UP Election Result 2022: उत्तर प्रदेश में BJP की लगातार दूसरी बार धमाकेदार जीत ने ये तो साबित कर ही दिया है कि फिलहाल उसका कोई विकल्प नहीं है। इसके साथ ही साथ ही समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और कांग्रेस के लिए ये सवाल और गंभीरता से खड़ा हो गया है कि उनका भविष्य क्या होगा। इन नतीजों से पहले यह माना जा रहा था कि मुख्य विपक्षी दल यानी समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव अपने मुस्लिम-यादव वोटबैंक के सहारे कड़ी टक्कर देंगे।
उत्तर प्रदेश चुनाव के इन नतीजों से एक बात तो साफ है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सीएम योगी आदित्यनाथ के मैजिक के आगे अखिलेश का फॉर्मूला फेल हो गया है।
अखिलेश का MY समीकरण कैसे हुआ फेल
अखिलेश यादव का मुस्लिम-यादव वोटबैंक मजबूत बना हुआ है। लेकिन BJP के MY समीकरण (महिलाएं और सरकारी योजनाएं) के आगे यह काम नहीं कर पाया। अपने इसी MY समीकरण के सहारे BJP यूपी की गद्दी दोबारा संभालती नजर आ रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, लोगों को योगी आदित्यनाथ सरकार से शिकायतें तो थीं, लेकिन राज्य में कानून-व्यवस्था की लगभग सभी लोग तारीफ कर रहे थे। BJP के लिए यह सुधरी कानून-व्यवस्था महिला वोटरों को अपने पक्ष में करने में बड़ा हथियार साबित हुई है।
अखिलेश के लिए राहत की बात
समाजवादी पार्टी के लिए ये बेशक एक राहत की बात है कि वह पिछली बार की अपनी 47 सीटों से बढ़कर 100 से ऊपर पहुंच गई है। निश्चित तौर पर इस बार एक मजबूत विपक्ष के तौर पर वह सरकार पर दबाव बनाने की स्थिति में नजर आ सकती है। छोटी पार्टियों से गठबंधन के अखिलेश यादव के फार्मूले ने काम तो किया लेकिन उसके लिए BSP और कांग्रेस का साथ न आना या उन्हें दूर रखना नुकसानदेह साबित हुआ।
उत्तर प्रदेश में BSP और कांग्रेस का क्या होगा भविष्य
इन सबके बीच एक शोध का विषय बनता जा रहा है कि BSP और कांग्रेस यूपी में भविष्य क्या होगा। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने इस चुनाव में खूब मेहनत की, नए सिरे से प्रदेश में कांग्रेस को पटरी पर लाने में जी जान लगा दिया, लेकिन सीटें पिछली बार के मुकाबले 4 और कम हो गई। 7 से सिमट कर वो 3 पर आ गई। यही हाल बहुजन समाज पार्टी का भी है। BSP तो अपना दल जैसे छोटी राजनीतिक पार्टियों से भी पिछड़ गई है। जाहिर है यूपी में अब इन दोनों पार्टियों के लिए फिर से खड़ा हो पाना आसान नहीं है। ऐसे में आने वाले वक्त में अगर कुछ उम्मीद है तो वह समाजवादी पार्टी से ही है, बशर्ते की वह अपनी अगली रणनीति के लिए अभी से मेहनत करे और कम से कम 2024 के लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखकर भाजपा को मजबूत टक्कर दे सके। फिलहाल इस रोमांचक मैच के मुकाबले विपक्ष यह सोचने के लिए मजबूर हो गया है कि आखिर उसकी गलती कहां हुई है।