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पाकिस्तान से भ्रष्टाचार और कालाबाजार दूर करने का जिन्ना का सपना क्यों पूरा नहीं हो पाया

जिन्ना ने कहा था कि मैं सोचता हूं कि हम इसे आदर्श की तरह सामने रखें और आप पाएंगे कि भविष्य में हिंदू , हिंदू नहीं रहेंगे और मुसलमान, मुसलमान नहीं रहेंगे, जानिए जिन्ना ने क्यों कही थी ये बात

Surendra Kishoreअपडेटेड May 15, 2023 पर 6:56 AM
पाकिस्तान से भ्रष्टाचार और कालाबाजार दूर करने का जिन्ना का सपना क्यों पूरा नहीं हो पाया
अगर जिन्ना परलोक से आज के अस्तव्यस्त पाकिस्तान को देख रहे होंगे तो क्या सोच रहे होंगे?

पाकिस्तान की संविधान सभा के सदस्यों से मोहम्मद अली जिन्ना ने कहा था कि "किसी भी सरकार का पहला काम कानून-व्यवस्था बनाये रखना है। क्योंकि राज्य की तरफ से जनता के जीवन, संपत्ति और धार्मिक आस्था को पूरी तरह संरक्षित किया जाना जरूरी है।" उन्होंने यह भी कहा, "भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी सबसे बड़े अभिशाप हैं जिन्हें अविभाजित भारत भुगतता रहा है। दूसरे देशों में भी ये बुराइयां हैं, पर हमारी हालत ज्यादा बदतर है। ये सचमुच जहर हैं। हमें इनसे कठोर हाथों से निपटना चाहिए। मैं यह उम्मीद करता हूं कि इस सभा के सदस्यों के लिए जितना जल्दी संभव हो सके, आप इस दिशा में समुचित कदम उठाएंगे।"

अगर जिन्ना परलोक से आज के अस्तव्यस्त पाकिस्तान को देख रहे होंगे तो क्या सोच रहे होंगे ? यही कि "हमारे देश के हुक्मरानों ने हमारी कल्पना के देश को बर्बाद कर रखा है।" आज वास्तव में पाकिस्तान के हालात बेकाबू हो रहे हैं। जैसा इससे पहले कभी नहीं हुआ, वह सब आज हो रहा है। पड़ोसी देश होने के कारण भारत का भी चिंतित होना स्वाभाविक है। पर, आज पाकिस्तान में जिन्ना को कोई याद नहीं कर रहा है। वहां अतिवादी हावी हो रहे हैं। ऐसे में जिन्ना को याद करना मौजू होगा।

जिन्ना ने कालाबाजारियों के खिलाफ भी देशवासियों को चेताया था। उन्होंने कहा था कि "यह दूसरा अभिशाप है। मैं जानता हूं कि कालाबाजार करने वाले बार-बार पकड़े जाते हैं। दंडित किए जाते हैं। न्यायिक सजाएं सुनाई जाती हैं। या कभी-कभी जुर्माने भी किए जाते हैं। इस राक्षस से अब आपको निबटना है।" जिन्ना ने भ्रष्टाचार के साथ-साथ भाई भतीजावाद से भी दूर रहने की सलाह दी थी।

इधर आजादी के तत्काल बाद भारत के प्रधान मंत्री जवाहरलाल नेहरू ने भी कहा था कि कालाबाजारियों को करीब के लैम्पपोस्ट से लटका दिया जाना चाहिए। यानी, आजादी के बाद दोनों देशों के नेताओं ने जिन समस्याओं पर चिंता प्रकट की थी, दुर्भाग्य है कि वे समस्याएं आज तक हल नहीं हुईं। कमोबेश मौजूद हैं। अफसोसनाक बात यह है कि आजादी के इतने साल बाद भी हिंदुस्तान और पाकिस्तान के काला बाजारिए और भ्रष्ट तत्व आज नेहरू और जिन्ना की इन बातों को मुंह चिढ़ा रहे हैं।

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