Mallikarjun Kharge: कांग्रेस के दूसरे दलित अध्यक्ष बने मल्लिकार्जुन खड़गे, मजदूर संघ के नेता के तौर पर हुई थी राजनीति में एंट्री

Mallikarjun Kharge: खड़गे के बारे में एक बात कही जाती है कि कर्नाटक की राजनीति का ये शीर्ष नेता सत्ता के भीतर और बाहर हमेशा ही गांधी परिवार के प्रति वफादार रहा है

अपडेटेड Oct 19, 2022 पर 3:15 PM
कैसा रहा है मल्लिकार्जुन खड़गे का पूरा राजनीतिक सफर

मल्लिकार्जुन खड़गे (Mallikarjun Kharge) कांग्रेस के अध्यक्ष (Congress President) बन गए हैं। उन्होंने शशि थरूर (Shashi Tharoor) के खिलाफ 7,000 से ज्यादा वोट हासिल करके चुनाव जीता लिया। तिरुवनंतपुरम के सांसद शशि थरूर को पार्टी के भीतर हुए इस चुनाव में 1,072 वोट मिले। इसके साथ ही 24 सालों बाद कांग्रेस (Congress) की कमान गांधी परिवार से बाहर के किसी नेता के हाथ में आ गई है।

उनकी इस जीत की खुशी में शामिल होने और उन्हें बधाई देने शशि थरूर खुद उनके घर पहुंचे। वहीं AICC मुख्यालय पर ढोल और गाजे बाजे के साथ उनकी जीत का जश्न भी मना।

खड़गे के बारे में एक बात कही जाती है कि कर्नाटक की राजनीति का ये शीर्ष नेता सत्ता के भीतर और बाहर हमेशा ही गांधी परिवार के प्रति वफादार रहा है।


80 साल के मल्लिकार्जुन खड़गे का एक लंबा राजनीतिक करियर रहा है। कांग्रेस के साथ उन्हें 50 साल से ज्यादा का समय हो चुका है।

आइए जानते हैं वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे से जुड़ी कुछ अहम बातें-

  1. - मल्लिकार्जुन खड़गे दूसरे दलित कांग्रेस अध्यक्ष हैं। उनसे पहले मुखिया जगजीवन राम पहले दलित कांग्रेस अध्यक्ष थे।
  2. - 1968 में अध्यक्ष बने एस निजलिंगप्पा के बाद खड़गे कर्नाटक से आने वाले दूसरे कांग्रेस अध्यक्ष भी हैं।
  3. - खड़गे का जन्म 1942 में बीदर में हुआ था। मल्लिकार्जुन खड़गे ने कॉलेज के दौरान ही राजनीति में एंट्री की थी। तब वह सेठ शंकरलाल लाहोटी कॉलेज में कानून की पढ़ाई कर रहे थे।
  4. - फिर वे मजदूर संघ के नेता बन गए। खड़गे का कांग्रेस में प्रवेश 1969 में हुआ और वे गुलबर्गा सिटी कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष बने।
  5. - खड़गे को 'सोलिलदा सरदार' कहा जाता है, जिसका मतलब है एक ऐसा योद्धा जिसके चुनावी रिकॉर्ड में आज तक कोई हार दर्ज नहीं हुई।
  6. - उन्होंने विधानसभा और लोकसभा दोनों के मिलाकर 12 चुनाव लड़े और 2019 में केवल एक में वह हार गए। उन्हें बीजेपी के उमेश जाधव ने 95,452 वोटों के अंतर से हराया था। उमेश कभी खड़गे के चुनावी एजेंट हुआ करते थे।
  7. - हालांकि, वह कई बार पहले दावेदार होने के बावजूद कभी मुख्यमंत्री नहीं बन सके। 1999, 2004 और 2013 में, मल्लिकार्जुन खड़गे कुर्सी के करीब थे, लेकिन उन्हें तब दूसरे उम्मीदवारों के लिए रास्ता बनाना पड़ा।
  8. - मल्लिकार्जुन खड़गे ने मनमोहन सिंह सरकार में रेल मंत्री और श्रम मंत्री के विभागों को संभाला। वह राज्यसभा में विपक्ष के नेता थे। पार्टी के अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ने के लिए उन्होंने इससे इस्तीफा दे दिया था।
  9. - खड़गे के तीन बेटे- प्रियांक, राहुल और मिलिंद है और उनकी दो बेटियां- प्रियदर्शिनी और जयश्री हैं।
  10. - खड़गे ने कई बार खुद को बौद्ध धर्म के अनुयायी होने की घोषणा की।
  11. - खड़गे कई भाषाएं जानते हैं। वह हिंदू, उर्दू, कन्नड़, मराठी, तेलुगु और अंग्रेजी बोल सकते हैं।

Congress President Result Live: कांग्रेस अध्यक्ष चुनाव में मल्लिकार्जुन खड़गे की जीत, बधाई देने घर पहुंचे शशि थरूर

दलित नेता और कभी अत्यंत पिछड़े गुलबर्गा के एक मिल मजदूर के बेटे खड़गे ने बड़ी मेहनत से खुद को अपने दम पर यहां तक पहुंचाया है। 1972 के विधानसभा चुनावों में उनकी पहली जीत के बाद से उन्हें देखने वाले लोगों का कहना है कि वे वफादारी, धैर्य, बड़े प्रशासनिक अनुभव और किसी भी स्थिति को संभालने की उनकी क्षमता के कारण ही पार्टी में इस मुकाम पर पहुंचे हैं।

वे यह भी बताते हैं कि गांधी परिवार के प्रति उनकी निष्ठा काफी गहरी है। निजी जीवन में खड़गे बहुत ही रिजर्व व्यक्ति हैं। खड़गे तब गुस्सा हो जाते हैं, जब लोग उन्हें दलित नेता के रूप में पेश करते हैं।

उन्होंने पिछली कई बार ये कहा, "मैं एक दलित हूं। यह सच है। लेकिन, मैं अपनी काबिलियत और मेहनत के दम पर यहां तक ​​पहुंचा हूं। हर जाति और धर्म ने मेरा साथ दिया है। मुझे सिर्फ दलित नेता ही नहीं, कांग्रेस का नेता कहें, जनता का नेता कहें। मैं इसे अपमान मानता हूं। मैं किसी बड़ी चीज के लायक हूं, क्योंकि मैं सक्षम हूं, इसलिए नहीं कि मैं दलित हूं।"

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