Lok Sabha Elections 2024: कई महीनों तक, बिहार (Bihar) के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) ने अपने आप को I.N.D.I.A. ब्लॉक का चेहरा बनने का लक्ष्य रखा था। लेकिन सूत्रों का कहना है कि इस मामले में कांग्रेस (Congress) की तरफ से टाल-मटोल करना और गठबंधन की पिछली बैठक में कुमार का कथित 'अपमान' उनके लिए BJP में शामिल होने पर विचार करने के लिए आखिरी तिनका साबित हो सकता है।
ऐसा माना जाता है कि कांग्रेस ने JDU को संकेत दिया है कि ममता बनर्जी को नीतीश कुमार को संयोजक नियुक्त किए जाने से समस्या हो सकती है और इसके लिए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री को विश्वास में लेना जरूरी और उन्हें मनाने के लिए AAP के अरविंद केजरीवाल की जरूरत पड़ सकती है।
ऐसा लगता है कि इससे कुमार इतने चिढ़ गए कि उन्होंने कांग्रेस से कहा कि वे संयोजक के रूप में लालू प्रसाद यादव को भी चुन सकते हैं, और JDU ने कुमार को संयोजक बनाने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया।
इन वजहों से उखड़े नीतीश और JDU
JDU को इंडिया ब्लॉक में कई बार मुख्यमंत्री रहे कुमार जैसे नेताओं की तुलना में सीताराम येचुरी और मल्लिकार्जुन खड़गे जैसे कुछ नेताओं को महत्व दिए जाने से भी दिक्कत है। उदाहरण के लिए, येचुरी के बारे में कहा जाता है कि उन्होंने एक बार INDIA की बैठक में सोनिया गांधी के ठीक बाद भाषण दिया था।
JDU खेमे का ये भी मानना है कि संयोजक की नियुक्ति के लिए पहले ही बहुत देर हो चुकी है, क्योंकि अब तक सीट-बंटवारे की बातचीत लोकसभा चुनाव से पहले पूरी तरह से हो जानी चाहिए थी।
कुमार इस मुद्दे पर भी नाराजगी जता चुके हैं कि कांग्रेस ऐसे समय में राज्य चुनावों में व्यस्त है, जब INDIA गुट के सहयोगियों को सीट-बंटवारे पर बातचीत करनी चाहिए थी।
नीतीश को यह भी शिकायत है कि हालांकि, उन्होंने ममता बनर्जी और अरविंद केजरीवाल जैसे मुश्किल सहयोगियों को कांग्रेस के साथ एक मेज पर लाने में अहम भूमिका निभाई, लेकिन उन्हें उनका हक नहीं दिया गया। JDU खेमे को लगता है कि कुमार की राष्ट्रीय भूमिका की महत्वाकांक्षा उनकी प्राथमिकता है, लेकिन कांग्रेस इसके लिए उत्सुक नहीं है।
वंशवाद की राजनीति पर कुमार के नए बयान को RJD पर हमले की तरह देखा जा रहा है। समाजवादी आइकन कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति उनकी सार्वजनिक कृतज्ञता भी साफ संकेत हैं कि कुमार BJP में लौटना चाहता हैं।
नीतीश और लालू प्रसाद के बीच मुलाकातें बहुत कम हुई हैं और सबसे ताजा मुलाकात 15 जनवरी को हुई थी, जब नीतीश सिर्फ 10 मिनट के लिए लालू के आवास पर गए थे, जो तीन महीने के लंबे अंतराल के बाद हुआ।
INDIA में नेतृ्त्व न होने के कारण, नीतीश, तेजस्वी यादव को सीएम की कुर्सी सौंपने के इच्छुक नहीं हैं, जैसा कि उनके पिता लालू प्रसाद यादव चाहते हैं। BJP और JDU पुराने साझेदार रहे हैं और उनके पिछले विभाजन के बाद से कड़वाहट के बावजूद, कुमार जानते हैं कि अगर उनकी पार्टी बीजेपी के साथ गठबंधन करती है, तो बिहार में लोकसभा में अच्छी संख्या हासिल कर सकती है।
JDU ने 2019 में BJP के साथ गठबंधन में 16 लोकसभा सीटें जीती थीं, जबकि 2014 में उसने दो सीटें जीती थीं, जब उसने बीजेपी से अलग चुनाव लड़ा था।
तो क्या नीतीश कुमार अब एक और राजनीतिक पलटी मारेंगे, अगर ऐसा होता है, तो पिछले 10 सालों में ये चौथी पलटी होगी? क्या बीजेपी नीतीश कुमार के साथ दोबारा गठबंधन करने पर भी अपना मुख्यमंत्री चाहेगी? ये इस हफ्ते के आखिर में मालूम पड़ जाएगा।