RIP Mulayam Singh: 'मैं जाति से मेहतर हूं, इसके बावजूद नेता जी मुझे अपना भाई ही कहते थे', मुलायम सिंह के निधन पर सैफई के प्रधान ने दी श्रद्धांजलि

मुलायम सिंह यादव (Mulayam Singh Yadav) का सोमवार सुबह लंबी बीमारी के बाद गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में निधन हो गया। 82 साल के मुलायम ने सोमवार सुबह करीब 8:16 पर अपनी अंतिम सांस ली

अपडेटेड Oct 10, 2022 पर 1:47 PM
मुलायम सिंह यादव का अंतिम संस्कार कल यानी मंगलवार के दिन में दोपहर 3 बजे उनके पैतृक गांव इटावा जिले के सैंफई में किया जाएगा

समाजवादी पार्टी के संरक्षक और उत्तर प्रदेश के तीन बार मुख्यमंत्री रह चुके मुलायम सिंह यादव (Mulayam Singh Yadav) का सोमवार सुबह लंबी बीमारी के बाद गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में निधन हो गया। 82 साल के मुलायम ने सोमवार सुबह करीब 8:16 पर अपनी अंतिम सांस ली। सियासत के पहलवान कहे जाने वाले मुलायम सिंह को लोग उनके राजनीति में आने के समय से ही धरती पुत्र और नेता जी कहकर बुलाते थे।

मुलायम सिंह यादव का अंतिम संस्कार कल यानी मंगलवार के दिन में दोपहर 3 बजे उनके पैतृक गांव इटावा जिले के सैंफई में किया जाएगा। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने मुलायम यादव के निधन पर तीन दिन का राजकीय शोक प्रकट करते हुए पूरे राजकीय सम्मान से उनका अंतिम संस्कार करने की घोषणा की है। नेता जी के निधन पर यूपी सहित पूरे देश में शोक की लहर है।

मुलायम सिंह यादव के निधन के बाद सैफई के प्रधान रामफल बाल्मीकि ने न्यूज 18 के रिपोर्टर दिनेश शाक्य से बातचीत के दौरान नेता जी से जुड़ी कई यादें शेयर किया है। उन्होंने कहा कि मैं जाति से मेहतर हूं, इसके बावजूद नेता जी मुलायम सिंह यादव मुझे अपना भाई ही कहते थे। अधिकारियो से भी कहते थे कि मेरे भाई को कोई तकलीफ नहीं होनी चाहिए। उन्होंने मुझे सैफई गांव का प्रधान बनवाया।


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रामफल ने न्यूज 18 से एक्सक्लूसिव बातचीत में कहा कि मैं इस गांव में पैदा हुआ हूं... नेता जी की बदौलत ही गांव का प्रधान हूं। नेता जी कुश्ती के बहुत बड़े शौकीन रहे। जब अखाड़े में कुश्ती लड़ने जाते थे तो वहां और भी पहलवान रहते थे। नेता जी हम लोगों से कहते थे तुम नौजवान हो, तुम भी कुश्ती लड़ो, हम लोग आपस में कुश्ती लड़ते थे। हम लोग एक दूसरे की मालिश करते थे।

रामफल ने कहा कि मेरा गांव एक छोटा सा गांव था। गांव में चलने में बहुत दिक्कत थी। हमारे यहां भैसा गाड़ी और बैलगाड़ी से चलते थे। इतने रास्ते खराब थे कि लोग अपनी बेटियों की शादी भी यहां नहीं करते थे। लेकिन जैसे ही नेता जी मुख्यमंत्री बने सारे रोड जो आज आप देख रहे हैं उन्होंने बनवाया। उनका कहना है कि सैफई गांव बहुत ही गरीब गांव था, लेकिन लोग ईमानदार थे।

बाल्मीकि ने बताया कि नेता जी ने कभी ऐसा नहीं जताया कि वह छोटी जति के हैं। उनके मन में छुआछूत जैसा कभी कुछ नहीं रहा। मैंने उनमे कभी भेदभाव नहीं देखा। वो कभी यह नहीं समझ पाए कि मैं मेहतर हूं। उन्होंने रिपोर्टर से कहा कि मैं आपको इमानदारी से बताना चाहता हूं कि मैं आज तो बुड्ढा हो गया हूं, मेरी उम्र 70- 72 साल की हो गई है। मैं नौकरी से रिटायर भी हो गया हूं। उनके चरणों का आशीर्वाद हमें हमेशा मिला। कोई बात होती थी तो कहते थे कि रामफल मेरा छोटा भाई है। हमेशा अधिकारियों से भी कहते थे इसको देख लेना। हालांकि, मैंने कभी नाजायज काम नहीं किए। कभी भी मैंने गलत फायदा नहीं लिया।

रामफल ने आगे बताया नेताजी के 5 भाई और एक बहन है। उस समय ज्यादा जमीन भी नहीं थी। जब नेताजी चुनाव में उम्मीदवार बने तो सब लोगों ने फैसला लिया था कि उनको को हर हाल में जिताना है। ऐसे में सभी लोगों ने पंचायत बुलाई गई। चौधरी महेंद्र सिंह उस वक्त प्रधान थे। सबसे कहा गया कि मुलायम सिंह चुनाव लड़ने जा रहे है, आप लोग क्या सहयोग करेंगे? मेरी मां शर्वती देवी हाथ जोड़कर खड़ी हुई और महेंद्र सिंह जी से बोली ददा हम भले ही एक टाइम रोटी खाएं, लेकिन मुलायम सिंह को जिताएंगे। इसी पर तालियां बजा दी गई...।

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