विपक्षी दलों में 2024 के लिए बनी आम सहमति! अब शिमला में होगी अगली बैठक, लेकिन AAP ने फंसाया पेंच

Opposition Meeting: पटना में हुई 15 विपक्षी दलों की एकजुटता बैठक में ममता बनर्जी, अरविंद केजरीवाल, भगवंत मान, एमके स्टालिन समेत छह राज्यों के मुख्यमंत्री और अखिलेश यादव, उद्धव ठाकरे, महबूबा मुफ्ती समेत 5 राज्यों के पूर्व सीएम शामिल हुए। इसके अलावा राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे भी बैठक में मौजूद रहे। बैठक में 2024 के लोकसभा चुनाव और पीएम नरेंद्र मोदी एवं बीजेपी को सत्ता से हटाने को लेकर रणनीति पर चर्चा हुई

अपडेटेड Jun 23, 2023 पर 7:10 PM
Opposition Meeting: AAP ने कहा है कि जब तक कांग्रेस का स्टैंड अध्यादेश को लेकर साफ नहीं होता तब तक विपक्ष की किसी भी बैठक में आम आदमी पार्टी शामिल नहीं होगी

Opposition Meeting in Patna: बिहार की राजधानी पटना में घंटों तक चली विपक्षी दलों की महाबैठक खत्म हो गई है। विपक्ष के 15 राजनीतिक दलों के नेताओं ने साल 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए साझा रणनीति तय करने के लिए शुक्रवार को मैराथन बैठक की। इस बैठक में यह फैसला किया गया कि विपक्षी दल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके दल केंद्र में सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) के खिलाफ एकजुट होकर लड़ेंगे। अब अगली बैठक 10 या 12 जुलाई को शिमला में होगी। इसमें अंतिम फैसला लिया जाना है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव की मेजबानी में यह बैठक मुख्यमंत्री के आवास '1 अणे मार्ग' पर हुई, जिसमें करीब 30 विपक्षी नेताओं ने भाग लिया।

विपक्षी दलों की बैठक के बाद नीतीश कुमार ने विपक्षी नेताओं के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि काफी अच्छी मुलाकात हुई, एक साथ चलने पर सहमति बनी। सीएम ने कहा, "अगली बैठक कुछ दिन के बाद सब पार्टियों की फिर से की जाएगी। अगली बैठक में तय होगा की कौन कहां लड़ेगा। जो शासन में है वे देश के हित में काम नहीं कर रहे हैं। वे सब इतिहास बदल रहे हैं। हम सबका अभिनंदन करते हैं।"

शिमला में होगी अगली बैठक


कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि अगली बैठक जुलाई महीने में हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में होगी। उन्होंने कहा कि हम 10 या 12 जुलाई को शिमला में फिर से मिल रहे हैं जिसमें हम एक सामान्य एजेंडा तैयार करेंगे। हमें हर राज्य में अलग-अलग तरह से काम करना पड़ेगा।

वहीं, कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि यह विचारधारा की लड़ाई है, हम एक साथ खड़े हैं, हमारे बीच थोड़ा-बहुत मतभेद हो सकते हैं, लेकिन हमें मिलकर काम करना है। उन्होंने कहा, "BJP और RSS हिंदुस्तान की नींव पर आक्रमण कर रही है। यह विचारधारा की लड़ाई है और हम साथ खड़े हैं। हमने निर्णय लिया है कि हम एक साथ काम करेंगे और अपनी सामान्य विचारधारा की रक्षा करेंगे। यह विपक्षी एकता की प्रक्रिया है जो आगे बढ़ेगी।"

किस नेता ने क्या कहा?

तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी ने कहा कि हम एक हैं, हम मिलकर लड़ेंगे। उन्होंने कहा कि पटना में जो बैठक हुआ है वो अच्छा हुआ है। हमने तीन चीज पर जोर दिया है-हम लोग एक है, हम लोग एक साथ लड़ेंगे, अगला बैठक शिमला में होगा। बीजेपी चाहती है कि इतिहास बदला जाए और हम चाहते हैं कि बिहार से इतिहास बचाया जाए। महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा कि देश की एकता, अखंडता बनाए रखने के लिए हम एक साथ आए हैं। इसके आगे हमारे प्रजातंत्र पर आघात करेगा उसका हम सब मिलकर विरोध करेंगे। जो भी देश में तानाशाही लाना चाहेगा उसके ख़िलाफ़ हम एक साथ रहेंगे। शुरूआत अच्छी रही है।

