Pakistan Political Crisis: आर्मी चीफ संभालेंगे पाकिस्तान की कमान? पाक सुप्रीम कोर्ट के पास है ये दो ऑप्शन

चीफ जस्टिस ने राजनीतिक दलों से यह कहते हुए शांति और व्यवस्था बनाए रखने की अपील की है कि रमजान का महीना चल रहा है और सभी लोग रोजा रख रहे हैं

अपडेटेड Apr 03, 2022 पर 8:54 PM
सुप्रीम कोर्ट ने पाकिस्तान की नेशनल असेंबली को भंग करने पर सुनवाई कल 4 अप्रैल तक के लिए स्थगित कर दी है

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान (Imran Khan) के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव को खारिज करने के नेशनल असेंबली के डिप्टी स्पीकर कासिम खान सूरी के विवादास्पद फैसले के बाद राष्ट्रपति आरिफ अल्वी द्वारा संसद को भंग किए जाने के बाद देश की ताजा राजनीतिक स्थिति का चीफ जस्टिस उमर अता बंदियाल ने संज्ञान लिया है। सुप्रीम कोर्ट ने डिप्टी स्पीकर के फैसले पर सुनवाई के लिए एक स्पेशल बेंच का गठन कर दिया है।

रविवार को नेशनल असेंबली के डिप्टी स्पीकर कासिम सूरी के फैसले को रद्द करने के लिए संयुक्त विपक्ष ने एक याचिका तैयार की है। संयुक्त विपक्ष के नेताओं के साथ-साथ सत्तारूढ़ दल के नेता भी पाकिस्तान के शीर्ष अदालत पहुंचे।

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चीफ ने राजनीतिक दलों से यह कहते हुए शांति और व्यवस्था बनाए रखने की अपील की है कि रमजान का महीना चल रहा है और सभी लोग रोजा रख रहे हैं। नेशनल असेंबली के डिप्टी स्पीकर कासिम सूरी ने विपक्ष द्वारा प्रधानमंत्री को हटाने के लिए संयुक्त रूप से पेश अविश्वास प्रस्ताव को संविधान के आर्टिकल-5 के तहत असंवैधानिक करार देते हुए खारिज कर दिया।

सेना को मिल सकती है कमान

फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट ने पाकिस्तान की नेशनल असेंबली को भंग करने पर सुनवाई कल 4 अप्रैल तक के लिए स्थगित कर दी है। News18 को सूत्रों ने कहा कि चार अप्रैल को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट दो विकल्पों पर विचार कर सकती है। सूत्रों ने कहा कि या तो पाकिस्तान में आपातकाल लग सकता है नहीं तो स्थिति नियंत्रण में होने तक सुप्रीम कोर्ट सेना को कार्यभार संभालने के लिए आमंत्रित कर सकता है। बता दें कि पाकिस्तान के अस्तित्व में आने के बाद से अबतक 75 साल की अवधि में आधे से अधिक समय तक यहां की सेना ने देश पर राज किया है।

इमरान ने विपक्ष को चौंकाया

एक अत्यधिक विवादास्पद कदम के तहत प्रधानमंत्री इमरान खान ने रविवार को मध्यावधि चुनाव की सिफारिश करके विपक्ष को चौंका दिया। इसके कुछ मिनट पहले उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव को डिप्टी स्कीपर द्वारा खारिज कर दिया गया था। खान ने 342 सदस्यीय नेशनल असेंबली में प्रभावी रूप से बहुमत खो दिया था।

नेशनल असेंबली भंग

पाकिस्तान के राष्ट्रपति आरिफ अल्वी ने प्रधानमंत्री इमरान खान की सलाह पर रविवार को नेशनल असेंबली भंग कर दी। सत्ता बचाने की कवायद में जुटे खान ने इससे कुछ मिनटों पहले उन्हें नए सिरे चुनाव कराने की सलाह दी थी। सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री फारुख हबीब ने कहा कि राष्ट्रपति अल्वी ने प्रधानमंत्री की सलाह पर नेशनल असेंबली भंग कर दी है। उन्होंने कहा कि चुनाव 90 दिनों के भीतर कराए जाएंगे। सूचना मंत्री फवाद चौधरी ने कहा कि मंत्रिमंडल को भंग कर दिया गया है।

इमरान ने देशवासियों को दी बधाई

इससे पहले 342 सदस्यीय संसद में बहुमत गंवा चुके प्रधानमंत्री खान ने नेशनल असेंबली के डिप्टी स्पीकर कासिम सूरी द्वारा संसद के हंगामेदार सत्र को स्थगित किए जाने के बाद देश को संबोधित किया। खान ने अविश्वास प्रस्ताव खारिज किए जाने के लिए आवाम को बधाई देते हुए कहा कि डिप्टी स्पीकर ने सत्ता बदलने की कोशिश और विदेशी षडयंत्र को नाकाम कर दिया। उन्होंने कहा कि मुल्क नए चुनावों के लिए तैयार रहे। अविश्वास प्रस्ताव असल में एक विदेशी एजेंडा है। खान ने कहा कि उन्होंने राष्ट्रपति अल्वी को नेशनल असेंबली भंग करने और नए सिरे से चुनाव कराने की सलाह दी है।

पाकिस्तानी सेना से विवाद से झाड़ा पल्ला

पाकिस्तान की सेना ने रविवार को कहा कि देश में उत्पन्न राजनीतिक उथल-पुथल की स्थिति से उसका कोई लेना देना नहीं है। पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल बाबर इफ्तिखार ने यह टिप्पणी अविश्वास प्रस्ताव को खारिज किए जाने और प्रधानमंत्री इमरान खान की सलाह पर राष्ट्रपति आरिफ अल्वी द्वारा नेशनल असेंबली को भंग करने के संबंध में एक निजी टीवी चैनल से बात करते हुए की।

इफ्तिखार ने कहा कि नेशनल असेंबली में आज जो भी हुआ, उससे सेना का कोई लेना देना नहीं है। पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा ने गत एक हफ्ते में कम से कम दो बार प्रधानमंत्री खान से मुलाकात की है।

कब शुरू हुआ विवाद?

पाकिस्तान में मौजूदा राजनीतिक अस्थिरता की शुरुआत आठ मार्च को विपक्ष द्वारा सरकार के खिलाफ अविश्वास का प्रस्ताव पेश करने से हुई। हालांकि, प्राधानमंत्री ने इसपर पलटवार करते हुए कहा था कि यह चुनी हुई सरकार को सत्ता से हटाने की विदेशी साजिश है।

प्रधानमंत्री खान के मुताबिक सेना के शीर्ष नेतृत्व ने उनसे पिछले सप्ताह मुलाकात की थी और राजनीतिक संकट के समाधान के लिए तीन विकल्प दिए थे जिनमें इस्तीफा देना, अविश्वास प्रस्ताव का सामना करना या समय से पूर्व चुनाव कराने का विकल्प शामिल था।

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