Delhi Excise Policy Scam: कोर्ट ने मनीष सिसोदिया की CBI रिमांड 6 मार्च तक बढ़ाई, जमानत अर्जी पर 10 मार्च को होगी सुनवाई

Delhi Excise Policy Scam: दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को सीबीआई ने रविवार को गिरफ्तार किया था, उनकी हिरासत आज खत्म हो रही थी। सिसोदिया को कथित आबकारी घोटाले से संबंधित भ्रष्टाचार के एक मामले में गिरफ्तार किया गया था। आबकारी और शिक्षा सहित दिल्ली सरकार में 18 विभागों को संभालने वाले सिसोदिया ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट द्वारा उनकी याचिका खारिज करने के बाद कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया

अपडेटेड Mar 04, 2023 पर 3:13 PM
Manish Sisodia: आबकारी नीति घोटाला मामले में शनिवार को सीबीआई की टीम मनीष सिसोदिया को राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश की

आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता और दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया (Manish Sisodia) को कोर्ट से बड़ा झटका मिला है। सिसोदिया की जमानत अर्जी पर अब 10 मार्च को सुनवाई होगी। फिलहाल, उन्हें जेल में ही होली मनानी पड़ेगी। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने कथित दिल्ली आबकारी नीति घोटाला मामले में सिसोदिया की जमानत पर सुनवाई 10 मार्च को सूचीबद्ध की है। CBI को तब तक अपना जवाब पेश करना है। राउज एवेन्यू कोर्ट ने सिसोदिया की सीबीआई रिमांड 6 मार्च तक बढ़ा दी है।

पांच दिन की सीबीआई हिरासत खत्म होने पर सिसोदिया को शनिवार दोपहर 2 बजे दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट (Rouse Avenue Court) में पेश किया गया। सिसोदिया को सीबीआई ने रविवार को गिरफ्तार किया था, उनकी हिरासत आज खत्म हो रही थी।

सिसोदिया को कथित आबकारी घोटाले से संबंधित भ्रष्टाचार के एक मामले में गिरफ्तार किया गया था। आबकारी और शिक्षा सहित दिल्ली सरकार में 18 विभागों को संभालने वाले सिसोदिया ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट द्वारा उनकी याचिका खारिज करने के बाद कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया।


सीबीआई ने अब रद्द की जा चुकी साल 2021-22 की आबकारी नीति बनाने एवं उसे लागू करने में कथित भ्रष्टाचार के सिलसिले में रविवार शाम को सिसोदिया को गिरफ्तार किया था। केंद्रीय जांच एजेंसी के अनुसार, गिरफ्तार करने से पहले उनसे आठ घंटे तक पूछताछ की गई थी, लेकिन उनके जवाब कथित रूप से संतोषजनक नहीं पाए गए थे।

अदालत ने 27 फरवरी को सिसोदिया को सीबीआई हिरासत में भेज दिया था ताकि जांच एजेंसी उपयुक्त एवं निष्पक्ष जांच के लिए उनके सामने रखे जाने वाले सवालों का वास्तविक एवं वैध जवाब प्राप्त कर सके। जज ने कहा था कि आरोपी पहले दो बार जांच में शामिल हुए, लेकिन यह देखा गया कि उनसे जो सवाल किए गए, उन्होंने उसके संतोषजनक जवाब नहीं दिए।

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अदालत ने कहा था कि अबतक की जांच के दौरान जो अभियोजन योग्य साक्ष्य कथित रूप से सामने आए हैं, उनके बारे में आरोपी वैध ढंग से सफाई देने में नाकाम रहे। जज ने कहा कि यह सच है कि ऐसी आशा नहीं की जा सकती है कि वह कुछ ऐसा बयान देंगे जिससे वह फंस जाएं। लेकिन न्याय एवं निष्पक्ष जांच के हित में यह जरूरी है कि उनसे जांच अधिकारी जो सवाल कर रहे हैं, उनका वह कुछ वैध जवाब दें।

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