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राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ की कोशिश कामयाब हुई तो देश के लोकतंत्र की छवि सुधरेगी

विधायिकाओं में हंगामों के लेकर स्थिति बिगड़ती ही जा रही है। उम्मीद है कि राज्य सभा के सभापति जगदीप धनखड़ का प्रयास सफल होगा ताकि देश के लोकतंत्र की छवि सुधरे

Surendra Kishoreअपडेटेड Feb 27, 2023 पर 7:22 AM
राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ की कोशिश कामयाब हुई तो देश के लोकतंत्र की छवि सुधरेगी

जो काम करीब ढाई दशक पहले संसद की छह दिनों की गंभीर चर्चा के बावजूद नहीं हो सका, उसे राज्यसभा के मौजूदा सभापति जगदीप धनखड़ ने पूरा करने का बीड़ा उठा लिया है। वह असंभव सा दिखने वाला काम है संसद की कार्यवाही में अनुशासन और शालीनता लाने का एक बहुत जरूरी काम।सभापति की पहल से कई हलकों में उम्मीद तो बंधी है। क्योंकि सभापति कड़े संकल्प वाले व्यक्ति माने जाते हैं। सभापति ने राज्य सभा के 12 सदस्यों के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का मामला संबंधित समिति को सौंप दिया है।

उन पर सदन की कार्यवाही में बार-बार बाधा पहुंचाने का आरोप है।देखना है कि इस पर विशेषाधिकार समिति कौन सा कठोर फैसला करती है। अब जरा सन 1997 की उस ऐतिहासिक चर्चाओं को हम याद कर लें। आजादी की स्वर्ण जयंती के अवसर पर छह दिनों तक संसद के सत्र चले। कोई दूसरा काम नहीं हुआ।

अपने विशेष सत्र में दोनों सदनों ने प्रस्ताव पास किया। प्रस्ताव में कहा गया कि "संसद ने एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए भारत के भावी कार्यक्रम के रूप में सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पास किया। प्रस्ताव में भ्रष्टाचार को समाप्त करने, राजनीति को अपराधीकरण से मुक्त करने के साथ -साथ चुनाव सुधार करने, जनसंख्या वृद्धि,निरक्षरता और बेरोजगारी को दूर करने के लिए जोरदार राष्ट्रीय अभियान चलाने का संकल्प किया गया।"

उस प्रस्ताव को सर्वश्री अटल बिहारी वाजपेयी, इंद्रजीत गुप्त, सुरजीत सिंह बरनाला, कांसी राम, जार्ज फर्नांडीस, शरद यादव, सोम नाथ चटर्जी, एन.वी.एस. चितन, मुरासोली मारन, मुलायम सिंह यादव, डा.एम.जगन्नाथ, अजित कुमार मेहता,मधुकर सरपोतदार, सनत कुमार मंडल, वीरेंद्र कुमार बैश्य, ओम प्रकाश जिंदल और राम बहादुर सिंह ने सामूहिक रूप से सदन में पेश किया था।

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