4 नवंबर 1977 को तत्कालीन प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई विमान दुर्घटना में बाल-बाल बचे थे।दरअसल वायु सेना के चालक दल के पांच सदस्यों ने आत्म बलिदान देकर प्रधानमंत्री को बचा लिया था। वायु सेना का वह विमान उस दिन असम में जोरहाट के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। खराब मौसम और तेल की कमी के कारण विमान का 'नोज-डाइव' कराना पड़ा था। दिल्ली से उड़ान भरने से पहले अफसरों ने प्रधानमंत्री देसाई से यह आग्रह किया था कि जोरहाट दिल्ली से काफी दूर है इसलिए पुष्पक विमान से ना जाएं। इस विमान में ईंधन की टंकी छोटी होती है, इसलिए आप बोइंग-737 से यात्रा करें।
