Get App

1999 के कंधार विमान अपहरण ने साबित कर दिया कि आतंक के मुद्दे पर भी सभी राजनीतिक पार्टियों में सहमति मुमकिन नहीं

क्यों नहीं बन पाता सभी दलों में तालमेल: खुद वाजपेयी मंत्रिमंडल के सदस्य जसवंत सिंह और प्रमोद महाजन कंधार अपहरण के समय आपस में तू -तू मैं- मैं कर रहे थे। महाजन की शिकायत थी कि जसवंत जल्दी मसूद अजहर को लेकर कंधार क्यों नहीं जा रहे हैं।

Surendra Kishoreअपडेटेड Jan 08, 2023 पर 8:07 AM
1999 के कंधार विमान अपहरण ने साबित कर दिया कि आतंक के मुद्दे पर भी सभी राजनीतिक पार्टियों में सहमति मुमकिन नहीं
केंद्र सरकार की सबसे बड़ी विफलता यह थी कि वह उस विमान को अमृतसर में अपने कब्जे में नहीं कर सकी

कंधार विमान अपहरण के समय पहले तो "किसी भी कीमत पर" बंधकों की रिहाई पर दलों के बीच आम सहमति बन गई थी। पर, केंद्र सरकार ने जब एक कीमत देकर बंधकों को रिहा करवा दिया तो बाद में कई राजनीतिक दल अपनी बात से पलट गए। क्योंकि उस दुर्भाग्यपूर्ण घटना से दलों ने राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश की। अब तो लगता है कि इस तरह के मामलों में इस देश के राजनीतिक दलों की यही फितरत बन चुकी है। यह देश की सुरक्षा के लिए खतरे की घंटी है। चिंताजनक बात यह है कि ऐसी राजनीति देश की सीमाओं की रक्षा के मामलों में भी होती रहती है। मुंबई के ताज होटल पर सन 2008 में हुए आतंकी हमले के समय भी यही हुआ।

सीमा पर चीन की ताजा खुराफातों को लेकर भी इस देश में आज भी कोई आम सहमति नहीं बन पा रही है। इसका लाभ हमारे दुश्मन उठाते रहते हैं। इस पृष्ठभूमि में कंधार विमान अपहरण प्रकरण को एक बार फिर याद करना मौजूं होगा। अपहरण सन 1999 के दिसंबर में हुआ था। कंधार अपहरण कांड यह बताता है कि हमारे हुक्मरान अपनी गलतियों से सीखने के लिए कत्तई तैयार नहीं हैं। पाकिस्तान समर्थित कश्मीरी आतंकवादियों ने 24 दिसंबर,1999 को इंडियन एयर लाइंस के विमान- 814 का अपहरण कर लिया। उसे वे कंधार यानी अफगानिस्तान ले गए।

तब भी वह देश तालिबानियों के कब्जे में था।उस विमान के 152 यात्रियों को आतंकियों ने बंधक बना लिया।कई दिनों के शर्मनाक ड्रामे के बाद हरकत उल अंसार के मौलाना मसूद अजहर तथा कुछ अन्य आतंकियों को रिहा करने के बदले में अपहृत विमान के बंधक यात्रियों को छुड़ा लिया गया। आतंकियों को अपने साथ लेकर तत्कालीन विदेश मंत्री जसवंत सिंह कंधार गए थे।

इससे पहले 27 दिसंबर 1999 को दिल्ली में प्रधान मंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने सर्वदलीय बैठक बुलाई थी। उस बैठक में यह सहमति बनी थी कि बंधक यात्रियों को किसी भी कीमत पर बचाना है। पर जब कीमत दे दी गई तो उन्हीं दलों के नेतागण समय -समय पर भाजपा और जसवंत सिंह पर यह ताने मारते रहते हैं कि "आप भी तो मसूद अजहर को साथ लेकर कंधार गए थे।"

सब समाचार

+ और भी पढ़ें