Sonam Wangchuk Released: जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक और लद्दाख से उनके समर्थकों को बुधवार (2 अक्टूबर) शाम 36 घंटे की हिरासत के बाद रिहा कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने उन्हें उनकी चिंताओं को दूर करने के लिए जल्द ही राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री से मुलाकात का आश्वासन दिया है। हिरासत से रिहा होने के बाद वांगचुक और उनके समर्थकों ने राजघाट में महात्मा गांधी की समाधि पर उन्हें श्रद्धांजलि दी। इसी के साथ उन्होंने अपना अनशन भी समाप्त कर दिया है। सोमवार 1 अक्टूबर की रात को सिंघू सीमा पर दिल्ली पुलिस ने वांगचुक और उनके 150 साथी प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया, जब वे अपनी 'दिल्ली चलो पदयात्रा' के तहत राष्ट्रीय राजधानी में प्रवेश कर रहे थे।
दिल्ली पुलिस ने लद्दाख स्थित जलवायु कार्यकर्ता की हिरासत के पीछे 6 अक्टूबर तक दिल्ली की सीमाओं पर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू होने का हवाला दिया। वांगचुक ने बताया कि उनके समूह ने अपनी मांगों को सूचीबद्ध करते हुए सरकार को एक ज्ञापन सौंपा है। उन्होंने बताया कि हमें जल्द शीर्ष नेतृत्व के साथ बैठक करने का आश्वासन दिया गया है।
वांगचुक ने बताया कि हमने अपना अनशन खत्म कर दिया है। पीटीआई के मुताबिक उन्होंने महात्मा गांधी की समाधि पर श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद पत्रकारों से कहा, "हमने सरकार को एक ज्ञापन सौंपा है कि लद्दाख के लिए ऐसे प्रावधान किए जाएं जिससे इसकी पारिस्थितिकी को संरक्षित किया जा सके और इस प्रावधान के लिए छठी अनुसूची है, जो स्थानीय लोगों को संसाधनों पर शासन और प्रबंधन का अधिकार देती है।"
वांगचुक ने कहा, "हिमालय में स्थानीय लोगों को सशक्त बनाया जाना चाहिए, क्योंकि वे ही इसका सबसे अच्छी तरह संरक्षण कर सकते हैं।" उन्होंने कहा, "जैसा कि गृह मंत्रालय ने हमें आश्वासन दिया है इसलिए आने वाले दिनों में हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मिलेंगे।"
1 सितंबर से शुरू होकर वांगचुक और अन्य लोगों ने लेह से नई दिल्ली तक पैदल मार्च शुरू किया। इसका मकसद था कि केंद्र से उनकी मांगों के संबंध में लद्दाख के नेतृत्व के साथ बातचीत फिर से शुरू करने का आग्रह किया जा सके। उनकी प्रमुख मांगों में से एक लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करना है। इससे स्थानीय लोगों को अपनी भूमि और सांस्कृतिक पहचान की रक्षा के लिए कानून बनाने की शक्ति मिल सके।
हिरासत से रिहा होने के बाद मीडिया से बात करते हुए, वांगचुक ने कहा, "लद्दाख के लिए, भारतीय संविधान की अनुसूची 6 आदिवासी और स्थानीय लोगों को सुरक्षा प्रदान करती है, जिससे उन्हें क्षेत्र के प्रबंधन और शासन पर अधिकार मिलता है। मुझे गृह मंत्रालय द्वारा आश्वासन दिया गया है कि आने वाले दिनों में, मैं भारत के सर्वोच्च नेतृत्व-प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति या गृह मंत्री से मिलूंगा। मैंने राज्य के दर्जे और अनुसूची 6 के कार्यान्वयन के माध्यम से लोकतंत्र की बहाली का आह्वान किया है।"
विपक्ष ने की केंद्र की आलोचना
कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने मंगलवार को दिल्ली पुलिस द्वारा सिंघु बॉर्डर पर जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक और उनके समर्थकों को हिरासत में लिए जाने की आलोचना करते हुए इसे अस्वीकार्य बताया। वहीं, आप नेता और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी जलवायु कार्यकर्ता को हिरासत में लिए जाने की आलोचना की और लोगों को राष्ट्रीय राजधानी में प्रवेश करने से रोकना पूरी तरह से गलत बताया।