जो काम करीब ढाई दशक पहले संसद की छह दिनों की गंभीर चर्चा के बावजूद नहीं हो सका, उसे राज्यसभा के मौजूदा सभापति जगदीप धनखड़ ने पूरा करने का बीड़ा उठा लिया है। वह असंभव सा दिखने वाला काम है संसद की कार्यवाही में अनुशासन और शालीनता लाने का एक बहुत जरूरी काम।सभापति की पहल से कई हलकों में उम्मीद तो बंधी है। क्योंकि सभापति कड़े संकल्प वाले व्यक्ति माने जाते हैं। सभापति ने राज्य सभा के 12 सदस्यों के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का मामला संबंधित समिति को सौंप दिया है।
