Congress Election: कांग्रेस (Congress) अध्यक्ष पद का चुनाव नजदीक आने पर ऐसे संकेत अब साफ दिखने लगे हैं कि राहुल गांधी (Rahul Gandhi) पार्टी अध्यक्ष के चुनाव में हिस्सा नहीं लेंगे। न्यूज एजेंसी ANI ने कांग्रेस सूत्रों के हवाले से बताया कि सांसद राहुल गांधी के पार्टी अध्यक्ष चुनाव लड़ने की संभावना नहीं है। इसके साथ ही अब देश की सबसे पुरानी पार्टी की सर्वोच्च कुर्सी के लिए चुनावी मुकाबला होने के आसार बढ़ गए हैं।
पार्टी सूत्रों ने बताया कि कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के पार्टी अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ने की संभावना नहीं है, क्योंकि वह भारत जोड़ो यात्रा (Bharat Jodo Yatra) को बीच में छोड़ कर दिल्ली नहीं लौटेंगे। अभी में यात्रा केरल में है और 29 सितंबर को कर्नाटक में पहुंचेगी। नामांकन की आखिरी तारीख 30 सितंबर है।
हालांकि, प्रदेश कांग्रेस कमेटियों की ओर से राहुल गांधी के समर्थन में प्रस्ताव पारित करने का सिलसिला जारी है और इसी कड़ी में मंगलवार को हरियाणा और झारखंड की कांग्रेस इकाइयों ने प्रस्ताव पारित कर कहा कि राहुल को एक बार फिर से पार्टी की कमान संभालनी चाहिए।
इससे पहले, सात प्रदेश कांग्रेस कमेटियों समेत पार्टी की आठ स्थानीय इकाइयों ने राहुल गांधी के समर्थन में प्रस्ताव पारित किए थे।
उधर, कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि कई PCC की ओर से पारित किए गए प्रस्ताव मानने के लिए बाध्य नहीं हैं। उनका यह भी कहना है कि किसी से प्रस्ताव पारित करने के लिए नहीं कहा गया है।
कांग्रेस की इन इकाइयों ने ये प्रस्ताव उस वक्त पारित किए हैं, जब नौ सितंबर को कन्याकुमारी में राहुल गांधी ने यह संकेत दिया था कि वह पार्टी का अध्यक्ष नहीं बनने के अपने पुराने फैसले पर कायम हैं।
राहुल गांधी के अपने रुख पर कायम रहने के कारण अब 22 साल बाद कांग्रेस के अध्यक्ष पद के लिए चुनावी मुकाबले के प्रबल आसार हैं।
पार्टी के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने सोमवार को सोनिया गांधी से मुलाकात कर चुनाव लड़ने की अपनी इच्छा से उन्हें अवगत कराया था, तो दूसरी तरफ राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के भी चुनावी रण में उतरने के संकेत मिल रहे हैं। कुछ और लोगों के भी चुनाव लड़ने का ऐलान करने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
22 साल बाद होगा ऐसा मुकाबला
कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए अगर चुनाव होता है, तो यह 22 साल बाद इस तरह का मुकाबला होगा। साल 2000 में सोनिया गांधी और जितेंद्र प्रसाद के बीच मुकाबला हुआ था, जिसमें प्रसाद को करारी शिकस्त झेलनी पड़ी थी।
इससे पहले, 1997 में सीताराम केसरी, शरद पवार और राजेश पायलट के बीच अध्यक्ष पद को लेकर मुकाबला हुआ था, जिसमें केसरी जीते थे।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता थरूर के सोनिया गांधी से मिलने के बाद यह संभावना बढ़ गई कि वह चुनाव लड़ेंगे। सूत्रों का कहना है कि उन्होंने सोमवार को पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात कर उन्हें अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ने की अपनी इच्छा से अवगत कराया, जिस पर सोनिया ने कहा कि इस चुनाव में कई उम्मीदवारों का खड़ा होना पार्टी के लिए बेहतर है और इसमें उनकी भूमिका न्यूट्रल रहेगी।
सूत्रों ने यह भी बताया कि इस मुलाकात के दौरान सोनिया गांधी ने इस धारणा को भी खारिज किया कि इस चुनाव में पार्टी की ओर से कोई ‘आधिकारिक उम्मीदवार’ होगा।