इसके अलावा नेशनल कांफ्रेंस नेता उमर अब्दुल्ला ने कहा कि इतने लोगों को इकट्ठा करना छोटी बात नहीं है। हमारा मकसद ताकत हासिल करना नहीं है। यह उसूलों, विचारधारा, सोच, इरादों की लड़ाई है। मैं और महबूबा मुफ्ती इस मुल्क के ऐसे बदनसीब इलाके से ताल्लुक़ रखते हैं जहां लोकतंत्र का दिनदहाड़े कत्ल किया जा रहा है। वज़ीर-ए-आज़म को व्हाइट हाउस में लोकतंत्र की बात करते हुए अच्छा लगा लेकिन यह लोकतंत्र जम्मू-कश्मीर तक क्यों नहीं पहुंचता?

ये नेता हुए शामिल

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे एवं पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रमुख अखिलेश यादव, शिवसेना (UBT) के प्रमुख उद्धव ठाकरे और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के अध्यक्ष शरद पवार ने बैठक में भाग लिया।

इसके अलावा DMK नेता और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन, नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला, पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) की नेता महबूबा मुफ्ती, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के महासचिव डी राजा, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के महासचिव सीताराम येचुरी और कुछ अन्य नेता इस बैठक में शामिल हुए।

AAP-कांग्रेस में तकरार जारी

विपक्षी नेताओं की बैठक के बाद प्रेस कांफ्रेंस में न तो सीएम अरविंद केजरीवाल शामिल हुए और न ही आम आदमी पार्टी का कोई नेता। बाद में AAP ने एक बयान जारी कर कांग्रेस पर निशाना साधा है। आम आदमी पार्टी ने बयान जारी करते हुए कहा है कि अध्यादेश को लेकर कांग्रेस का स्टैंड जबतक साफ नहीं होता तबतक विपक्ष की किसी भी बैठक में आम आदमी पार्टी शामिल नहीं होगी। आप ने कहा कि कांग्रेस एक राष्ट्रीय पार्टी है जो लगभग हर मुद्दे पर स्टैंड लेती है। लेकिन कांग्रेस द्वारा अबतक काले अध्यादेश पर अपना रुख सार्वजनिक नहीं किया गया है।

AAP ने एक बयान में कहा, ''अब समय आ गया है कि कांग्रेस तय करे कि वह दिल्ली की जनता के साथ खड़ी है या मोदी सरकार के साथ।'' केजरीवाल की पार्टी ने कहा, "आज, पटना में समान विचारधारा वाली पार्टी की बैठक के दौरान, कई दलों ने कांग्रेस से काले अध्यादेश की सार्वजनिक रूप से निंदा करने का आग्रह किया। हालांकि, कांग्रेस ने ऐसा करने से इनकार कर दिया।,

बयान में आगे कहा गया है, ""कांग्रेस की चुप्पी उसके वास्तविक इरादों पर संदेह पैदा करती है। व्यक्तिगत चर्चा में, वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं ने संकेत दिया है कि उनकी पार्टी अनौपचारिक या औपचारिक रूप से राज्यसभा में इस पर मतदान से दूर रह सकती है।''

बयान में कहा गया है, "इस मुद्दे पर मतदान से कांग्रेस के अनुपस्थित रहने से बीजेपी को भारतीय लोकतंत्र पर अपने हमले को आगे बढ़ाने में काफी मदद मिलेगी।" AAP ने आगे कहा कि कांग्रेस को ''एक राष्ट्रीय पार्टी जो लगभग सभी मुद्दों पर एक स्टैंड लेती है, लेकिन अध्यादेश मुद्दे पर अभी तक कोई स्टैंड नहीं लिया है।"

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पार्टी के बयान में कहा गया है, "काला अध्यादेश संविधान विरोधी, संघवाद विरोधी और पूर्णतया अलोकतांत्रिक है। कांग्रेस की झिझक और टीम प्लेयर के रूप में कार्य करने से इनकार, विशेष रूप से इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर AAP के लिए किसी भी गठबंधन का हिस्सा बनना बहुत मुश्किल हो जाएगा जिसमें कांग्रेस भी शामिल है।"

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