Haryana Election: हरियाणा में जाट किसकी खड़ी करेंगे खाट? दलित को भी नहीं कर सकते नजरअंदाज, समझें पूरा जातीय समीकरण
Haryana Assembly Election 2024: हरियाणा विधानसभा चुनाव को समझने से पहले हमें राज्य के जातीय समीकरण को भी जानना होगा। प्रदेश में विधानसभा की 90 सीटें हैं और लोकसभा की 10 सीट। आगे बढ़ने से पहले एक नजर हाल ही में हुए लोकसभा चुनाव के नतीजों पर भी डाल लीजिए
Haryana Election: हरियाणा में जाट किसकी खड़ी करेंगे खाट? दलित को भी नहीं कर सकते नजरअंदाज (FILE PHOTO)
हरियाणा में विधानसभा चुनाव का ऐलान हो गया है। इस बार जाट लैंड में एक ही चरण में चुनाव होगा, जिसके 1 अक्टूबर को वोट डाले जाएंगे और 4 अक्टूबर को नतीजों का ऐलान हो जाएगा। साफ है कि चुनाव में अब 50 से भी कम दिनों का ही समय बचा है। देश में चुनाव चाहे संसद का हो या विधानसभा का, जातीय समीकरण को साधे बिना चुनाव लड़ना और जीतना करीब-करीब नामुमकिन ही है। हरियाणा को तो जाट लैंड कहा ही इसलिए जाता है, क्योंकि यहां जाटों का दबदबा खूब है।
हरियाणा विधानसभा चुनाव को समझने से पहले हमें राज्य के जातीय समीकरण को भी जानना होगा। प्रदेश में विधानसभा की 90 सीटें हैं और लोकसभा की 10 सीट। आगे बढ़ने से पहले एक नजर हाल ही में हुए लोकसभा चुनाव के नतीजों पर भी डाल लीजिए।
लोकसभा चुनाव में बराबर रहीं BJP-कांग्रेस
राज्य की 10 लोकसभा सीटों में से इस बार पांच पर कांग्रेस और पांच पर बीजेपी की जीत हुई है। बीजेपी के खाते में 46.3% वोट गया, तो कांग्रेस को 43.8 फीसदी मिला है। बड़ी बात ये है कि ये बीजेपी के लिए बहुत बड़ा झटका है, क्योंकि इससे पिछले यानी 2019 लोकसभा चुनाव में 10 की 10 सीटों पर बीजेपी ने बाजी मार ली थी।
इससे साफ है कि हरियाणा का चुनावी दंगल बहुत जबरदस्त होने वाला है और मुकबला कांटे का होगा। राह अगर बीजेपी के लिए मुश्किल है, तो कांग्रेस के लिए भी उतनी आसान नहीं है, क्योंकि लोकसभा चुनाव का रिजल्ट 50-50 रहा है।
हरियाणा में जाट के ठाट
अब आते हैं जातीय समीकरण पर, तो जैसा कि हम पहले ही बता चुके हैं, राज्य में दबदबा जाटों का है, तो निर्णायक की भूमिका में भी जाट ही है। हरियाणा में करीब 22.2% जाट हैं।
जाटों की पावर का अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं कि 90 में से करीब 32 सीटों पर हार-जीत का फैसला जाट ही करते हैं। इसके अलावा 17 और ऐसी सीटें हैं, जहां उन्हें भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
इस हिसाब से देखा जाए, तो 49 सीटों पर जाटों की पकड़ है और ये आंकड़ा सरकार बनाने के लिए जितनी सीटें चाहिए, उससे भी ज्यादा है। कई बड़े जिले जैसे कि रोहतक, हिसार, सोनीपत, कैथल, जींद, फतेहाबाद, झज्जर, भिवानी और सिरसा में जाटों की मजबूत पकड़ है।
जाटों के बाद सबसे ज्यादा SC वोटर
हरियाणा में जाटों के बाद अगर कोई मजबूत संख्या में है, तो वो है SC वोटर। राज्य की 17 विधानसभा सीटें रिजर्व हैं। लोकसभा चुनाव के पैटर्न पर एक नजर डालें, तो पता चलता है कि इस बार SC वोटर बीजेपी से छिटक गया है।
क्योंकि लोकसभा चुनाव के दौरान, अलग-अलग लोकसभा सीट के तहत आने वाली इन 17 विधानसभा सीटों में से 13 पर बीजेपी कांग्रेस से पीछे रही है।
पिछले एक दशक में हरियाणा में अनुसूचित जाति के लिए वोटिंग पैटर्न, अलग-अलग पार्टियों की ओर से आरक्षित विधानसभा सीटों की संख्या को देखते हुए, पता चलता है कि समुदाय ने 2014 के विधानसभा चुनाव में BJP को भारी वोट दिया था, लेकिन पिछले चुनाव में बराबर बिखरे हुए थे।
दलितों को लुभाने में लगी BJP
इंडियन नेशनल लोक दल के कार्यकर्ता और SC नेता रमेश कुमार ने कहा कि बढ़ती महंगाई, ई-पहल के खराब तरीके से लागू होने अलावा समुदाय के लिए अलग-अलग योजनाओं को पूरा करने में सरकार की विफलता के कारण भाजपा के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर भी बढ़ रही है। उन्होंने कहा, 'परिवार पहचान पत्र' और बार-बार पेपर लीक होने से विपक्ष को फायदा हो सकता है।
BJP ने राज्य के उच्च शिक्षण संस्थानों में अनुसूचित जाति के लिए 'वंचित अनुसूचित जाति' नाम का एक नए ग्रुप बनाने के साथ 'कोटा के भीतर कोटा' दिया, जिसमें वाल्मिकी, बाजीगर और धनक जैसे 36 समुदाय शामिल थे। सरकार ने अलग-अलग कल्याणकारी योजनाओं में तेजी ला दी है, जिसका मेन टारगेट SC समुदाय है।
जाटों की कमी SC से पूरा करना चाहती है BJP
विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले कुछ सालों में अपनी शिक्षा की स्थिति में सुधार कर लिया है, जिससे SC समुदाय राजनीतिक रूप से जागरूक हो गया है और उसने ओरों के मुकाबले, अपने "संवैधानिक अधिकारों" और "विकास" के लिए मतदान किया है। उन्होंने दावा किया कि समुदाय ज्यादातर जाति के आधार पर वोट देते हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस बार राज्य में बीजेपी की जमीन थोड़ी खिसकती नजर आ रही है। एक तरफ उससे जाट समुदाय नाराज दिख रहा है, तो वहीं वो अब जाट वोट की भरपाई SC वोट से करना चाहाती है, जिसके लिए उसे खूब मेहनत करनी पड़ेगी।
इन दोनों जातियों के अलावा दूसरे समुदाय के वोट बैंक की बात करें, तो हरियाणा में पंजाबी- 8%, ब्राह्मण- 7.5%, अहीर (यादव)- 5.14%, वैश्य- 5%, जाट सिख- 4%, राजपूत- 3.4%, गुर्जर- 3.35%, मेव और मुस्लिम- 3.8% और अन्य- 15.98% हैं।