केरल में नए मंत्रीमंडल (Kerala New Cabinet) की घोषणा हो गई है और इस नई कैबिनेट केवल मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन (Pinarayi Vijayan) को छोड़कर सभी नए चेहरे हैं। हैरानी की बात ये है कि स्वास्थ्य मंत्री केके शैलजा, जिनकी राज्य में Covid-19 संकट से निपटने के लिए काफी प्रशंसा हुई, वो तक नए राज्य मंत्रिमंडल का हिस्सा नहीं हैं।
CPI(M) राज्य समिति ने मंगलवार को बयान जारी कर कहा कि राज्य समिति ने पिनाराई विजयन को संसदीय दल के नेता और सीएम के रूप में नियुक्त किया है।
बयान में आगे कहा गया है कि एमवी गोविंदन, के राधाकृष्णन, केएन बालगोपाल, पी राजीव, वीएन वसावन, साजी चेरियन, वी शिवनकुट्टी, मोहम्मद रियास, डॉ आर बिंदू, वीना जॉर्ज और वी अब्दुल रहमान को मंत्री बनाया गया है।
इसमें आगे कहा गया है कि "स्वास्थ्य मंत्री केके शैलजा समेत सभी मौजूदा मंत्रियों को हटा दिया गया है। पार्टी ने एमबी राजेश को स्पीकर उम्मीदवार और केके शैलजा को पार्टी व्हिप के रूप में चुना है। टीपी रामकृष्णन को संसदीय दल सचिव के रूप में भी नियुक्त किया गया है।"
शैलजा, जो एक रिटायर टीचर भी हैं, केरल राज्य में महामारी के शुरुआती चरण में COVID-19 के प्रसार को रोकने में शानदार काम करने के बाद लोकप्रिय हुईं। उन्होंने पहले भी निपाह वायरस की रोकथाम पर काम किया था।
केरल में दूसरी पिनाराई विजयन सरकार, 20 मई को शपथ ग्रहण कर सकती है। नई वाम सरकार का शपथ ग्रहण समारोह COVID-19 स्थिति को देखते हुए सीमित आमंत्रित लोगों के साथ होगा।
एलडीएफ ने केरल में अपने प्रतिद्वंद्वियों- कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) और बीजेपी-एनडीए को हराकर 99 सीटें जीतकर सत्ता बरकरार रखी है। जबकि UDF केवल 41 सीटों जीत हासिल कर पाई, भगवा मोर्चा चुनावों में एक भी सीट जीतने में विफल रहा।