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अपनी काबलियत और विनम्रता के कारण शीर्ष पर पहुंचे थे बेमिसाल कांग्रेसी नेता डी.संजीवैया

सन 1966 में जब इंदिरा गांधी प्रधान मंत्री बनीं तो संजीवैया को उद्योग मंत्रालय मिला। 10 फरवरी, 1970 को संजीवैया को श्रम, नियोजन और पुनर्वास मंत्रालय का कार्य भार सौंपा गया। कुल मिलाकर कुछ ही साल में संजीवैया को बारी-बारी से इतनी बड़ी-बड़ी जिम्मेदारियां सौंपी गयीं जो सामान्यतः आम नेताओं को नसीब नहीं होता है

Surendra Kishoreअपडेटेड Aug 08, 2023 पर 9:03 AM
अपनी काबलियत और विनम्रता के कारण शीर्ष पर पहुंचे थे बेमिसाल कांग्रेसी नेता डी.संजीवैया
संकोची स्वभाव के संजीवैया सुशिक्षित और बौद्धिक थे और राजनीतिक रणनीति बनाने में उन्हें कुशलता हासिल थी

अनुसूचित जाति के बेमिसाल नेता डी. संजीवैया ने कम ही उम्र में बेशुमार उपलब्धियां हासिल की थी। सन 1921 में जन्मे संजीवैया का सन 1972 में निधन हो गया। किंतु इस बीच वे मुख्य मंत्री से लेकर कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष तक बने। किसी राज्य के मुख्य मंत्री बनने वाले अनुसूचित जाति के प्रथम नेता डी.संजीवैया का जीवन कई मामलों में बेमिसाल रहा। वे जवाहरलाल नेहरू, लाल बहादुर शास्त्री तथा इंदिरा गांधी के मंत्रिमंडलों में बारी-बारी से मंत्री रहे। नेहरू-गांधी परिवार उन्हें पसंद करता था।

संकोची स्वभाव के संजीवैया सुशिक्षित और बौद्धिक थे और राजनीतिक रणनीति बनाने में उन्हें कुशलता हासिल थी। संजीवैया के जीवन पर नजर डालने पर लगता है कि यह महत्वपूर्ण नहीं है कि आप कितने दिनों तक जीवित रहते हैं। बल्कि महत्वपूर्ण यह है कि आप कितने कम समय में भी कितने बड़े -बड़े काम कर लेते हैं। संजीवैया स्वभाव से संकोची और अल्प भाषी थे।उनकी तरक्की में ये गुण उनके सहायक बने।

दामोदरन संजीवैया का जन्म 14 फरवरी 1921 को अविभाजित मद्रास राज्य के कुरनूल जिले के पेड्डापडू गांव के एक गरीब अनुसूचित जाति परिवार में हुआ था। उनकी स्कूली शिक्षा नगर पालिका के स्कूल में हुई थी। एक छात्र के रूप में उनकी प्रतिभा का पता उन्हीं दिनों लोगों को चल गया था। बाद में उन्होंने मद्रास लॉ कॉलेज से कानून की डिग्री ली।

संजीवैया साहब छात्र जीवन में ही स्वतंत्रता सेनानी बन गये। सन 1950 में उन्हें प्रोविजनल पार्लियामेंट का सदस्य बना दिया गया, जब वे मद्रास हाईकोर्ट में वकालत करने लगे थे। किसी तरह के अहंकार से दूर रहने वाले डी.संजीवैया को जवाहरलाल नेहरू खास तौर पर पसंद करते थे। वे सन 1960 में आंध्र प्रदेश के मुख्य मंत्री बने। सन 1962 में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने। उनकी शिक्षिका पत्नी कृष्णा वेणी भी सामाजिक कार्यकर्ता थीं।

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