केंद्र सरकार ने चंडीगढ़ को पंजाब से छीना, रिटायरमेंट की उम्र बढ़ाने सहित किए कई ऐलान

अमित शाह ने कहा कि केंद्र शासित क्षेत्र में कर्मचारियों की रिटायरमेंट की उम्र 58 साल से बढ़ा कर 60 साल कर दी गई है

अपडेटेड Mar 28, 2022 पर 2:45 PM
अमित शाह का ऐलान, चंडीगढ़ पर पंजाब सरकार नहीं केंद्र का शासन चलेगा

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को कहा कि चंडीगढ़ केंद्र शासित क्षेत्र प्रशासन के कर्मचारियों की सेवा शर्तें अब केंद्रीय सिविल सेवाओं के अनुरूप होंगी और इसका उन्हें बड़े पैमाने पर फायदा होगा। उन्होंने यह भी कहा कि महिला कर्मचारियों को शिशु की देखभाल के लिए मौजूदा एक साल के अवकाश की जगह अब दो साल का अवकाश मिलेगा। इसके अलावा अब यहां के कर्मचारियों की रिटायरमेंट की उम्र 58 की जगह 60 हो जाएगी।

हालांकि, चंडीगढ़ के सरकारी कर्मचारियों पर केंद्रीय नियम लागू करने को लेकर राजनीतिक घमासान मच गया है। गृह मंत्री अमित शाह द्वारा चंडीगढ़ प्रशासन के तहत सभी कर्मचारियों के लिए केंद्रीय सिविल सेवा नियम लागू करने की घोषणा के एक दिन बाद पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सोमवार को कहा कि उनकी सरकार चंडीगढ़ पर अपने जायज दावे के लिए मजबूती से लड़ेगी।


CM भगवंत मान ने एक ट्वीट कर कहा कि केंद्र सरकार सिलसिलेवार तरीके से दूसरे राज्यों के अधिकारियों और कर्मचारियों को चंडीगढ़ पर थोप रही है। केंद्र का नया फैसला पंजाब पुनर्गठन एक्ट 1966 की भावना के खिलाफ है। चंडीगढ़ पर जायज हक के लिए पंजाब मजबूती से लड़ेगा।

अमित शाह ने क्या ऐलान किया?

अमित शाह ने रविवार को कहा कि मैं चंडीगढ़ प्रशासन के कर्मचारियों को एक अच्छी खबर देना चाहता हूं। आज से, चंडीगढ़ प्रशासन के कर्मचारियों की सेवा शर्तें केंद्रीय सिविल सेवा के अनुरूप होंगी। आपको (कर्मचारियों को) काफी फायदा होने जा रहा है। केंद्रीय गृह मंत्री ने चंडीगढ़ पुलिस की कई परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करने के बाद यह घोषणा की।

शाह ने कहा कि केंद्र शासित क्षेत्र में कर्मचारियों की रिटायरमेंट की उम्र 58 साल से बढ़ा कर 60 साल कर दी गई है। कर्मचारियों के लिए घोषणा पर उन्होंने कहा कि यह चंडीगढ़ प्रशासन के कर्मचारियों की लंबे समय से की जा रही मांग थी। आज, मोदी सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। उन्होंने कहा कि कल एक अधिसूचना जारी की जाएगी और आगामी वित्त वर्ष (एक अप्रैल से) आपको फायदा मिलेगा।

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गृह मंत्री शाह ने मादक पदार्थ के मुद्दे पर कहा कि यह कश्मीर से लेकर चंड़ीगढ़ और हरियाणा तक एक प्रमुख मुद्दा है। उन्होंने कहा कि अगले दो-तीन वर्षों में मादक पदार्थ के खिलाफ अभियान तेज किया जाएगा। उन्होंने जांच और डेटा भंडारण तथा विश्लेषण में टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल पर जोर देते हुए कहा कि जब तक ऐसा नहीं होगा, तब तक अपराध पर लगाम लगाना असंभव है।

विपक्ष ने की आलोचना

हालांकि, शाह की घोषणा की शिरोमणि अकाली दल नेता दलजीत सिंह चीमा ने एक ट्वीट में आलोचना करते हुए कहा कि केंद्र सरकार के नियमों को चंडीगढ़ के कर्मचारियों पर थोपने का गृह मंत्रालय का फैसला पंजाब पुनर्गठन अधिनियम की भावना का उल्लंघन है और इसपर पुनर्विचार किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि इसका मतलब पंजाब को हमेशा के लिए राजधानी के अधिकार से वंचित करना है। भाखड़ा व्यास प्रबंधन बोर्ड नियमों में बदलाव के बाद यह पंजाब के अधिकारों पर एक और कुठाराघात है।

वहीं, कांग्रेस नेता सुखपाल सिंह खैरा ने भी इस फैसले की निंदा की। उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ पर नियंत्रण और पंजाब के अधिकारों को हड़पने के बीजेपी के तानाशाही फैसले की हम कड़ी निंदा करते हैं।

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