राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब देते हुए, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने एक अभूतपूर्व महामारी के खिलाफ लड़ाई लड़ने के लिए स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और 1.3 करोड़ भारतीयों की सराहना की।

राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब देते हुए, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने एक अभूतपूर्व महामारी के खिलाफ लड़ाई लड़ने के लिए स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और 1.3 करोड़ भारतीयों की सराहना की।
मोदी ने कहा, "COVID-19 एक महामारी है, मानव जाति ने पिछले 100 सालों में ऐसा संकट कभी नहीं देखा था। यह संकट अपना रूप बदलता है और लोगों के लिए परेशानी पैदा करता है, पूरा देश और दुनिया इसके खिलाफ लड़ रही है।"
उन्होंने कहा, "जब COVID-19 की शुरुआत हुई थी, तब इस बात पर चर्चा हो रही थी कि भारत का क्या होगा। इस बात पर भी चर्चा हुई कि भारत की वजह से दुनिया पर क्या असर पड़ेगा, लेकिन देश के 130 करोड़ लोगों की इच्छाशक्ति और अनुशासन के कारण भारत के प्रयासों की दुनिया भर में सराहना हो रही है।"
राज्यसभा में PM मोदी ने संबोधन की बड़ी बातें:
- हमारी सोच कांग्रेस की तरह संकीर्ण नहीं है, हम संकीर्ण सोच के साथ काम करने वाले लोग नहीं हैं। जिनको दशकों तक सरकार चलाने का मौका मिला उन्होंने लगभग 100 बार राष्ट्रपति शासन लाकर चुनी हुई राज्य सरकारों को उखाड़कर फेंक दिया।
- अगर कांग्रेस न होती तो बेटियों को तंदूर में जलाने की घटनाएं न होतीं, अगर कांग्रेस न होती तो देश के सामान्य मानवी को मूल सुविधाओं के लिए इतने सालों तक इंतजार न करना पड़ता।
- अगर कांग्रेस न होती तो जातिवाद और क्षेत्रवाद की खाई इतनी गहरी न होती, अगर कांग्रेस न होती तो सिखों का नरसंहार न होता, सालों साल पंजाब आतंकी आग में न जलता, अगर कांग्रेस न होती तो कश्मीर के पंडितों को कश्मीर छोड़ने की नौबत न आती।
- अगर कांग्रेस न होती तो लोकतंत्र परिवारवाद से मुक्त होता, भारत विदेशी चश्मे के बजाए स्वदेशी संकल्पों के रास्ते पर चलता, अगर कांग्रेस न होती तो आपातकाल का कलंक न होता, अगर कांग्रेस न होती तो दशकों तक भ्रष्टाचार को संस्थागत बनाकर नहीं रखा जाता।
- कांग्रेस की परेशानी ये है कि उन्होंने डायनेस्टी के आगे कुछ सोचा ही नहीं। भारत को सबसे बड़ा खतरा परिवारवादी पार्टियों का है। मैं चाहता हूं कि सभी राजनीतिक दल लोकतांत्रिक मूल्यों और आदर्शों को अपने दलों में भी विकसित करें
- कुछ लोग ये ही मानते हैं कि हिन्दुस्तान 1947 में पैदा हुआ और भारत में पिछले 75 सालों में जिसको 50 साल काम करने का मौका मिला उनकी नीतियों पर भी इस मानसिकता का प्रभाव रहा जिससे कई विकृतियां पैदा हुई हैं। ये लोकतंत्र आपकी मेहरबानी से नहीं है।
- कुछ दल के बड़े नेताओं ने पिछले दो साल में जो अपरिपक्वता दिखाई है उससे देश को बहुत निराशा हुई है। हमने देखा कि कैसे राजनीतिक स्वार्थ में खेल खेले गए, भारतीय वैक्सीन के खिलाफ मुहिम चलाई गई।
