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PM Modi 23-Year Journey: गुजरात से लेकर दिल्ली तक लोकसेवा, संवैधानिक पद पर पीएम मोदी ने पूरे किए 23 साल

PM Narendra Modi 23-Year Journey: गुजरात के मुख्यमंत्री और फिर देश के प्रधानमंत्री के रूप में सार्वजनिक जीवन में पीएम नरेंद्र मोदी के 23 साल पूरे होने पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि यह लंबी यात्रा उन लोगों के लिए जीवंत प्रेरणा है जो जनसेवा में लगे हैं

Akhileshअपडेटेड Oct 07, 2024 पर 4:30 PM
PM Modi 23-Year Journey: गुजरात से लेकर दिल्ली तक लोकसेवा, संवैधानिक पद पर पीएम मोदी ने पूरे किए 23 साल
PM Narendra Modi 23-Year Journey: साल 2001 में 7 अक्टूबर को नरेन्द्र मोदी ने राज्य के 14वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी

PM Narendra Modi 23-Year Journey: गुजरात के मुख्यमंत्री और फिर भारत के प्रधानमंत्री के रूप में सार्वजनिक जीवन में पीएम नरेंद्र मोदी के 23 साल पूरे हो गए हैं। पीएम मोदी सोमवार यानी 7 अक्टूबर 2024 को सत्ता के शीर्ष पर अपने 23 साल पूरे किए। पीएम मोदी ने 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी। 2014 में प्रधानमंत्री बनने से पहले वह 13 साल तक इस पद पर बने रहे। उन्होंने इस साल जून में लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री के रूप में कार्यभार संभाला। पिछले 23 वर्षों में प्रधानमंत्री मोदी का नेतृत्व परिवर्तन का प्रतीक रहा है। उन्होंने पहले गुजरात को पुनर्जीवित किया और फिर भारत को प्रगति के अभूतपूर्व पथ पर अग्रसर किया।

पहले 13 साल तक गुजरात के मुख्यमंत्री का पद संभाला तो पिछले लगभग साढ़े 10 साल से प्रधानमंत्री का पद संभाल रहे हैं। मुख्यमंत्री रहते पीएम मोदी ने गुजरात को देश में नई पहचान दिलाई तो प्रधानमंत्री रहते दुनिया में देश का नाम रोशन किया। दो दशक से अधिक के अपने कार्यकाल में पीएम मोदी की पहचान पहले राज्य को देश में सबसे आगे ले जाने फिर देश को दुनिया में सबसे आगे ले जाने वाले प्रशासक के तौर पर हुई। 23 साल के इस सेवाकाल के दौरान पीएम मोदी को दुनियाभर के तमाम देशों द्वारा अनेक सर्वोच्च पुरस्कार भी मिलें।

गुजरात को संकट से निकाला

1980 के दशक के मध्य में गुजरात ने 1985 से 1987 तक लगातार तीन सूखे के साथ एक अभूतपूर्व संकट का सामना किया। उस वक्त राज्य की स्थिति काफी भयावह थी। 18,000 गांवों में से 11,000 में पीने का पानी नहीं था। घास के मैदानों की कमी के कारण हजारों पशु मर गए। साथ ही फसलें खराब होने के कारण लोग बेहतर अवसरों की तलाश में राज्य से बाहर जाने लगे। गुजरात की अर्थव्यवस्था लगभग ध्वस्त हो गई थी, क्योंकि कृषि संकट ने ग्रामीण आजीविका को पंगु बना दिया था।

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