Ram Mandir: 32 साल पुराना सपना, सिर्फ तीन साल में पूरा! राम मंदिर के लिए PM मोदी ने क्या कुछ नहीं किया

Ram Mandir Inauguration: इतिहास के पन्नों को पलट कर देखें, तो RSS प्रचारक मोदी ने अपना राजनीतिक करियर 1987 में शुरू किया, जब उन्हें गुजरात में संगठन के सचिव के रूप में BJP में प्रतिनियुक्त किया गया। मोदी को लोकप्रियता मिलने में भी ज्यादा देर नहीं लगी और इसी का नतीजा था कि पार्टी को उसी साल अहमदाबाद नगर निगम में दो-तिहाई बहुमत हासिल करने में मदद मिली

अपडेटेड Jan 03, 2024 पर 6:30 AM
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Ram Mandir: 32 साल पुराना सपना, सिर्फ तीन साल में हुआ पूरा, राम मंदिर के लिए PM मोदी ने क्या कुछ नहीं किया

Ram Mandir Inauguration: आखिरकार अब वो दिन जल्द ही आने वाला है, जब भगवान राम अपने भव्य मंदिर में विराजमान होंगे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) 22 जनवरी को अपने हाथों से रामलला की प्राण प्रतिष्ठा करेंगे। इस उस एतिहासिक यात्रा का सुखद सामापन होगा, जो तीन दशक पहले शुरू हुई थी। सितंबर 1990 में लालकृष्ण आडवाणी की देशव्यापी रथयात्रा के आयोजक के रूप में अपनी पारी के अलावा, नरेंद्र मोदी अपने गृह राज्य गुजरात में भी राम जन्मभूमि आंदोलन में एक बड़ा चेहरा थे। गुजरात को "हिंदुत्व की प्रयोगशाला" के रूप में भी जाना जाता था।

इतिहास के पन्नों को पलट कर देखें, तो RSS प्रचारक मोदी ने अपना राजनीतिक करियर 1987 में शुरू किया, जब उन्हें गुजरात में संगठन के सचिव के रूप में BJP में प्रतिनियुक्त किया गया। मोदी को लोकप्रियता मिलने में भी ज्यादा देर नहीं लगी और इसी का नतीजा था कि पार्टी को उसी साल अहमदाबाद नगर निगम में दो-तिहाई बहुमत हासिल करने में मदद मिली।

इसके बाद उन्होंने राज्य में राम मंदिर आंदोलन को लोकप्रिय बनाने के लिए ऑन्कोलॉजिस्ट से VHP नेता बने प्रवीण तोगड़िया के साथ मिलकर काम किया, जो उनके बेहद करीबी दोस्त भी रहे।


मोदी ने ही VHP को एक धार्मिक कार्यक्रम को राजनीतिक मुद्दा बनाने में भी मदद की। 1989 में, उन्होंने VHP को रामशिला पूजन आयोजित करने में मदद की, जहां उन्होंने प्रस्तावित राम मंदिर के लिए राज्य के हजारों गांवों के लोगों की तरफ से दान की गई ईंटें इकट्ठा कीं।

'आंदोलन में नरेंद्रभाई के भाषण प्रेरणादायक'

गुजरात बीजेपी के भी कई नेताओं का मानना है कि 'राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान गुजरात में नरेंद्रभाई के भाषण प्रेरणादायक थे और उनकी योजना सावधानीपूर्वक थी।' उनके लोकप्रिय भाषणों में से एक, 'लोक अदालत में अयोध्या' की कैसेट की हजारों कॉपियां बिकीं।

जल्द ही, मोदी-तोगड़िया की जोड़ी के कार्यों ने राजनीतिक लाभ भी देना शुरू कर दिया, जिससे BJP को कम समय में अपने लिए एक मंच बनाने में मदद मिली।

VHP-BJP के संयुक्त 'राम आक्रमण' ने कांग्रेस के कई पारंपरिक गढ़ ढहा दिए। 1989 के लोकसभा चुनाव में हारने वाले प्रमुख उम्मीदवारों में कांग्रेस के अहमद पटेल थे, जो अपने गढ़ भरूच में हिंदुत्व की लहर से प्रभावित थे।

इस आंदोलन ने गुजरात के भरूच क्षेत्र में गहरी भगवा नींव रखी, जिसका लाभ पार्टी को आज भी मिलता है। मोदी ने गुजरात में पार्टी के उत्थान में एक बड़ी भूमिका निभाई, आखिरकार, उन्होंने बीजेपी को वहां अजेय बना दिया। नतीजा ये है कि 1995 से राज्य पर BJP का कब्जा है।

सितंबर 1990 में शुरू हुई आडवाणी की रथयात्रा में मोदी की अहम भूमिका सभी के सामने है। एंडी मैरिनो ने अपनी 2014 में लिखी किताब, नरेंद्र मोदी: ए पॉलिटिकल बायोग्राफी में लिखा है, 'एक बार फिर, मोदी ने अपनी सावधानीपूर्वक और सोच-समझकर की गई संपूर्णता के साथ 600 गांवों के माध्यम से यात्रा के गुजरात चरण का आयोजन किया, और मुंबई तक इसे फॉलो किया।'

राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान, मोदी ने आंदोलन के लिए समर्थन जुटाने के लिए गुजरात के दर्जनों गांवों का दौरा किया। 1991 में उन्होंने गुजरात में राम मंदिर के लिए VHP की तरफ से चलाए गए हस्ताक्षर अभियान में अहम भूमिका निभाई।

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हालांकि, 6 दिसंबर, 1992 को बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद देशव्यापी दंगे और 2002 के गुजरात दंगे ने मंदिर के प्रति उनके दृष्टिकोण में एक साफ बदलाव ला दिया। दंगों के दौरान मोदी ही गुजरात के मुख्यमंत्री थे।

सरकार में रहने के उनके अनुभव ने भी इसमें भूमिका निभाई। अब नए मोदी राम मंदिर मुद्दे का संवैधानिक समाधान चाहते थे, जिसे आखिरकार उनकी सरकार ने साल 2019 में सुविधाजनक बनाने में मदद की, जब सुप्रीम कोर्ट ने 8 नवंबर 2019 को अपना सर्वसम्मत फैसला सुनाया।

तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अगुवाई वाली शीर्ष अदालत की पीठ ने विवादित 2.77 एकड़ प्लॉट को मंदिर निर्माण के लिए राम जन्मभूमि न्यास को सौंपने के पक्ष में फैसला सुनाया। मामले में मुस्लिम अपीलकर्ताओं को मुआवजे के रूप में मस्जिद के लिए अयोध्या में कहीं और पांच एकड़ जमीन दी गई थी।

बस फिर क्या था सरकार ने बड़े ही जोर-शोर से मंदिर निर्माण के लिए पहला कदम बढ़ाया और 5 फरवरी 2020 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अयोध्या में मंदिर निर्माण के लिए राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की घोषणा की। इसके ठीक छह महीने बाद 5 अगस्त 2020 को अयोध्या में राम मंदिर की आधारशिला रखी गई, जिसमें PM मोदी खुद शामिल हुए। अब 22 जनवरी 2024 को मंदिर में भगवान राम की प्राण प्रतिष्ठा होगी, जिसके बाद मंदिर लोगों के लिए खुल जाएगा।

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