कौन हैं आतिशी: एक टीचर से दिल्ली की मुख्यमंत्री बनने तक का सफर, 10 साल बाद राजधानी को मिली कोई महिला CM

Atishi Delhi CM: सुल्तानपुर माजरा से पहली बार विधायक बने मुकेश अहलावत आतिशी कैबिनेट में शामिल हुए। उनके अलावा गोपाल राय, इमरान हुसैन, कैलाश गहलोत और सौरभ भारद्वाज। इन सभी ने नए मंत्री के तौर पर आतिशी के साथ शपथ ली। अगले चुनाव तक अब आतिशी ही दिल्ली की मुख्यमंत्री रहेंगी

अपडेटेड Sep 21, 2024 पर 5:26 PM
कौन हैं आतिशी: एक टीचर से दिल्ली की मुख्यमंत्री बनने तक का सफर

दिल्ली को तीसरी बार महिला मुख्यमंत्री मिल गई है। 10 साल बाद आतिशी के रूप में दिल्ली को महिला CM मिली। आतिशी ने शनिवार को राजभवन में पद और गोपनीयता का शपथ ली। सुषमा स्वाराज, शीला दीक्षित के बाद आतिशी दिल्ली की तीसरी महिला मुख्यमंत्री हैं। मंगलवार को आम आदमी पार्टी की विधायक दल की बैठक में अरविंद केजरीवाल ने सभी विधायकों की सर्वसम्मति से मंत्री आतिशी के नाम पर मोहर लगाई थी। आतिशी की पावर का मालूम इससे ही चलता है कि दिल्ली सरकार में उनके पास अकेले 14 मंत्रालय थे।

विधायक दल की बैठक के बाद मंत्री गोपाल राय ने मुख्यमंत्री आवास से बाहर आकर इस फैसले की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली के लोगों के लिए ये फैसला लिया है। उन्होंने कहा कि अगले चुनाव तक अब आतिशी ही दिल्ली की मुख्यमंत्री रहेंगी।

कौन हैं आतिशी?


रिपोर्टों से पता चलता है कि उनके पिता ने 'मार्क्स' और 'लेनिन' के अक्षरों को मिलाकर उनका नाम आतिशी मार्लेना रखा था। 2019 के लोकसभा चुनाव अभियान के दौरान, आतिशी ने इस चिंता के कारण अपने नाम से "मार्लेना" शब्द हटा दिया कि इससे ऐसा लग सकता है कि वह ईसाई धर्म से हैं। हालांकि, पंजाबी राजपूत परिवार से आने वाली आतिशी अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपना नाम सिर्फ 'आतिशी' लिखती हैं।

1981 में जन्मी आतिशी एक मजबूत एजुकेशन बैकग्राउंड वाली दिल्ली की मूल निवासी हैं। उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के सेंट स्टीफंस कॉलेज में इतिहास की पढ़ाई की और बाद में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से आगे की शिक्षा हासिल की।

अपने राजनीतिक सफर से पहले आतिशी आंध्र प्रदेश के ऋषि वैली स्कूल में इतिहास और अंग्रेजी पढ़ाया करती थीं।

आतिशी 2013 में AAP में शामिल हुईं और पॉलिसी मेकर में अहम भूमिका निभाई। आतिशी को 2019 के लोकसभा चुनाव में पूर्वी दिल्ली से पार्टी का उम्मीदवार चुना गया था। हालांकि, वह बीजेपी उम्मीदवार गौतम गंभीर से 4.77 लाख वोटों के अंतर से हार गईं।। इसके बाद 2020 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में कालकाजी निर्वाचन क्षेत्र से जीत हासिल की।

आतिशी ने पार्टी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिसमें 2020 के दिल्ली विधानसभा चुनावों के बाद गोवा इकाई का नेतृत्व करना भी शामिल है।

AAP में कितनी पावरफुल हैं आतिशी?

43 साल की आतिशी को दिल्ली सरकार के भीतर शिक्षा, वित्त, PWD, राजस्व और सेवाओं जैसे अलग-अलग विभागों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसी वजह से उन्हें केजरीवाल काफी नजदीक माना जाता है।

पिछले साल जून में एक फेरबदल के बाद, आतिशी को 14 विभाग सौंपे गए थे, जो AAP के किसी भी मंत्री के लिए सबसे ज्यादा है। इस अहम बंटवारे ने उन्हें केजरीवाल के मंत्रिमंडल में दूसरे नंबर का नेता बना दिया था, जिससे पार्टी और सरकार के भीतर उनके बढ़ते प्रभाव और जिम्मेदारियों के बारे में साफ पता चलता है।

मनीष सिसोदिया की सलाहकार भी रहीं

कालकाजी से विधायक और आम आदमी पार्टी की राजनीतिक मामलों की समिति के सदस्य के रूप में काम करते हुए, उन्होंने कई अहम जिम्मेदारियां निभाई हैं।

जुलाई 2015 से अप्रैल 2018 तक, उन्होंने दिल्ली के उपमुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया के सलाहकार के रूप में काम किया और दिल्ली सरकार के स्कूलों में शिक्षा की क्वालिटी बढ़ाने के मकसद से अलग-अलग पहल को लागू करने में बड़ी भूमिका निभाई है। 2015 में, उन्होंने मध्य प्रदेश के खंडवा में AAP नेता आलोक अग्रवाल के जल सत्याग्रह में सक्रिय रूप से हिस्सा लिया।

यह फैसला ED की ओर से अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी के बाद लिया गया है। कई लंबी चर्चाओं के बाद आतिशी को चुना गया, जिसमें कैलाश गहलोत के नाम पर भी विचार किया गया। केजरीवाल आज शाम करीब 4.30 बजे इस्तीफा दे देंगे और इसी के साथ आतिशी की ताजपोशी का समय भी तय किया जाएगा।

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