Delhi Services Bill: लोकसभा में मंगलवार को विवादास्पद 'राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली क्षेत्र सरकार संशोधन विधेयक 2023' पेश कर दिया गया। केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय ने विधेयक को संसद में पेश किया। यह बिल पारित होने के बाद राष्ट्रीय राजधानी में सेवाओं के नियंत्रण को लेकर लाए गए अध्यादेश का स्थान लेगा। यह विधेयक कानून बनने के बाद उपराज्यपाल (LG) को यह अधिकार प्रदान करेगा कि दिल्ली सरकार के अधिकारियों के ट्रांसफर और पोस्टिंग में अंतिम निर्णय उनका ही होगा। कैबिनेट ने 25 जुलाई को इस विधेयक को मंजूरी दी थी। विधेयक को लेकर दिल्ली की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार और केंद्र के बीच तनातनी है।
आम आदमी पार्टी को दिल्ली सर्विस बिल को लेकर एक बड़ा झटका लगा है। ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के नेतृत्व वाले बीजू जनता दल (BJD) ने केंद्र को समर्थन देने का आश्वासन दिया है। BJD के समर्थन के बाद अब यह विधेयक लोकसभा में आसानी से पास हो जाएगा। सूत्रों ने कहा कि बीजद BJP के नेतृत्व वाले केंद्र के खिलाफ विपक्षी गुट 'इंडिया (I.N.D.I.A.)' द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव का भी विरोध करेगा।
ओडिशा की सत्तारूढ़ पार्टी के राज्यसभा में 9 सांसद हैं। उसके इस ऐलान से सरकार को राज्यसभा में भी बहुमत का आंकड़ा पार करने में मदद मिलेगी, जहां BJP के नेतृत्व वाले NDA के पास अपने दम पर पूर्ण बहुमत नहीं है। जगन रेड्डी की YSR कांग्रेस पार्टी पहले ही इस महत्वपूर्ण विधेयक पर सरकार को अपना समर्थन देने की घोषणा कर चुकी है। दोनों पार्टियों के इस फैसले से सरकार ने राहत की सांस ली है।
लोकसभा में गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने गृह मंत्री अमित शाह की ओर से विधेयक पेश किया। विधेयक पेश किए जाने का कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी, शशि थरूर एवं गौरव गोगोई, RSP के एनके प्रेमचंद्रन, तृणमूल कांग्रेस के सौगत राय और AIMIM प्रमुख असदुद्दीन औवैसी सहित अन्य विपक्षी नेताओं ने विरोध किया।
विधेयक पर लोकसभा में गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि संविधान ने सदन को संपूर्ण अधिकार दिया है कि वह दिल्ली राज्य के लिए कोई भी कानून ला सकता है। उन्होंने कहा कि विधेयक के खिलाफ की जा रही टिप्पणियां राजनीतिक हैं और इनका कोई आधार नहीं है। इसके बाद सदन ने ध्वनिमत से विधेयक पेश किए जाने की मंजूरी दे दी।
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने हाल ही में 'राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली क्षेत्र सरकार (संशोधन) विधेयक' को स्वीकृति दी थी। यह 19 मई को केंद्र द्वारा लाये गये अध्यादेश की जगह लेने के लिए पेश लाया गया है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की अगुवाई वाली AAP ने अध्यादेश का कड़ा विरोध किया है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल भी इस अध्यादेश के खिलाफ हैं।
केंद्र ने लाई थी अध्यादेश
केंद्र सरकार 19 मई को अध्यादेश लाई थी। इससे एक सप्ताह पहले सुप्रीम कोर्ट ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार को सेवा से जुड़े मामलों का नियंत्रण प्रदान कर दिया था। हालांकि उसे पुलिस, सार्वजनिक व्यवस्था और भूमि से जुड़े विषय नहीं दिए गए।
शीर्ष अदालत के 11 मई के फैसले से पहले दिल्ली सरकार के सभी अधिकारियों के ट्रांसफर और पोस्टिंग उपराज्यपाल के कार्यकारी नियंत्रण में थे। इस अध्यादेश में कहा गया है कि राष्ट्रीय राजधानी लोक सेवा प्रधिकरण नाम का एक अथॉरिटी होगा, जो उसे प्रदान की गई शक्तियों का उपयोग करेगा और उसे सौंपी गई जिम्मेदारियों का निर्वहन करेगा।