Parliament Monsoon Session: इस सप्ताह संसद और अधिक हंगामेदार होने वाली है, क्योंकि केंद्र सरकार दिल्ली सेवा अध्यादेश को बदलने के लिए राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (संशोधन) विधेयक, 2023 (Government of National Capital Territory of Delhi (Amendment) Bill, 2023) पेश कर सकती है। यह बिल केंद्र सरकार को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की नौकरशाही पर नियंत्रण करने का अधिकार देता है। विधेयक बीजेपी के नेतृत्व वाले NDA के खिलाफ एकजुट विपक्ष के लिए एक प्रमुख मुद्दा बन गया है।
विपक्षी गठबंधन इंडिया में शामिल दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अध्यादेश के खिलाफ कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। वहीं, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल भी अध्यादेश के विरोध में उतर आए हैं। सरकार ने लोकसभा में विचार और पारित करने के लिए 13 मसौदा कानूनों को भी सूचीबद्ध किया है, जबकि अविश्वास प्रस्ताव लाने का नोटिस सदन के समक्ष लंबित है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह लोकसभा में इस विधेयक को पेश कर सकते हैं। दिल्ली सरकार सहित अन्य विपक्षी पार्टियां इस विधेयक का विरोध कर रही है। ऐसे में आज जब ये बिल लोकसभा में पेश होगा तो सदन में जोरदार हंगामा देखने को मिल सकता है।
संसद में पहले से ही मणिपुर हिंसा को लेकर सरकार और विपक्षी पार्टियों के बीच गतिरोध जारी है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि दिल्ली सेवा अध्यादेश संसद में विपक्षी गठबंधन I.N.D.I.A. की एकता का पहला इम्तिहान होगा।
विवादस्पद राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र सरकार संशोधन अध्यादेश केंद्र सरकार द्वारा 19 मई को लाया गया था। इससे एक सप्ताह पहले सुप्रीम कोर्ट ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार को सेवा से जुड़े मामलों का नियंत्रण प्रदान कर दिया था। हालांकि उसे पुलिस, सार्वजनिक व्यवस्था और भूमि से जुड़े विषय नहीं दिए गए।
केंद्र ने जारी किया है अध्यादेश
शीर्ष अदालत के 11 मई के फैसले से पहले दिल्ली सरकार के सभी अधिकारियों के स्थानांतरण और तैनाती उपराज्यपाल के कार्यकारी नियंत्रण में थे। इस अध्यादेश में कहा गया है कि राष्ट्रीय राजधानी लोक सेवा प्रधिकरण नाम का एक प्राधिकरण होगा, जो उसे प्रदान की गई शक्तियों का उपयोग करेगा और उसे सौंपी गई जिम्मेदारियों का निर्वहन करेगा।
AAP सांसद राघव चड्ढा ने कहा कि आज दिल्ली का जो अध्यादेश संसद में लाया जा रहा है, इससे ज्यादा गैरकानूनी अध्यादेश संसद में आज तक कभी नहीं लाया गया। यह सिर्फ संविधान के खिलाफ ही नहीं बल्कि दिल्ली के 2 करोड़ लोगों के भी खिलाफ है। यह एक प्रकार से BJP द्वारा दिल्ली के लोगों को धमकी दी जा रही है कि अगर तुम BJP के अलावा किसी और पार्टी को वोट देंगे तो हम उस सरकार को नपुंसक बना देंगे, उसकी सारी शक्तियां ले लेंगे।