सुप्रीम कोर्ट ने PMLA के तहत ED को मिले सभी अधिकारों को बरकरार रखा, कहा- 'मनी लॉन्ड्रिंग के तहत गिरफ्तारी मनमानी नहीं'

प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉड्रिंग एक्ट ( PMLA) के तहत ED द्वारा की गई गिरफ्तारी, जब्ती और जांच की प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने यह अहम फैसला सुनाया

अपडेटेड Jul 27, 2022 पर 12:07 PM
सुप्रीम कोर्ट ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के प्रावधानों को बरकरार रखा है

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के सभी प्रावधानों को बरकरार रखा रखा है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को PMLA के विभिन्न प्रावधानों को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) के गिरफ्तारी के अधिकार को बरकरार रखा है। शीर्ष अदालत ने साफ तौर पर कहा कि मनी लॉन्ड्रिंग के तहत गिरफ्तारी मनमानी नहीं है।

कोर्ट ने PMLA के उन प्रावधानों की वैधता को कायम रखा है, जिनके खिलाफ आपत्तियां लगाई गई थीं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ईडी को समन भेजने या गिरफ्तार करने का अधिकार है। PMLA के तहत ED द्वारा की गई गिरफ्तारी, जब्ती और जांच की प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला सुनाया।

सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक, ईडी द्वारा जांच, गिरफ्तारी, संपत्ति को अटैच करना, रेड डालना और बयान लेने का अधिकार बरकरार रहेगा। साथ ही कोर्ट ने कहा है कि जांच के दौरान ED, SFIO, DRI अधिकारियों (पुलिस अफसर नहीं) के सामने दर्ज बयान भी वैध सबूत माने जाएंगे। साथ ही बेंच ने यह भी कहा कि आरोपी को ECIR (शिकायत की कॉपी) देना भी जरूरी नहीं है।


शीर्ष अदालत ने अपने आदेश में कहा कि यह काफी है कि आरोपी को यह बता दिया जाए कि उसे किन आरोपों के तहत गिरफ्तार किया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि शिकायत ECIR को FIR के बराबर नहीं माना जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि ये ED का इंटरनल डॉक्यूमेंट है। शीर्ष अदालत ने कहा कि ECIR रिपोर्ट आरोपी को देना जरूरी नहीं है। गिरफ्तारी के दौरान केवल कारण बता देना ही काफी है।

दरअसल, पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री पी चिदंबरम के बेटे कार्ति चिंदबरम, महाराष्‍ट्र सरकार के पूर्व मंत्री अनिल देशमुख, जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती समेत 242 याचिकाकर्ताओं ने PMLA के तहत ED द्वारा की गई गिरफ्तारी, जब्ती और जांच की प्रक्रिया को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।

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