Women Wrestler Case: बृजभूषण शरण सिंह को दिल्ली HC से बड़ा झटका, यौन उत्पीड़न मामले में दर्ज FIR को किया था चैलेंज

Women Wrestler Case: दिल्ली हाई कोर्ट ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह को उनके खिलाफ यौन उत्पीड़न मामले में दर्ज FIR और आरोप रद्द करने का अनुरोध वाली दलीलों पर नोट दाखिल करने का समय दिया है

अपडेटेड Aug 29, 2024 पर 12:52 PM
Women Wrestler Case: बृजभूषण शरण सिंह ने उनके खिलाफ दायर यौन उत्पीड़न मामले को खारिज करने की मांग की थी

Women Wrestler Case: भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के पूर्व प्रमुख बृजभूषण शरण सिंह को दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। उन्होंने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर यौन शोषण मामले में दर्ज FIR और चार्जशीट एवं निचली कोर्ट (राउज रेवन्यू) का आदेश रद्द करने की मांग की थी। हाई कोर्ट ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह को यौन उत्पीड़न मामले में दर्ज FIR और आरोप रद्द करने का अनुरोध वाली दलीलों पर नोट दाखिल करने का समय दिया है। उन्होंने महिला पहलवानों द्वारा उनके खिलाफ दायर यौन उत्पीड़न मामले को खारिज करने की मांग की थी।

जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने सिंह (Brij Bhushan Sharan Singh) द्वारा उनके खिलाफ आरोप तय करने के आदेश और पूरी कार्यवाही को चुनौती देने वाली एक ही याचिका दायर करने के फैसले पर सवाल उठाया। जज ने बृजभूषण शरण सिंह से पूछा कि वे किस आधार पर अपने खिलाफ महिला पहलवानों के कथित यौन उत्पीड़न से जुड़ी FIR को रद्द करने की मांग कर रहे हैं? मामले में सिंह के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोप तय हो चुके हैं। साथ ही ट्रायल कोर्ट अभियोजन के साक्ष्य दर्ज कर रही है।

इंडिया टुडे के मुताबिक, जस्टिस कृष्णा ने कहा, "यदि आरोप तय हो गए हैं तो गुण-दोष के आधार पर सब कुछ खारिज नहीं किया जा सकता।" अदालत ने मौखिक रूप से टिप्पणी करते हुए कहा, "हर चीज पर एक सर्वव्यापी आदेश नहीं हो सकता। यदि आप आरोप पर आदेश को रद्द करना चाहते थे, तो आप आ सकते थे। एक बार मुकदमा शुरू हो जाने के बाद, यह एक अप्रत्यक्ष तरीका है।"


FIR को बताया एजेंडा

बीजेपी नेता सिंह के वकील राजीव मोहन ने तर्क दिया कि एफआईआर दर्ज करने के पीछे एक छिपा हुआ एजेंडा था। उन्होंने दावा किया कि शिकायतकर्ता पहलवानों का सिंह को WFI अध्यक्ष के पद से हटाने का एक साझा मकसद था। हाई कोर्ट ने सिंह के वकील को यौन उत्पीड़न मामले को अलग रखने के लिए सभी तर्कों के साथ एक संक्षिप्त नोट तैयार करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया।

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हाई कोर्ट ने अगली सुनवाई 26 सितंबर को निर्धारित की है। अपनी याचिका में सिंह ने तर्क दिया कि उनके खिलाफ जांच पक्षपातपूर्ण थी। उन्होंने दावा किया कि इसमें केवल पीड़ितों के बयान पर विचार किया गया था, जिनके बारे में उनका आरोप है कि वे बदला लेने के लिए प्रेरित थे। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि आरोपों में कथित झूठ को संबोधित किए बिना चार्जशीट दायर किया गया था।

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