प्रदूषण रोकथाम के मामले में अमेरिका-ब्रिटेन से क्या सीख सकता है भारत? थरूर ने छेड़ दी है राजधानी बदलने की बड़ी बहस

Air Pollution: शशी थरूर ने दिल्ली में स्मॉग को लेकर कोई ठोस कदम न उठाए जाने पर भी चिंता जाहिर की है। दरअसल दिल्ली और उसके आस-पास के इलाके NCR में भयंकर वायु प्रदूषण की समस्या के बीच थरूर ने राजधानी बदलने की एक गंभीर बहस छेड़ दी है

अपडेटेड Nov 22, 2024 पर 6:15 AM
वायु प्रदूषण के मुद्दे पर शशि थरूर ने छेड़ दी है राजधानी बदलने की बड़ी बहस

पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में स्मॉग को लेकर नई बहस छेड़ दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा है कि दिल्ली की हवा विश्व के दूसरे सबसे प्रदूषित शहर ढाका से करीब पांच गुना ज्यादा जहरीली है। उन्होंने कहा- दिल्ली में नवंबर से जनवरी महीने तक रहना बेहद मुश्किल हो जाता है. क्या इसे देश की राजधानी रहना चाहिए?

थरूर ने दिल्ली में स्मॉग को लेकर कोई ठोस कदम न उठाए जाने पर भी चिंता जाहिर की है। दरअसल दिल्ली और उसके आस-पास के इलाके NCR में भयंकर वायु प्रदूषण की समस्या के बीच थरूर ने राजधानी बदलने की एक गंभीर बहस छेड़ दी है। थरूर का यह सवाल केंद्र में सत्तारूढ़ बीजेपी और दिल्ली में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी की तरफ भी निशाना है।

अनोखा नहीं है विचार


दरअसल राजधानी बदलने का विचार अनोखा नहीं है और इंडोनेशिया जैसे देश इस पर काम भी शुरू कर चुके हैं। साल 2022 में इंडोनेशिया सरकार ने अपनी राजधानी जकार्ता से नौसंतारा शिफ्ट करने का विधेयक पास किया था। बता दें कि इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता भी अपनी खराब एअर क्वालिटी के लिए पहचान रखती है। 2045 तक पूर्ण रूप से इंडोनेशिया की राजधानी नौसंतारा में शिफ्ट कर दी जाएगी। हालांकि राजधानी बदलने के पीछे इंडोनेशिया के कुछ और भी कारण हैं।

2016 से शुरू हुई गंभीर स्मॉग की समस्या

देश की राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण की समस्या लंबे समय से रही है। लेकिन 2016 में पहली बार स्मॉग की समस्या विकराल रूप में सामने आई थी। कई दिनों राजधानी दिल्ली और आस-पास के इलाकों में आसमान पर स्मॉग की गहरी धुंध छाई हुई थी। इसके बाद 8 साल बीत जाने के बावजूद अभी तक कोई बड़ा परिवर्तन होता नहीं दिख रहा है। स्मॉग से निपटने को लेकर दिल्ली की आप सरकार और उसके मुखिया सीएम अरविंद केजरीवाल की तरफ भी कई दावे किए गए लेकिन अभी तक कोई सकारात्मक नतीजा सामने नहीं आया है।

इसके अलावा हरियाणा और पंजाब में पराली जलाने से रोकने के उपाय भी किए जा रहे हैं। लेकिन अभी इसका कोई खास असर होता नहीं दिख रहा है। प्रदूषण की समस्या बढ़ने के साथ ही ग्रैप के एहतियाती उपाय किए जाते हैं। हालांकि ये उपाय फौरी तौर पर भले राहत पहुंचा दें लेकिन लंबे समय के विकल्प नहीं हैं।

स्मॉग की समस्या पर अब तक कई रिपोर्ट्स

स्मॉग की समस्या को लेकर कई रिपोर्ट्स सामने आ चुकी हैं। कभी पराली तो कभी कभी अन्य कारणों को इसका जिम्मेदार ठहराया गया है। लेकिन इन सबके बीच आम जनता को स्मॉग से राहत नहीं मिली है। CREA की हालिया रिपोर्ट में कहा गया है कि दिल्ली-एनसीआर में पराली की तुलना में थर्मल पावर प्लांट 16 गुना ज्यादा प्रदूषण करते हैं। रिपोर्ट में इसे बड़ा कारण माना गया है।

स्मॉग से हुए बड़े कांड, फिर चेते अमेरिका और ब्रिटेन

दुनिया स्मॉग की वजह से कई बडे़ कांड झेल चुकी है। 1948 में अमेरिका के पेंसिलवेनिया शहर में चार दिनों तक स्मॉग रहने की वजह से 6000 हजार लोग बीमार पड़ गए और 20 लोगों की मौत हो गई थी। इसे अमेरिका के इतिहास में स्मॉग की सबसे भीषण घटना में गिना जाता है।

1952 में केवल चार दिन के स्मॉग की वजह से लंदन में 4 हजार लोगों की मौत गई थी। 5 दिसंबर से 9 दिसंबर तक के स्मॉग ने हजारों लोगों की जान ले ली थी। माना जाता है कि वर्तमान में दुनिया में चल रही एयर क्वालिटी इंडेक्स की व्यवस्था और गाइडलाइंस में इन घटनाओं का बहुत बड़ा हिस्सा है। एक के बाद एक कानून और गाइडलाइंस लाए गए जिससे लोगों को राहत देने की कोशिश की गई।

कई कारणों से राजधानी बदलते हैं देश, इंडोनेशिया कर चुका है शुरुआत

राजधानी बदलने की बात करें तो दुनिया के कई देश ऐसे निर्णय अलग-अलग वजहों से लेते रहे हैं। इनमें राजनीतिक, भौगोलिक और पर्यावरणीय कारण शामिल रहे हैं। शशि थरूर ने जिस सवाल को उठाया है उस पर आगे भी राजनीतिक प्रतिक्रिया देखने को मिल सकती है। दरअसल दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण को लेकर एक बात स्पष्ट हो चुकी है कि इसे लेकर व्यापक राजनीतिक सहमति की आवश्यकता है। इसे रोकने के प्रयासों में राज्य और केंद्र दोनों ही सरकारों को एक साथ काम करना होगा।

दरअसल प्रदूषण की इस समस्य से निजात पाने के लिए राजधानी बदलने से लेकर अन्य सभी उपायों के लिए सभी राजनीतिक पार्टियों का एक मंच पर आना जरूरी है। करोड़ों लोगों की जिंदगी खतरे में है और आरोप-प्रत्यारोप से कोई निष्कर्ष नहीं निकलने वाला। अब थरूर द्वारा बहस छेड़े जाने के बाद राजधानी दिल्ली और देश के अलग-अलग इलाकों में स्मॉग और प्रदूषण पर चर्चा तेज हो सकती है। और अगर ऐसा होता है तो इसका सबसे पहला फायदा आम लोगों को होने वाला है।

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