Puja Khedkar Case: गलत तरीके से अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) तथा दिव्यांग कोटा का लाभ हासिल करने की आरोपी चर्चित बर्खास्त IAS आधिकारी पूजा खेडकर को दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस को फिलहाल पूजा खेडकर को गिरफ्तार नहीं करने का आदेश दिया है। अदालत ने धोखाधड़ी मामले में पूजा खेडकर को 5 सितंबर तक गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा दी है। हाईकोर्ट ने पूजा की अग्रिम जमानत याचिका पर दिल्ली पुलिस और संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) को नोटिस जारी किया है।
इससे पहले, दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद ने पूजा खेडकर की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई 29 अगस्त, 2024 तक टाल दी थी। यह स्थगन इसलिए किया गया था क्योंकि दिल्ली पुलिस ने मामले में अपना जवाब दाखिल नहीं किया था। खेडकर का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ लूथरा ने भी यूपीएससी के जवाब की समीक्षा के लिए अतिरिक्त समय मांगा, जिसमें अग्रिम जमानत याचिका का विरोध किया गया है।
सुनवाई की पिछली तारीख पर, दिल्ली हाई कोर्ट ने खेडकर की अग्रिम जमानत याचिका के संबंध में दिल्ली पुलिस और यूपीएससी को नोटिस जारी किए थे। खेड़कर (Puja Khedkar) पर धोखाधड़ी करके सिविल सेवा परीक्षा पास करने का FIR दर्ज है। पूजा जिला अदालत के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें उन्हें जमानत देने से इनकार किया गया था। एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा में अतिरिक्त अवसर पाने के लिए अपनी पहचान गलत बताई।
दिल्ली हाई कोर्ट ने पहले कहा था कि पूजा खेडकर को जमानत देने से इनकार करने वाले ट्रायल कोर्ट के आदेश में पर्याप्त चर्चा का अभाव है, जिसमें अन्य लोगों की संलिप्तता के बारे में सरकारी वकील के दावे का केवल संक्षिप्त उल्लेख है। हाई कोर्ट ने पुलिस को निर्देश दिया था कि कार्यवाही लंबित रहने के कारण खेडकर को गिरफ्तार न किया जाए।
आरोप है कि पूजा खेडकर ने आरक्षण का लाभ पाने के लिए यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा, 2022 के अपने आवेदन में कथित तौर पर गलत जानकारी दी थी। यूपीएससी ने 31 जुलाई को खेडकर की उम्मीदवारी रद्द कर दी और उन्हें भविष्य की परीक्षाओं से वंचित कर दिया।
आयोग ने कहा कि पिछले 15 वर्षों में खेडकर का यह एकमात्र मामला है, जिसमें वह यह पता नहीं लगा सका कि खेडकर ने एक अभ्यर्थी के लिए सीएसई परीक्षा में बैठने के लिए निर्धारित प्रयासों से ज्यादा बार परीक्षा दी। आरोप है कि उन्होंने न सिर्फ अपना नाम बदला, बल्कि अपने माता-पिता के नाम भी बदल दिए।
इसी महीने 1 अगस्त को दिल्ली की एक सत्र अदालत ने खेडकर को अग्रिम जमानत देने से इनकार करते हुए कहा था कि उनके खिलाफ गंभीर आरोप हैं जिनकी गहन जांच की आवश्यकता है।
खेडकर ने सत्र अदालत में दायर याचिका में कहा था कि उन पर तुरंत गिरफ्तारी का खतरा मंडरा रहा है। जज ने दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया था कि वह अपनी जांच पूरी निष्पक्षता से करे, ताकि पता लगाया जा सके कि हाल के दिनों में किन उम्मीदवारों की सिफारिश की गई थी, जिन्होंने अवैध रूप से ऐसे लाभ उठाए होंगे।