Chalo Delhi Protest: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में आज यानी बुधवार (7 फरवरी) को कर्नाटक के सभी मंत्री केंद्र सरकार की टैक्स ट्रांसफर नीतियों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। जंतर-मंतर पर कर्नाटक कांग्रेस सरकार केंद्र सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इस प्रदर्शन में कर्नाटक के सीएम सिद्धारमैया (Karnataka CM Siddaramaiah) और डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार (DK Shivakumar) भी शामिल हुए। कर्नाटक कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन पर कर्नाटक के सीएम सिद्धारमैया ने कहा, "हमें उम्मीद है कि सरकार हमारा विरोध सुनेगी और हमारा मुख्य उद्देश्य राज्य और कन्नड़ लोगों के हितों की रक्षा करना है।"
कांग्रेस नेता प्रियांक खरगे ने कहा, "हमारे 4-5 मांगें हैं उसके खिलाफ ये प्रदर्शन है..केंद्र सरकार से हमारा निवेदन है कि हम जितना टैक्स देते हैं उतना हमें वापस दें तो हम भी देश के लिए ज्यादा योगदान दे सकते हैं।"
क्या है कर्नाटक सरकार की मांग?
प्रदर्शनकारी केंद्र से 15 वें वित्त आयोग के तहत पांच साल के दौरान कर्नाटक को हुए 1.87 लाख करोड़ रुपये के कथित नुकसान की भरपाई करने की मांग कर ररे हैं। वहीं, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के वरिष्ठ नेता एवं केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन अपने कैबिनेट सहयोगियों के साथ 8 फरवरी को दक्षिणी राज्य के प्रति केंद्र की कथित लापरवाही के खिलाफ राष्ट्रीय राजधानी में विरोध प्रदर्शन करेंगे।
दूसरी ओर, कोलकाता में तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख एवं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी कथित तौर पर उनके राज्य का बकाया, विशेष रूप से महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत रोके जाने के लिए केंद्र के खिलाफ शुक्रवार को विरोध प्रदर्शन करेंगी।
सिद्धरमैया ने कहा है कि विरोध प्रदर्शन का उद्देश्य राज्य की चिंताओं की ओर केंद्र सरकार और देश के लोगों का ध्यान आकर्षित करना है। उन्होंने कहा है कि अभी तक राज्य ने कभी भी दिल्ली में विरोध प्रदर्शन नहीं किया है। लेकिन "अपरिहार्य कारणों" के चलते अब ऐसा करने की स्थिति आ गई है।
उन्होंने विपक्षी BJP और उसके जनप्रतिनिधि, विशेष रूप से राज्य के सांसदों से कर्नाटक के हित में आंदोलन में शामिल होने का आग्रह किया, क्योंकि यह संघर्ष राज्य के साथ हुए "अन्याय" के खिलाफ है, न कि BJP के खिलाफ।
उन्होंने BJP सहित कर्नाटक के सभी सांसदों को पत्र लिखकर विरोध प्रदर्शन में शामिल होने का अनुरोध किया है। उन्होंने राज्य से केंद्रीय मंत्रियों निर्मला सीतारमण (राज्यसभा सदस्य) और प्रह्लाद जोशी को भी आमंत्रित किया गया है।
सीएम बोले- किसी के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए
मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने यह स्पष्ट किया कि वह या उनकी सरकार केंद्र द्वारा "गरीब" या विकास की कमी वाले उत्तरी राज्यों को अधिक धन देने के खिलाफ नहीं हैं। उन्होंने कहा कि कर्नाटक जैसे राज्यों के साथ कोई अन्याय नहीं होना चाहिए।
दिल्ली में विरोध प्रदर्शन का यह कदम ऐसे समय आया है जब कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस के भीतर एक वर्ग ने प्रस्ताव दिया है कि सिद्धरमैया केंद्र से संसाधनों के समान वितरण सुनिश्चित करने के लिए दक्षिणी राज्यों का एक मंच बनाने का नेतृत्व करें, जिसमें विभाज्य पूल से टैक्स का ट्रांसफर भी शामिल है।
पार्टी और आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि हालाकि, ऐसा प्रतीत होता है कि इस प्रस्ताव पर अभी तक कोई गंभीर चर्चा या निर्णय नहीं हुआ है, जिसका उद्देश्य संघीय ढांचे को मजबूत करना है और यह सुनिश्चित करना है कि दक्षिणी राज्यों को अपनी बात कहने का अधिकार हो।
केंद्र सरकार पर कर्नाटक के साथ "सौतेला" व्यवहार करने और संघीय ढांचे का "अपमान" करने का आरोप लगाते हुए, सिद्धरमैया ने राज्य में बीजेपी नेताओं और इसकी पिछली सरकार पर केंद्र की नीतियों के कारण राज्य के साथ हुए अन्याय को दूर करने के लिए कुछ नहीं करने के लिए बार-बार निधाना साधा है।