Get App

क्या है CAA? मोदी सरकार ने लोकसभा चुनाव से पहले किया लागू, नागरिकता कानून को लेकर क्यों मचा था बवाल?

CAA Rules: इस बीच, पिछले दो सालों में, नौ राज्यों के 30 से ज्यादा जिला मजिस्ट्रेटों और गृह सचिवों को नागरिकता कानून 1955 के तहत अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से आने वाले हिंदुओं, सिखों, बौद्धों, जैनियों, पारसियों और ईसाइयों को भारतीय नागरिकता देने की शक्तियां दी गई हैं। दिलचस्प बात यह है कि असम और पश्चिम बंगाल के किसी भी जिले के अधिकारियों को अब तक ये अधिकार नहीं दिए गए हैं

Shubham Sharmaअपडेटेड Mar 11, 2024 पर 7:11 PM
क्या है CAA? मोदी सरकार ने लोकसभा चुनाव से पहले किया लागू, नागरिकता कानून को लेकर क्यों मचा था बवाल?
क्या है नागरिकता संशोधन कानून CAA?

केंद्र की मोदी सरकार ने लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Elections 2024) से ठीक पहले नागरिकता (संशोधन) अधिनियम (CAA), 2019 लागू करने की घोषणा कर दी। गृह मंत्रालय (MHA) ने CAA का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है, यानि इस नए कानून के नियम अब देशभर में लागू होंगे। CAA नियम जारी किए जाने के बाद, बगैर दस्तावेज के पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश से आये हिंदुओं, सिखों को नागरिकता मिलेगी।

27 दिसंबर, 2023 को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि CAA के कार्यान्वयन को कोई नहीं रोक सकता, क्योंकि यह देश का कानून है और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर इस मुद्दे पर लोगों को गुमराह करने का आरोप लगाया।

केंद्र सरकार ने पिछले दो साल में नौ राज्यों को पुराने कानून के तहत ही नागरिकता देने की शक्तियां दी हैं। ये नौ राज्य, जहां पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के गैर-मुस्लिम अल्पसंख्यकों को नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत रजिस्ट्रेशन या नेचुरलाइजेशन के जरिए भारतीय नागरिकता दी जाती है, वे हैं गुजरात, राजस्थान, छत्तीसगढ़, हरियाणा, पंजाब, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और महाराष्ट्र।

दिलचस्प बात यह है कि असम और पश्चिम बंगाल के किसी भी जिले के अधिकारियों को अब तक ये अधिकार नहीं दिए गए हैं, जहां यह मुद्दा राजनीतिक रूप से बहुत संवेदनशील है।

सब समाचार

+ और भी पढ़ें