्टिव सीजन में प्याज की बढ़ती कीमतें आम जनता को परेशान कर सकती है। अभी आम जनता टमाटर की महंगी कीमतों को भूल नहीं पाई है कि अब प्याज की कीमतें भी बढ़नी शुरू हो गई है।देश में प्याज रसोई का प्रमुख खाद्य पदार्थ है। प्याज देश में सरकार गिराए जाने के लिए भी जानी जाती है। प्याज की बढ़ती कीमतों पर अंकुश लगाने के लिए केंद्र सरकार के फिलहाल हस्तक्षेप करने की संभावना कम है।
क्या सरकार उठाएगी कोई कदम?
सूत्रों ने कहा कि सरकार कमोडिटी की कीमतों पर नजर रख रही है और उनके अनुमान के आधार पर कीमतें 50 रुपये प्रति किलोग्राम से अधिक होने की उम्मीद नहीं है। अधिकारियों का मानना है कि प्याज की कीमतें टमाटर की तरह नहीं बढ़ने वाली है
प्याज की कीमतों में आ रही है तेजी
एक सरकारी अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर मनीकंट्रोल को बताया कि हम कीमतों में बढ़ोतरी पर नजर रख रहे हैं और देख रहे हैं कि खरीफ की आवक में देरी और रबी की बुआई पर चिंताओं के कारण कीमतें बढ़नी शुरू हो गई हैं, लेकिन अनुमान के अनुसार कीमतें 46 रुपये से ऊपर नहीं बढ़ेंगी।
प्याज की रिटेल दुकानों पर कीमतें पिछले हफ्ते 32 रुपये के आसपास रहने के बाद 20 अक्टूबर को औसतन 36 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई। महाराष्ट्र और कर्नाटक में देर से और अनियमित बारिश के कारण खरीफ लाल प्याज की फसल के आने में देरी के कारण इसकी कमी हो गई है।
सरकार ने लगाया निर्यात शुल्क
अगस्त के दूसरे सप्ताह में एशिया के सबसे बड़े महाराष्ट्र के पिंपलगांव और लासलगांव थोक बाजारों में प्याज की कीमतें महंगी होना शुरू हो गईं। 5 अगस्त को 1,200 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़कर 7 अगस्त को कीमत 1,900 रुपये प्रति क्विंटल और 9 अगस्त को कीमत 2,500 रुपये प्रति क्विंटल हो गई। सरकार ने कीमतों को बढ़ने से रोकने के लिए 20 अगस्त को कमोडिटी पर पर 40 प्रतिशत निर्यात शुल्क लगाया।
टमाटर की कीमत पहुंच गईं थी 250 रुपये किलो तक
अधिकारी ने कहा किहमें नहीं लगता कि कीमतें टमाटर की तरह बढ़ेंगी। उन्हें 50 रुपये से ऊपर नहीं बढ़ना चाहिए। भले ही वे साल के अंत तक ऊंचाई पर बनी रहे लेकिन सरकार हस्तक्षेप नहीं करेगी। बेमौसम बारिश के कारण प्रोडक्शन और सप्लाई प्रभावित होने के बाद जुलाई में खुदरा बाजारों में टमाटर की कीमतें 250 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गईं थी।