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सरदार पटेल ने आखिर क्यों कहा था कि भारत से अलग होकर पाकिस्तान जी नहीं सकेगा

कांग्रेस नेताओं ने सहज-सरल भाव से बंटवारे को स्वीकार नहीं किया था। कुछ ने क्रोध और रोष के वश में अन्यों ने तंग आकर उसे स्वीकार कर लिया था। जबकि सरदार पटेल बंटवारे के खिलाफ थे उनका मानना था कि भारत से पाकिस्तान को अलग करना गलत है

Surendra Kishoreअपडेटेड Mar 06, 2023 पर 8:24 AM
सरदार पटेल ने आखिर क्यों कहा था कि भारत से अलग होकर पाकिस्तान जी नहीं सकेगा
सरदार पटेल क्यों पाकिस्तान के बंटवारे के खिलाफ थे?

देश के विभाजन के वक्त सरदार वल्लभ भाई पटेल ने कहा था कि "नया देश पाकिस्तान जी नहीं पाएगा।" मौलाना अबुल कलाम आजाद के अनुसार, "उनका (यानी सरदार पटेल का) खयाल था कि पाकिस्तान की मांग मान लेने से मुस्लिम लीग को अच्छा-खासा सबक मिल जाएगा। थोड़े ही अरसे में पाकिस्तानी इमारत भरभरा कर ढह जाएगी और जो प्रांत हिंदुस्तान से अलग हो रहे हैं उन्हें बेहिसाब मुसीबतें और परेशानियां झेलनी पड़ेंगी।"

यह बात मौलाना अबुल कलाम आजाद ने अपनी पुस्तक "आजादी की कहानी" में लिखी है। मौलाना आजाद भारत के प्रथम शिक्षा मंत्री थे। वे देश के विभाजन के सख्त खिलाफ थे। चर्चित पुस्तक "आजादी की कहानी" में यह बात भी दर्ज है कि "सरदार पटेल ने भी खीझ कर बंटवारा स्वीकार किया। बंटवारे के ठीक पहले नेताओं और दलों के बीच क्या- क्या बातें हुई और कौन नेता क्या कह और कर रहा था,इस के बारे में मौलाना आजाद की टिप्पणियां जानना महत्वपूर्ण और मौजूं होगा।

ताजा माहौल में और भी मौजूं है जब पाकिस्तान एक बार फिर इतिहास के चैराहे पर खड़ा है। मौलाना ने लिखा था कि "देश का बंटवारा कांग्रेस ने भी स्वीकार किया और मुस्लिम लीग ने भी। चूंकि कांग्रेस सारे राष्ट्र की प्रतिनिधि संस्था थी और मुस्लिम लीग को मुसलमानों में काफी समर्थन प्राप्त था, इसलिए सामान्यतः इसका मतलब यही होना चाहिए कि सारे देश ने बंटवारा स्वीकार कर लिया। लेकिन वस्तुस्थिति इससे एकदम भिन्न थी। यह स्वीकृति बस कांग्रेस महा समिति के एक प्रस्ताव में और मुस्लिम लीग के अभिलेखों में ही निहित है। हिंदुस्तान के लोगों ने बंटवारे को स्वीकार नहीं किया था।"

"कांग्रेस नेताओं ने सहज-सरल भाव से बंटवारे को स्वीकार नहीं किया था। कुछ ने क्रोध और रोष के वश में अन्यों ने तंग आकर उसे स्वीकार कर लिया था। जब आदमी डर या रोष से अभिभूत हो जाता है तो वह किसी भी चीज को वस्तुपरक दृष्टि से नहीं परख पाता।फिर भाव के आवेश में काम करने वाले ये बंटवारे के हिमायती कैसे समझ पाते कि वे जो कुछ कर रहे हैं,उसके क्या-क्या नतीजे निकल सकते हैं?"

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