पिछले कुछ सालों में जम्मू-कश्मीर में बहुत कुछ बदल गया है। इस विधानसभा चुनाव में, जो पॉजिटिव बदलाव देखने को मिले हैं, उनमें एक ये कि अब अलगाववादी नेताओं ने भी लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा बनने की कोशिश की है। इनमें से कई अलगाववादी नेताओं के नामांकन स्वीकार कर लिए गए हैं, जबकि बुधवार को चुनाव आयोग ने कम से कम 35 नामांकन पत्र खारिज कर दिए। खारिज किए गए लोगों में से छह पर दंगों और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) की धाराओं से लेकर आपराधिक आरोप लगे थे।
