Hemant Soren: 6 महीने बाद जेल से बाहर आए हेमंत सोरेन, जमीन घोटाले में हाई कोर्ट ने झारखंड के पूर्व CM को दी जमानत

Hemant Soren Bail: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शुक्रवार को झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को जमानत मिलने पर खुशी जताई। हाई कोर्ट से सोरेन को जमानत देने का आदेश आने के बाद झामुमो और कांग्रेस कार्यकर्ता आपस में मिठाई बांटते देखा गया

अपडेटेड Jun 28, 2024 पर 4:52 PM
Hemant Soren: 6 महीने बाद जेल से बाहर आए झारखंड के पूर्व CM हेमंत सोरेन

झारखंड हाई कोर्ट ने कथित भूमि घोटाले से जुड़े धन शोधन मामले में गिरफ्तार राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को शुक्रवार को जमानत दे दी, जिसके बाद सोरेन को जेल से रिहा कर दिया गया। अदालत ने सोरेन की जमानत याचिका पर अपना फैसला 13 जून को सुरक्षित रख लिया था। जस्टिस रंगन मुखोपाध्याय की सिंगल बेंच की तरफ से पारित आदेश में कहा गया, "याचिकाकर्ता को 50,000 रुपए के जमानत मुचलके और इतनी ही राशि की दो जमानत प्रस्तुत करने पर जमानत पर रिहा करने का निर्देश दिया जाता है।"

झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के कार्यकारी अध्यक्ष सोरेन को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने धन शोधन के मामले में 31 जनवरी को गिरफ्तार किया था। 48 साल के सोरेन बिरसा मुंडा जेल में कैद थे।

विपक्षी पार्टियों ने मनाई खुशी


सोरेन के सीनियर वकील अरुणाभ चौधरी ने न्यूज एजेंसी PTI से कहा, "सोरेन को जमानत दे दी गई है। अदालत ने कहा है कि प्रथम दृष्टया, वह दोषी नहीं हैं और जमानत पर रिहाई के दौरान याचिकाकर्ता की तरफ से कोई अपराध किए जाने की कोई आशंका नहीं है।"

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शुक्रवार को झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को जमानत मिलने पर खुशी जताई। हाई कोर्ट से सोरेन को जमानत देने का आदेश आने के बाद झामुमो और कांग्रेस कार्यकर्ता आपस में मिठाई बांटते देखा गया।

सुनवाई के दौरान ED के वकील एसवी राजू ने SC/ST पुलिस थाने में ED अधिकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों का जिक्र करते हुए दलील दी कि अगर सोरेन को जमानत पर रिहा किया जाता है, तो वो इसी तरह का अपराध फिर करेंगे।

अदालत ने क्या कहा?

अदालत ने कहा, "प्रवर्तन निदेशालय को ओर से याचिकाकर्ता के आचरण को एजेंसी के अधिकारियों की तरफ से उसके खिलाफ दर्ज FIE के आधार पर उजागर किया गया है, लेकिन मामले के समग्र परिप्रेक्ष्य में, याचिकाकर्ता की ओर से ऐसा ही अपराध करने की कोई संभावना नहीं है।"

सिंगल बेंच के आदेश में ये भी जिक्र किया गया कि अदालत का निष्कर्ष है कि "PMLA, 2002 की धारा 45 की शर्त के तहत यह मानने का कारण है कि याचिकाकर्ता आरोपित अपराध का दोषी नहीं है।"

बचाव पक्ष और ED की ओर से दलीले पूरी होने के बाद अदालत ने आदेश सुरक्षित कर लिया था।

ED ने की 48 घंटे तक रोक लगाने की मांग

वकील ने बताया कि ED का पक्ष रख रहे वकील जोहैब हुसैन ने सिंगल बेंच के आदेश के अमल पर 48 घंटे तक रोक लगाने का अनुरोध किया, ताकि फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जा सके, लेकिन हाई कोर्ट ने इस अनुरोध को ठुकरा दिया।

हेमंत सोरेन (Hemant Soren) ने हाई कोर्ट से मामले की तेजी से सुनवाई करने का अनुरोध किया था।

इस बीच, राज्य की JMM नीत सरकार में मंत्री और सोरेन के छोटे भाई बसंत सोरेन पार्टी के केंद्रीय महासचिव बिनोद पांडेय के साथ जमानत मुचलका भरने की औपचारिकताएं पूरी करने के लिए दीवानी अदालत पहुंचे।

जमानत मुचलके स्पेशल PMLA जज राजीव रंजन की अदालत में पेश किए जाएंगे।

हेमंत सोरेन ने कोर्ट में क्या पक्ष रखा?

सोरेन की वकील मीनाक्षी अरोड़ा ने इससे पहले दलील दी थी कि JMM नेता को अनुचित तरीके से निशाना बनाया गया है। उन्होंने इसे ‘‘राजनीति से प्रेरित’’ और ‘‘मनगढ़ंत’’ मामला करार दिया था।

सीनियर वकील कपिल सिब्बल ने भी सोरेन का अदालत में पक्ष रखा और पूर्व मुख्यमंत्री की जमानत के लिए दलील पेश करते हुए कहा था कि केंद्रीय एजेंसी ने उन्हें एक आपराधिक मामले में झूठा फंसाया है।

सोरेन की जमानत याचिका का विरोध करते हुए ED ने आरोप लगाया कि उन्होंने राज्य की राजधानी में बड़गाम अंचल में 8.86 एकड़ जमीन ‘‘अवैध रूप से’’ हासिल करने के लिए मुख्यमंत्री के अपने पद का गलत इस्तेमाल किया था।

ED ने दावा किया कि जांच के दौरान सोरेन के मीडिया सलाहकार अभिषेक प्रसाद ने स्वीकार किया था कि पूर्व मुख्यमंत्री ने उन्हें इस प्लॉट कि मालिकाना डिटेल में बदलाव करने के लिए आधिकारिक आंकड़ों से छेड़छाड़ करने का निर्देश दिया था।

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