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शेर को हराने वाला विदेशी पहलवान जब भारतीय पहलवान से डरा, किया कुश्ती से इनकार

जर्मनी का मशहूर पहलवान सैंडो एक बार भारत आया था। उसने राममूर्ति से कुश्ती लड़ने से इसलिए इनकार कर दिया क्योंकि राममूर्ति ने सैंडो की अपेक्षा अधिक वजन उठाकर दिखा दिया। याद रहे कि उससे पहले सैंडों ने एक बार अमेरिका में निहत्था लड़कर शेर को भी पराजित कर दिया था। राममूर्ति को आंध्र प्रदेश के लोग बड़े सम्मान से याद करते हैं। उनकी विशाल मूर्ति विशाखापत्तनम के बीच रोड पर लगी हुई है।

Surendra Kishoreअपडेटेड Jun 11, 2023 पर 5:23 PM
शेर को हराने वाला विदेशी पहलवान जब भारतीय पहलवान से डरा, किया कुश्ती से इनकार
राममूर्ति नायडू: इस देसी हर्क्युलीज़ के बारे में जानते हैं आप

मशहूर जर्मन पहलवान सैंडो ने भारत के "कलियुगी भीम" से कुश्ती लड़ने से इनकार कर दिया था। क्योंकि उससे पहले कलियुगी भीम राममूर्ति ने सैंडो के शरीर के वजन की अपेक्षा अधिक वजन उठाकर दिखा दिया था। याद रहे कि सैंडो भी कोई मामूली पहलवान नहीं था। सैंडो ने एक बार अमेरिका में निहत्था लड़कर शेर को भी पराजित कर दिया था। इस कलियुगी भीम का जन्म आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम जिले के वीराघट्टम गांव के एक साधारण परिवार में सन 1882 में हुआ था। सन 1942 में उनका निधन हो गया।

लंदन के राज भवन बकिंघम पैलेस में कोडा राममूर्ति नायडु का शारीरिक बल और कौशल देख कर जार्ज पंचम ने पहले तो उन्हें इंडियन हर्क्युलीज़ और बाद में इंडियन सैंडो की उपाधि दी थी। पर जब राममूर्ति ने शारीरिक बल के मामले में उन्हें महाभारतयुगीन भीम का महत्व बताया तो जार्ज पंचम ने उन्हें राजकीय समारोहपूर्वक "कलियुगी भीम" की उपाधि दी। साथ ही, गलत तुलना के लिए उन्होंने भी कहा। राममूर्ति ने दुनिया भर में अपने शारीरिक बल का लोहा मनवा दिया था।

जर्मनी का मशहूर पहलवान सैंडो एक बार भारत आया था। उसने राममूर्ति से कुश्ती लड़ने से इसलिए इनकार कर दिया क्योंकि राममूर्ति ने सैंडो की अपेक्षा अधिक वजन उठाकर दिखा दिया। याद रहे कि उससे पहले सैंडों ने एक बार अमेरिका में निहत्था लड़कर शेर को भी पराजित कर दिया था। राममूर्ति को आंध्र प्रदेश के लोग बड़े सम्मान से याद करते हैं। उनकी विशाल मूर्ति विशाखापत्तनम के बीच रोड पर लगी हुई है।

उनकी दूसरी मूर्ति उनके पैतृक जिला श्रीकाकुलम में भी लगी है। बचपन में मां के निधन हो जाने के कारण बालक राममूर्ति निरंकुश हो गया था। वह गांव के हमउम्र लड़कों की बुरी तरह पिटाई करता रहता था। इससे क्षुब्ध होकर पिता ने एक बार राममूर्ति की पिटाई कर दी।वह जंगल में जाकर छिप गया। एक सप्ताह बाद जब वह लौटा तो उसके साथ चीते का बच्चा था। वह उसे गर्दन पर उठाए गांव में घूमता रहता था। डर के मारे लोग उसे देखकर अपने घरों में छिप जाते थे। पिता ने परेशान होकर उसे अपने छोटे भाई नारायण स्वामी के पास विजयनगरम् भेज दिया। स्वामी वहां पुलिस निरीक्षक थे।

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