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जानिए किस पीएम की जान बचाने के लिए एयरफोर्स के 5 अफसरों ने गंवाई थी जान

देश में एक पीएम ऐसे भी थे जिन्होंने पैसे बचाने के लिए छोटे विमान का इस्तेमाल किया और अपनी जान खतरे में डाल दी थी। हालांकि उनकी जान बचाने में एयरफोर्स के 5 अधिकारियों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी

Surendra Kishoreअपडेटेड Feb 20, 2023 पर 7:27 AM
जानिए किस पीएम की जान बचाने के लिए एयरफोर्स के 5 अफसरों ने गंवाई थी जान
मोरारजी देसाई की एक जिद की वजह से एयरफोर्स के 5 अफसरों की गई थी जान

4 नवंबर 1977 को तत्कालीन प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई विमान दुर्घटना में बाल-बाल बचे थे।दरअसल वायु सेना के चालक दल के पांच सदस्यों ने आत्म बलिदान देकर प्रधानमंत्री को बचा लिया था। वायु सेना का वह विमान उस दिन असम में जोरहाट के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। खराब मौसम और तेल की कमी के कारण विमान का 'नोज-डाइव' कराना पड़ा था। दिल्ली से उड़ान भरने से पहले अफसरों ने प्रधानमंत्री देसाई से यह आग्रह किया था कि जोरहाट दिल्ली से काफी दूर है इसलिए पुष्पक विमान से ना जाएं। इस विमान में ईंधन की टंकी छोटी होती है, इसलिए आप बोइंग-737 से यात्रा करें।

लेकिन, मोरारजी देसाई ने कहा कि हम सामान्य विमान से ही जाएंगे। उनका आशय यह था कि बोइंग-737 पर खर्च अधिक आएगा। गांधीवादी मोरारजी देसाई अपने कार्यकाल में सेवा विमान से ही विदेश यात्रा पर जाते थे, भले वह यात्रा सरकारी होती थी। विशेष विमान से न जाने के कारण कई पत्रकार उनसे नाराज रहते थे। याद रहे कि उनसे पहले और बाद के प्रधान मंत्री विशेष विमान में बड़ी संख्या में पत्रकारों को अपने साथ विदेश ले जाया करते थे।

साल 1977 में वायु सेना के जिन अफसरों ने आत्म बलिदान दिया था, उनमें विंग कमांडर सीजेडी लिमा, विंग कमांडर जोगिंदर सिंह, स्क्वाड्रन लीडर वीवीएस सुनकर, स्क्वाड्रन लीडर एम सायरिक और फ्लाइट लेफ्टिनेंट ओपी अरोड़ा शामिल थे। वे टीयू-124 पुष्पक विमान से वहां गए थे। विमान 4 नवंबर 1977 को दिल्ली से शाम सवा पांच बजे उड़ा। उसे पौने आठ बजे जोरहाट पहुंचना था। पर, असम में प्रवेश करने के बाद अचानक विमान का संबंध जमीन से टूट गया। विमान जोरहाट के पास आकाश में चक्कर लगाने लगा।

ईंधन खत्म होने का डर था। लिहाजा विमान को जल्दी उतारने के लिए बांस के जंगल में नोज डाइव (Nose Dive) कराना पड़ा। इस क्रम में विमान के पिछले हिस्से में बैठे अहम लोगों की जान बच गई लेकिन कॉकपीट के पांचों अफसर शहीद हो गए। विमान में साथ चल रहे फ्लाइट लेफ्टिनेंट पीके रवींद्रन और कारपोरल केएन उपाध्याय प्रधानमंत्री और उनके सहयात्रियों को पास के टेकेला गांव ले जाया गया।

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