मल्लिकार्जुन खड़गे (Mallikarjun Kharge) कांग्रेस के अध्यक्ष (Congress President) बन गए हैं। उन्होंने शशि थरूर (Shashi Tharoor) के खिलाफ 7,000 से ज्यादा वोट हासिल करके चुनाव जीता लिया। तिरुवनंतपुरम के सांसद शशि थरूर को पार्टी के भीतर हुए इस चुनाव में 1,072 वोट मिले। इसके साथ ही 24 सालों बाद कांग्रेस (Congress) की कमान गांधी परिवार से बाहर के किसी नेता के हाथ में आ गई है।
उनकी इस जीत की खुशी में शामिल होने और उन्हें बधाई देने शशि थरूर खुद उनके घर पहुंचे। वहीं AICC मुख्यालय पर ढोल और गाजे बाजे के साथ उनकी जीत का जश्न भी मना।
खड़गे के बारे में एक बात कही जाती है कि कर्नाटक की राजनीति का ये शीर्ष नेता सत्ता के भीतर और बाहर हमेशा ही गांधी परिवार के प्रति वफादार रहा है।
80 साल के मल्लिकार्जुन खड़गे का एक लंबा राजनीतिक करियर रहा है। कांग्रेस के साथ उन्हें 50 साल से ज्यादा का समय हो चुका है।
आइए जानते हैं वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे से जुड़ी कुछ अहम बातें-
दलित नेता और कभी अत्यंत पिछड़े गुलबर्गा के एक मिल मजदूर के बेटे खड़गे ने बड़ी मेहनत से खुद को अपने दम पर यहां तक पहुंचाया है। 1972 के विधानसभा चुनावों में उनकी पहली जीत के बाद से उन्हें देखने वाले लोगों का कहना है कि वे वफादारी, धैर्य, बड़े प्रशासनिक अनुभव और किसी भी स्थिति को संभालने की उनकी क्षमता के कारण ही पार्टी में इस मुकाम पर पहुंचे हैं।
वे यह भी बताते हैं कि गांधी परिवार के प्रति उनकी निष्ठा काफी गहरी है। निजी जीवन में खड़गे बहुत ही रिजर्व व्यक्ति हैं। खड़गे तब गुस्सा हो जाते हैं, जब लोग उन्हें दलित नेता के रूप में पेश करते हैं।
उन्होंने पिछली कई बार ये कहा, "मैं एक दलित हूं। यह सच है। लेकिन, मैं अपनी काबिलियत और मेहनत के दम पर यहां तक पहुंचा हूं। हर जाति और धर्म ने मेरा साथ दिया है। मुझे सिर्फ दलित नेता ही नहीं, कांग्रेस का नेता कहें, जनता का नेता कहें। मैं इसे अपमान मानता हूं। मैं किसी बड़ी चीज के लायक हूं, क्योंकि मैं सक्षम हूं, इसलिए नहीं कि मैं दलित हूं।"