Karnataka CM: सिद्धारमैया ने दी राजनीति छोड़ने की धमकी? कांग्रेस विधायक ने बताया, CM पद के लिए क्यों मंजूर नहीं हैं डीके शिवकुमार

Karnataka CM: विधायक के अनुसार, सिद्धारमैया (Siddaramaiah) ने उन्हें बताया कि सभी सर्वे में उन्हें ही सबसे ज्यादा अप्रूवल रेटिंग दी है और DKS को महज 10% रेटिंग मिली है। AHINDA, यानि अल्पसंख्यक, पिछड़े और दलितों ने कांग्रेस को बढ़-चढ़कर वोट दिया है। इन सब को उम्मीद है कि सिद्धारमैया ही मुख्यमंत्री होंगे। लेकिन अगर ऐसा नहीं होता है, तो ये सारा वोट बैंक लोकसभा चुनाव में कांग्रेस से छिटक जाएगा

अपडेटेड May 17, 2023 पर 4:49 PM
Karnataka CM: मुख्यमंत्री पद के नाम पर आखिर फैसला विधायकों और आलाकमान की ओर से सर्वसम्मति से लिया जाएगा

कर्नाटक के मुख्यमंत्री (Karnataka CM) को लेकर अभी भी सस्पेंस जारी है। इस बीच कांग्रेस (Congress) के शीर्ष दावेदार सिद्धारमैया (Siddaramaiah) ने CM की कुर्सी को लेकर मंगलवार रात वोक्कालिगा के एक वरिष्ठ विधायक से कहा कि "या तो उन्हें या किसी तीसरे व्यक्ति को होना चाहिए, लेकिन उनके प्रतिद्वंद्वी डीके शिवकुमार को नहीं।" यानि उनका मतलब था कि मुख्यमंत्री या तो सिद्धारमैया चुने जाएंगे, या फिर कोई तीसरा चेहरा, लेकिन डीके शिवकुमार (DK Shivakumar) सीएम नहीं बनेंगे। विधायक के अनुसार, सिद्धारमैया ने उन्हें बताया कि सभी सर्वे में उन्हें ही सबसे ज्यादा अप्रूवल रेटिंग दी है और डीकेएस को महज 10% रेटिंग मिली है।

CNN-News18 के मुताबिक, विधायक ने आगे कहा कि AHINDA, यानि अल्पसंख्यक, पिछड़े और दलितों ने कांग्रेस को बढ़-चढ़कर वोट दिया है। इन सब को उम्मीद है कि सिद्धारमैया ही मुख्यमंत्री होंगे। लेकिन अगर ऐसा नहीं होता है, तो ये सारा वोट बैंक लोकसभा चुनाव में कांग्रेस से छिटक जाएगा।

विधायक ने कहा कि सिद्धारमैया ने ज्यादातर विधायकों के समर्थन का दावा किया है और कांग्रेस नेता राहुल गांधी का मानना ​​है कि जिसे सबसे ज्यादा वोट मिले उसे मुख्यमंत्री बनाया जाना चाहिए।


सिद्धारमैया की राजनीति से संन्यास लेने और भविष्य में पार्टी के किसी भी मामले में शामिल नहीं होने की धमकी ने वरिष्ठ विधायक को झकझोर कर रख दिया।

इस विधायक ने कहा, "सिद्धारमैया ने समझाया कि कांग्रेस की पांच गारंटी तभी लागू हो सकती हैं, जब उन्हें सीएम बनाया जाए। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने आलाकमान को उन अलग-अलग मामलों के बारे में बताया है, जिनका डीकेएस सामना कर रहे हैं और अगर उन्हें मुख्यमंत्री बनाया जाता है, तो उनके खिलाफ उनका इस्तेमाल कैसे किया जा सकता है, जो सरकार को अस्थिर कर सकता है।”

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विधायक ने News18 से कहा, "वह एक बात को लेकर साफ हैं कि या सिद्धारमैया या फिर किसी तीसरे शख्स को कुर्सी मिलनी चाहिए, लेकिन डीके शिवकुमार को किसी हालत में CM नहीं बनाया जाना चाहिए।"

MLA ने आगे कहा, "उन्होंने साफ कर दिया है कि कांग्रेस को उनसे भविष्य में पार्टी के लिए काम करने की उम्मीद नहीं रखनी चाहिए और वह रिटायर हो जाएंगे। इसने मुझे हिला दिया। हम सिद्धारमैया के बिना कर्नाटक कांग्रेस की कल्पना नहीं कर सकते। अगर वह आसपास नहीं होते हैं, तो भारतीय जनता पार्टी (BJP) आसानी से अगला चुनाव जीत जाएगी। JDS भी दोबारा उठ खड़ी हो सकती है।"

कर्नाटक की राजनीति में जातियों का खेल

अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC), मुस्लिम और अनुसूचित जनजाति (ST) ये सुनिश्चित करने के लिए अपनी ताकत का प्रदर्शन कर रहे हैं कि सिद्धारमैया को शीर्ष पद मिले। दलित चुप्पी साधे हुए हैं। यहां तक ​​कि वोक्कालिगा के सभी विधायक निजी कारणों से DKS के साथ नहीं हैं।

कांग्रेस को 1989 के बाद सबसे ज्यादा 34 सीटें देने वाले लिंगायत, दोनों नेताओं के बीच चल रहे सत्ता संघर्ष और शीर्ष पद के लिए डीकेएस की लड़ाई से असहज हैं।

लिंगायत इस सत्ता संघर्ष में DKS और सिद्धारमैया दोनों से दूर रहना चाहते हैं। वे अपने शीर्ष नेता एमबी पाटिल के लिए कम से कम एक डिप्टी सीएम पद और सात-आठ महत्वपूर्ण कैबिनेट बर्थ चाहते हैं। लिंगायत आबादी का 16% हैं और कर्नाटक में 25% वोटों को नियंत्रित करते हैं। उनके मठ भी सबसे मजबूत होते हैं।

लिंगायत ब्लॉक सबसे बड़ा और सबसे शक्तिशाली है और वोक्कालिगा मुख्यमंत्री का समर्थन नहीं करेगा। वे एक OBC के साथ ठीक हैं, क्योंकि लिंगायत क्षेत्रों में उनकी बड़ी संख्या है।

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