- इस सदन में कुछ साथियों ने भारत की निराशाजनक तस्वीर पेश की और ऐसा लग रहा था कि उन्हें इसे पेश करने में आनंद भी आ रहा था। मुझे लगता है कि सार्वजनिक जीवन में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं और जय-पराजय होती रहती है, उससे छाई हुई व्यक्तिगत जीवन की निराशा कम से कम देश पर नहीं थोपनी चाहिए।
- यूपीए के समय महंगाई डबल डिजिट छू रही थी, आज हम एक एकमात्र बड़ी अर्थव्यवस्था हैं जो हाई ग्रोथ और मध्यम मुद्रास्फीति अनुभव कर रहे हैं।
- नैसकॉम के अनुसार 2017 के बाद 27 लाख रोजगार आईटी सेक्टर में प्राप्त हुआ। 2021 में भारत में जितने यूनिकॉर्न बने वो पहले के वर्षों में बने कुल यूनिकॉर्न से भी ज़्यादा हैं। अगर ये सब रोजगार की गिनती में नहीं आता तो फिर ये रोजगार से ज़्यादा राजनीति की चर्चा ही मानी जाती है।
- साल 2021 में एक करोड़ 20 लाख नए ईपीएफओ के पेरोल पर जुड़े, इनमें से 60-65 लाख 18 से 25 वर्ष की आयु के हैं। रिपोर्ट बताती है कि कोरोना के पहले की तुलना में कोविड प्रतिबंध खुलने के बाद नियुक्तियां दोगुनी बढ़ गई हैं।
- UP और तमिलनाडु में डिफेंस कॉरिडोर बना रहे हैं, जिस तरह से MSME क्षेत्र के लोग डिफेंस सेक्टर में आ रहे हैं ये उत्साहवर्धक है और दिखाता है कि देश के लोगों में सामर्थ्य है। देश को डिफेंस के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए MSME के लोग बहुत साहस जुटा रहे हैं।
- इस कोरोना काल में 80 करोड़ से भी अधिक देशवासियों के लिए इतने लंबे कालखंड के लिए मुफ़्त में राशन की व्यवस्था की गई, ताकि ऐसी स्थिति कभी पैदा न हो कि उनके घर का चूल्हा न जले। भारत ने ये काम करके दुनिया के सामने एक उदाहरण प्रस्तुत किया है।
- श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी ने लिखा था
व्याप्त हुआ बर्बर अंधियारा
किंतु चीर कर तम की छाती
चमका हिंदुस्थान हमारा।
शत-शत आघातों को सहकर
जीवित हिंदुस्थान हमारा।
जग के मस्तक पर रोली सा
शोभित हिंदुस्थान हमारा।
अटल जी के शब्द आज के इस कालखंड में भारत के सामर्थय का परिचय कराते हैं।
- COVID के दौरान, बहुत सारी बाधाओं के बावजूद, हमने गरीबों और जरूरतमंदों को घर उपलब्ध कराने के लिए काम करना जारी रखा।
- आज देश आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है - अपनी आजादी के 75 साल। राष्ट्र को दिशा देने के लिए कई प्रयास और प्रयास किए गए हैं। नई पहल की गई है, जबकि अच्छी पहल जारी है।
- आज मेड इन इंडिया कोविड वैक्सीन दुनिया में सबसे प्रभावी है। आज भारत शत प्रतिशत पहली डोज के लक्ष्य के निकट पहुंच रहा है और लगभग 80% दूसरी डोज का पड़ाव भी पूरा कर लिया है।
- रक्षा सौदों में बड़ी-बड़ी ताकतें पहले अच्छे अच्छों को खरीद लेती थी। ऐसी ताकतों को मोदी ने चुनौती दी है।
- कांग्रेस पार्टी की सत्ता में आने की इच्छा खत्म हो चुकी है, लेकिन जब कुछ मिलने वाला नहीं है तो कम से कम बिगाड़ तो दो, इस फिलॉसफी पर आज कांग्रेस चल रही है।
- राष्ट्र कोई सत्ता या सरकार की व्यवस्था नहीं है। हमारे लिए राष्ट्र एक जीवित आत्मा है।
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